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बजट विश्लेषण : आंकड़ों की दृष्टि से सुदृढ़ पर सामाजिक यथार्थ की दृष्टि से अधूरा है बजट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 02 Feb 2026 01:16 AM IST
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Budget Analysis: Strong from a statistical perspective but incomplete from a social reality perspective.
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हिसार। केंद्रीय बजट विकासोन्मुख, पूंजीगत निवेश प्रधान और राजकोषीय रूप से संतुलित है। यह बजट करदाताओं को तत्काल राहत देने के बजाय भारतीय अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक रूप से सशक्त करने, अवसंरचना विस्तार और वित्तीय अनुशासन बनाए रखने की स्पष्ट दिशा देता है। गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय के हरियाणा स्कूल ऑफ बिजनेस के प्रो. कर्मपाल नरवाल ने यह बात कही।
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प्रो. नरवाल ने कहा कि वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के दौर में यह बजट आंकड़ों की दृष्टि से सुदृढ़ जरूर है, लेकिन सामाजिक यथार्थ की दृष्टि से कुछ अधूरा प्रतीत होता है। बजट को 10 में से साढ़े सात अंक देते हुए उन्होंने बताया कि बजट की सबसे बड़ी विशेषता पूंजीगत व्यय पर निरंतर और मजबूत फोकस है। वर्ष 2026-27 के लिए पूंजीगत व्यय 12.22 लाख करोड़ रुपये और प्रभावी पूंजीगत व्यय 17.14 लाख करोड़ रुपये प्रस्तावित किया गया है, जो सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग 4.4 प्रतिशत है। यह अवसंरचना, परिवहन, ऊर्जा, शहरी विकास और उत्पादक परिसंपत्तियों के निर्माण के प्रति सरकार की दीर्घकालिक सोच को दर्शाता है।
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हालांकि ब्याज भुगतान 14.04 लाख करोड़ रुपये रहने से कुल व्यय का लगभग 20 प्रतिशत इसी मद में खर्च होना एक बड़ी संरचनात्मक चुनौती बना हुआ है। यह दर्शाता है कि पिछले वर्षों की उधारी का बोझ अब भी बजट पर दबाव डाल रहा है।
कैपिटल गेन टैक्स पर स्पष्टता के अभाव से बाजार निराश
कैपिटल गेन टैक्स में किसी प्रकार की राहत या स्पष्टता न मिलने, कॉरपोरेट सेक्टर, स्टार्ट-अप्स और एमएसएमई के लिए बड़े सुधारात्मक कदमों के अभाव व विनिवेश नीति पर ठोस रोडमैप न होने से बाजार की धारणा कमजोर हुई। राजकोषीय अनुशासन पर सरकार का जोर आर्थिक दृष्टि से आवश्यक है, लेकिन इससे अल्पकालिक विकास को गति देने वाले उपाय सीमित रह गए।
संसाधन हस्तांतरण में बढ़ोतरी से सहकारी संघवाद को मजबूती
प्रो. नरवाल ने कहा कि राज्यों के लिए संसाधन हस्तांतरण के मामले में बजट 2026–27 सहकारी संघवाद को मजबूत करता नजर आता है। राज्यों और विधानमंडल वाले केंद्र शासित प्रदेशों को कुल 25.44 लाख करोड़ रुपये का हस्तांतरण प्रस्तावित किया गया है, जो 2024–25 के वास्तविक आंकड़ों से 3.78 लाख करोड़ रुपये अधिक है। ब्यूरो
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