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Hisar News: 29 जून को सोमवती अमावस्या पर बनेगा दुर्लभ संयोग
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Thu, 18 Jun 2026 11:18 PM IST
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हिसार। इस वर्ष 29 जून का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इस दिन सोमवती अमावस्या का दुर्लभ संयोग बन रहा है जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष पुण्यदायी रहेगा। पंडित मनोहर के अनुसार अमावस्या तिथि का सोमवार के दिन पड़ना इस दिन के महत्व को कई गुना बढ़ा देता है। इसके साथ ही इसी दिन दो ज्येष्ठ मासों का विशेष क्रम भी पूर्ण होगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवती अमावस्या पर पवित्र नदियों, सरोवरों और तीर्थ स्थलों में स्नान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। श्रद्धालु इस दिन प्रातःकाल स्नान कर भगवान विष्णु, भगवान शिव और पीपल वृक्ष की विधिवत पूजा-अर्चना करेंगे। पीपल वृक्ष की परिक्रमा और जल अर्पित करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है तथा अनेक प्रकार की बाधाओं का निवारण होता है।
पंडित मनोहर ने बताया कि यह दिन पितरों के निमित्त किए जाने वाले तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य के लिए भी अत्यंत फलदायी माना जाता है। श्रद्धालु अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण करेंगे तथा जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र एवं अन्य उपयोगी सामग्री का दान देंगे। इस दिन किया गया दान कई गुना फल देने वाला माना जाता है।
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मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजनों की तैयारियां शुरू हो गई हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए व्यवस्थाएं की जा रही हैं। सोमवती अमावस्या को आत्मचिंतन, आध्यात्मिक साधना और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने का भी श्रेष्ठ अवसर माना जाता है।
पंडित मनोहर ने कहा कि श्रद्धा और विश्वास के साथ किए गए स्नान, दान, जप, तप और पूजा-पाठ से व्यक्ति को मानसिक शांति, आध्यात्मिक संतोष और शुभ फल की प्राप्ति होती है। इसी कारण 29 जून की सोमवती अमावस्या को वर्ष की महत्वपूर्ण धार्मिक तिथियों में से एक माना जा रहा है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवती अमावस्या पर पवित्र नदियों, सरोवरों और तीर्थ स्थलों में स्नान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। श्रद्धालु इस दिन प्रातःकाल स्नान कर भगवान विष्णु, भगवान शिव और पीपल वृक्ष की विधिवत पूजा-अर्चना करेंगे। पीपल वृक्ष की परिक्रमा और जल अर्पित करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है तथा अनेक प्रकार की बाधाओं का निवारण होता है।
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पंडित मनोहर ने बताया कि यह दिन पितरों के निमित्त किए जाने वाले तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य के लिए भी अत्यंत फलदायी माना जाता है। श्रद्धालु अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण करेंगे तथा जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र एवं अन्य उपयोगी सामग्री का दान देंगे। इस दिन किया गया दान कई गुना फल देने वाला माना जाता है।
मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजनों की तैयारियां शुरू हो गई हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए व्यवस्थाएं की जा रही हैं। सोमवती अमावस्या को आत्मचिंतन, आध्यात्मिक साधना और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने का भी श्रेष्ठ अवसर माना जाता है।
पंडित मनोहर ने कहा कि श्रद्धा और विश्वास के साथ किए गए स्नान, दान, जप, तप और पूजा-पाठ से व्यक्ति को मानसिक शांति, आध्यात्मिक संतोष और शुभ फल की प्राप्ति होती है। इसी कारण 29 जून की सोमवती अमावस्या को वर्ष की महत्वपूर्ण धार्मिक तिथियों में से एक माना जा रहा है।