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Hisar News: निजी अस्पताल के संचालक, चिकित्सक व एक महिला के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज
Wed, 08 Jul 2026 01:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Wed, 08 Jul 2026 01:31 AM IST
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नारनौंद। खेड़ी लोहचब स्थित श्रीकृष्णा मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल में फर्जी जन्म पंजीकरण और बिना वैध दस्तावेजों के इलाज किए जाने के मामले में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है। स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट के आधार पर नारनौंद थाना पुलिस ने अस्पताल संचालक, एक महिला चिकित्सक और एक महिला के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जांच टीम इंचार्ज एवं सीएचसी मिर्चपुर इंचार्ज डॉ. विक्रम गोरिया ने बताया कि 2 जुलाई की शाम अस्पताल का निरीक्षण किया गया था। मौके पर मौजूद दो चिकित्सकों ने उत्तर प्रदेश का पंजीकरण तो दिखाया लेकिन हरियाणा में पंजीकरण संबंधी कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके।
अस्पताल में मिले तीन जन्म पंजीकरण प्रपत्रों पर बीएएमएस चिकित्सक डॉ. रवीना की मुहर लगी मिली, जबकि जांच में पाया कि उनका पंजीकरण अप्रैल 2026 में ही समाप्त हो चुका था। टीम ने कई बार उन्हें मौके पर बुलाने का प्रयास किया लेकिन वह जांच के लिए अस्पताल नहीं पहुंचीं और न ही उनके पंजीकरण के नवीनीकरण से संबंधित कोई दस्तावेज प्रस्तुत किया गया।
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जांच के दौरान अस्पताल का डिलीवरी रजिस्टर भी खंगाला गया। इसमें 23 जनवरी 2020 से 30 जून 2026 तक कुल 27 प्रसव दर्ज मिले जिनमें 26 सामान्य प्रसव और एक सिजेरियन प्रसव शामिल था। इसी दौरान प्रसव पीड़ा से जूझ रही गांव कोथ कलां निवासी 25 वर्षीय गर्भवती कविता अस्पताल में भर्ती मिली। जांच में उसका हीमोग्लोबिन केवल 7.6 ग्राम पाया गया, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उसे तत्काल सरकारी एंबुलेंस से नागरिक अस्पताल हिसार रेफर कराया।
स्वास्थ्य विभाग ने अपनी रिपोर्ट में अस्पताल संचालक रमेश कुमार, डॉ. रवीना और संबंधित महिला मनजीत के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की थी। इसी आधार पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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बॉक्स :
6 हजार रुपये लेकर फर्जी पंजीकरण कराने का आरोप
जांच रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अस्पताल में तीन ऐसे जन्म पंजीकरण किए गए जिनकी डिलीवरी अस्पताल में नहीं बल्कि खेड़ी लोहचब निवासी एक महिला मनजीत के निजी क्लीनिक में कराई गई थी। रिपोर्ट के अनुसार संबंधित महिला के पास चिकित्सकीय उपचार करने की कोई वैध योग्यता नहीं थी। इसके बावजूद अस्पताल के माध्यम से इन बच्चों का जन्म पंजीकरण कराया गया। जांच में अस्पताल संचालक रमेश कुमार ने कथित रूप से इसके बदले 6 हजार रुपये लेने की बात स्वीकार की।
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जांच टीम इंचार्ज एवं सीएचसी मिर्चपुर इंचार्ज डॉ. विक्रम गोरिया ने बताया कि 2 जुलाई की शाम अस्पताल का निरीक्षण किया गया था। मौके पर मौजूद दो चिकित्सकों ने उत्तर प्रदेश का पंजीकरण तो दिखाया लेकिन हरियाणा में पंजीकरण संबंधी कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके।
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अस्पताल में मिले तीन जन्म पंजीकरण प्रपत्रों पर बीएएमएस चिकित्सक डॉ. रवीना की मुहर लगी मिली, जबकि जांच में पाया कि उनका पंजीकरण अप्रैल 2026 में ही समाप्त हो चुका था। टीम ने कई बार उन्हें मौके पर बुलाने का प्रयास किया लेकिन वह जांच के लिए अस्पताल नहीं पहुंचीं और न ही उनके पंजीकरण के नवीनीकरण से संबंधित कोई दस्तावेज प्रस्तुत किया गया।
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जांच के दौरान अस्पताल का डिलीवरी रजिस्टर भी खंगाला गया। इसमें 23 जनवरी 2020 से 30 जून 2026 तक कुल 27 प्रसव दर्ज मिले जिनमें 26 सामान्य प्रसव और एक सिजेरियन प्रसव शामिल था। इसी दौरान प्रसव पीड़ा से जूझ रही गांव कोथ कलां निवासी 25 वर्षीय गर्भवती कविता अस्पताल में भर्ती मिली। जांच में उसका हीमोग्लोबिन केवल 7.6 ग्राम पाया गया, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उसे तत्काल सरकारी एंबुलेंस से नागरिक अस्पताल हिसार रेफर कराया।
स्वास्थ्य विभाग ने अपनी रिपोर्ट में अस्पताल संचालक रमेश कुमार, डॉ. रवीना और संबंधित महिला मनजीत के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की थी। इसी आधार पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
बॉक्स :
6 हजार रुपये लेकर फर्जी पंजीकरण कराने का आरोप
जांच रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अस्पताल में तीन ऐसे जन्म पंजीकरण किए गए जिनकी डिलीवरी अस्पताल में नहीं बल्कि खेड़ी लोहचब निवासी एक महिला मनजीत के निजी क्लीनिक में कराई गई थी। रिपोर्ट के अनुसार संबंधित महिला के पास चिकित्सकीय उपचार करने की कोई वैध योग्यता नहीं थी। इसके बावजूद अस्पताल के माध्यम से इन बच्चों का जन्म पंजीकरण कराया गया। जांच में अस्पताल संचालक रमेश कुमार ने कथित रूप से इसके बदले 6 हजार रुपये लेने की बात स्वीकार की।