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Hisar News: 15 वर्षों में दूसरी बार रात का पारा जमाव बिंदु के नजदीक पहुंचा
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हिसार सुबह 8:00 दिल्ली रोड से धुंध के समय लाइट जलाकर गुजरते वाहन चालक। संवाद
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हिसार। जनवरी में ठंड के तेवर नरम पड़ने का नाम नहीं ले रहे हैं। वीरवार को 15 वर्षों में दूसरी बार जिले में रात का तापमान जमाव बिंदु के बेहद करीब पहुंच गया। न्यूनतम तापमान 0.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 6.1 डिग्री कम रहा। मौसम का मिजाज नहीं बदला तो शुक्रवार को पारा शून्य तक पहुंचने की संभावना है। इससे पहले वर्ष 2023 में न्यूनतम तापमान माइनस 1.3 डिग्री तक गिरा था।
वीरवार सुबह घने कोहरे और बर्फीली हवाओं के साथ हुई। कोहरे के कारण दृश्यता 50 मीटर से भी कम रही, जिससे सड़कों पर वाहन रेंगते नजर आए और लोगों को आवागमन में भारी परेशानी हुई। दोपहर 12 बजे तक धूप नहीं निकली। हालांकि बाद में तेज धूप निकलने से लोगों को कुछ राहत मिली, लेकिन शाम ढलते ही फिर से ठंड के तेवर सख्त हो गए।
दिन का अधिकतम तापमान 15.4 डिग्री दर्ज किया गया, जो सामान्य से 4.4 डिग्री कम रहा। धूप निकलने से तापमान में 2.2 डिग्री की बढ़ोतरी जरूर हुई, लेकिन रात को गंभीर शीत लहर का असर साफ दिखा।
अत्यधिक ठंड पड़ने की ये है वजह : मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन ने बताया कि इस बार ला नीना के हालात बने हुए हैं। इसके असर से बारिश अधिक होती है और ठंड भी ज्यादा पड़ती है। उन्होंने कहा कि फरवरी माह में भी ठंड के तेवर कड़े रह सकते हैं, जबकि आमतौर पर मकर संक्रांति के बाद ठंड कमजोर पड़ने लगती है।
वीरवार सुबह घने कोहरे और बर्फीली हवाओं के साथ हुई। कोहरे के कारण दृश्यता 50 मीटर से भी कम रही, जिससे सड़कों पर वाहन रेंगते नजर आए और लोगों को आवागमन में भारी परेशानी हुई। दोपहर 12 बजे तक धूप नहीं निकली। हालांकि बाद में तेज धूप निकलने से लोगों को कुछ राहत मिली, लेकिन शाम ढलते ही फिर से ठंड के तेवर सख्त हो गए।
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दिन का अधिकतम तापमान 15.4 डिग्री दर्ज किया गया, जो सामान्य से 4.4 डिग्री कम रहा। धूप निकलने से तापमान में 2.2 डिग्री की बढ़ोतरी जरूर हुई, लेकिन रात को गंभीर शीत लहर का असर साफ दिखा।
अत्यधिक ठंड पड़ने की ये है वजह : मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन ने बताया कि इस बार ला नीना के हालात बने हुए हैं। इसके असर से बारिश अधिक होती है और ठंड भी ज्यादा पड़ती है। उन्होंने कहा कि फरवरी माह में भी ठंड के तेवर कड़े रह सकते हैं, जबकि आमतौर पर मकर संक्रांति के बाद ठंड कमजोर पड़ने लगती है।