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Hisar News: स्क्रीन के उजाले की कैद में रीढ़ की आजादी
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हिसार। अगर आप भी घंटों लैपटॉप या मोबाइल स्क्रीन पर नजरें गड़ाए रहते हैं तो सावधान हो जाइए। आपकी यह आदत आपको गंभीर रूप से बीमार बना रही है। देश के युवाओं में इन दिनों टेक नेक सिंड्रोम के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। अस्पताल की ओपीडी में आने वाले काफी युवाओं में गर्दन और रीढ़ की हड्डी के दर्द से जुड़ी इस बीमारी के लक्षण मिल रहे हैं।
नागरिक अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ सुरेश कौशिक बताते हैं कि जब हम स्मार्टफोन या लैपटॉप का इस्तेमाल करते हैं, तो अपनी गर्दन को आगे की तरफ झुका लेते हैं। लगातार कई घंटों तक इसी पोजीशन में रहने के कारण गर्दन की मांसपेशियों, रीढ़ की हड्डी और नसों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। इसी स्थिति को मेडिकल की भाषा में ''टेक नेक सिंड्रोम'' या ''टेक्स्ट नेक'' कहा जाता है।
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रीढ़ की हड्डी पर पड़ता है 27 किलो का वजन
चिकित्सकों के अनुसार, सामान्य स्थिति में हमारे सिर का वजन करीब 5 किलोग्राम होता है लेकिन जब हम मोबाइल देखने के लिए अपनी गर्दन को 60 डिग्री तक झुकाते हैं तो रीढ़ की हड्डी पर यह वजन बढ़कर लगभग 27 किलोग्राम हो जाता है। लगातार इतना भारी दबाव झेलने के कारण गर्दन की हड्डियां कमजोर होने लगती हैं और उनका आकार बिगड़ने लगता है।
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ये हैं प्रमुख लक्षण :
- गर्दन, कंधों और ऊपरी पीठ में लगातार तेज दर्द होना।
- हाथों और उंगलियों में झुनझुनी या सूनापन महसूस होना।
- लगातार सिरदर्द और चक्कर आने की समस्या।
- बैठने और खड़े होने के पोस्चर (मुद्रा) का पूरी तरह बिगड़ जाना।
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यह हैं बचाव के उपाय :
विशेषज्ञों का कहना है कि थोड़ी सी सावधानी से इस बीमारी से बचा जा सकता है। मोबाइल का इस्तेमाल करते समय स्क्रीन को हमेशा अपनी आंखों के समानांतर रखें। हर 30 मिनट के काम के बाद 2 मिनट का ब्रेक लें और गर्दन को स्ट्रेच (मांसपेशियों को धीरे-धीरे हिलाकर या खींचकर आराम देना) करें । लगातार बढ़ रहा यह दर्द आगे चलकर ''सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस'' या ''स्लिप डिस्क'' का रूप ले सकता है जिससे सर्जरी तक की नौबत आ सकती है।
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- मेरा बेटा दिन में फोन का काफी ज्यादा इस्तेमाल करता था। खासकर रात के समय लगातार कई घंटों तक लेटकर मोबाइल इस्तेमाल करता था। इस कारण से उसकी गर्दन में काफी तकलीफ रहने लगी। इस पर उसे चिकित्सक को दिखाया। चिकित्सक ने उसे ज्यादा मोबाइल इस्तेमाल न करने की सलाह दी।
सविता, निवासी, न्यू मॉडल टाउन
- मेरे 15 साल के बेटे के अचानक गर्दन व पीठ में दर्द होने लगा। इस पर मैं उसे चिकित्सक के पास लेकर गई तो चिकित्सक ने इसका कारण अत्याधिक मोबाइल फोन का इस्तेमाल करना बताया। अब मैं अपने बेटे को ज्यादा फोन का इस्तेमाल नहीं करने देती।
वंदना, निवासी, आजाद नगर
नागरिक अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ सुरेश कौशिक बताते हैं कि जब हम स्मार्टफोन या लैपटॉप का इस्तेमाल करते हैं, तो अपनी गर्दन को आगे की तरफ झुका लेते हैं। लगातार कई घंटों तक इसी पोजीशन में रहने के कारण गर्दन की मांसपेशियों, रीढ़ की हड्डी और नसों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। इसी स्थिति को मेडिकल की भाषा में ''टेक नेक सिंड्रोम'' या ''टेक्स्ट नेक'' कहा जाता है।
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रीढ़ की हड्डी पर पड़ता है 27 किलो का वजन
चिकित्सकों के अनुसार, सामान्य स्थिति में हमारे सिर का वजन करीब 5 किलोग्राम होता है लेकिन जब हम मोबाइल देखने के लिए अपनी गर्दन को 60 डिग्री तक झुकाते हैं तो रीढ़ की हड्डी पर यह वजन बढ़कर लगभग 27 किलोग्राम हो जाता है। लगातार इतना भारी दबाव झेलने के कारण गर्दन की हड्डियां कमजोर होने लगती हैं और उनका आकार बिगड़ने लगता है।
ये हैं प्रमुख लक्षण :
- गर्दन, कंधों और ऊपरी पीठ में लगातार तेज दर्द होना।
- हाथों और उंगलियों में झुनझुनी या सूनापन महसूस होना।
- लगातार सिरदर्द और चक्कर आने की समस्या।
- बैठने और खड़े होने के पोस्चर (मुद्रा) का पूरी तरह बिगड़ जाना।
यह हैं बचाव के उपाय :
विशेषज्ञों का कहना है कि थोड़ी सी सावधानी से इस बीमारी से बचा जा सकता है। मोबाइल का इस्तेमाल करते समय स्क्रीन को हमेशा अपनी आंखों के समानांतर रखें। हर 30 मिनट के काम के बाद 2 मिनट का ब्रेक लें और गर्दन को स्ट्रेच (मांसपेशियों को धीरे-धीरे हिलाकर या खींचकर आराम देना) करें । लगातार बढ़ रहा यह दर्द आगे चलकर ''सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस'' या ''स्लिप डिस्क'' का रूप ले सकता है जिससे सर्जरी तक की नौबत आ सकती है।
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- मेरा बेटा दिन में फोन का काफी ज्यादा इस्तेमाल करता था। खासकर रात के समय लगातार कई घंटों तक लेटकर मोबाइल इस्तेमाल करता था। इस कारण से उसकी गर्दन में काफी तकलीफ रहने लगी। इस पर उसे चिकित्सक को दिखाया। चिकित्सक ने उसे ज्यादा मोबाइल इस्तेमाल न करने की सलाह दी।
सविता, निवासी, न्यू मॉडल टाउन
- मेरे 15 साल के बेटे के अचानक गर्दन व पीठ में दर्द होने लगा। इस पर मैं उसे चिकित्सक के पास लेकर गई तो चिकित्सक ने इसका कारण अत्याधिक मोबाइल फोन का इस्तेमाल करना बताया। अब मैं अपने बेटे को ज्यादा फोन का इस्तेमाल नहीं करने देती।
वंदना, निवासी, आजाद नगर