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Jhajjar-Bahadurgarh News: जिले में पेयजल के 7385 में से 872 सैंपल फेल, बहादुरगढ़ में 21 सैंपल की ही हो सकी जांच

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 31 Mar 2026 02:15 AM IST
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872 out of 7385 drinking water samples failed in the district, only 21 samples could be tested in Bahadurgarh.
30jjrp05- जन स्वास्थ्य विभाग की लैब में टेस्ट करते कर्मचारी। स्रोत : विभाग
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झज्जर। जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग की तरफ से पानी की गुणवत्ता को लेकर हर साल पेयजल की सैंपलिंग की जाती है। इस साल लगभग 11 प्रतिशत सैंपल फेल हुए हैं। झज्जर डिवीजन नंबर-एक में सबसे ज्यादा सैंपल फेल मिले हैं।
जन स्वास्थ्य विभाग की तरफ से अप्रैल 2025 से मार्च 2026 तक 7385 सैंपल लिए गए इसमें 779 केमिकल सैंपल भरे गए जिसमें 649 सैंपल मानकों पर खरे उतरे जबकि 130 सैंपल फेल हो गए। झज्जर पीएचईडी नंबर-2 में सबसे ज्यादा 49 सैंपल फेल हुए वहीं झज्जर पीएचईडी नंबर-एक में 42 सैंपल अनफिट मिले हैं।
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बैक्ट्रोलोजिकल जांच में कुल 6,606 सैंपल भरे गए जिसमें से 742 अनफिट और 5,864 सैंपल फिट मिले हैं। झज्जर पीएचईडी नंबर-एक में सबसे ज्यादा 356 सैंपल अनफिट सामने आए हैं। बहादुरगढ़ पीएचईडी की बात करें तो केवल 21 सैंपल लिए गए जिसमें 20 फिट और एक अनफिट मिला। इसमें सबसे ज्यादा केमिकल सैंपल लिए गए।
जन स्वास्थ्य विभाग की तरफ से केमिकल और बैक्ट्रोलोजिकल जांच पेयजल की होती है। केमिकल सैंपल में पानी के तत्वों की जांच की जाती है। पानी के तत्वों को बदला नहीं जा सकता यदि उसमें कोई कमी मिलता है तो पानी के सोर्स को बदला जाता है। इसके तहत डीप ट्यूबवेलों पर पानी की जांच की जाती है।
यह जांच सैंपल लेकर लैब में होती है। वहीं बैक्ट्रोलोजिकल सैंपल नहरी पानी के लिए जाते हैं। इसके तहत गांव व शहरी क्षेत्र में घर-घर जाकर कर्मचारी सैंपल लेकर और उनकी फिर लैब में जांच करवाई जाती है।

डिवीजन फिजिकल एंड केमिकल टेस्ट बैक्ट्रोलोजिकल टेस्ट
डिवीजन फिट अनफिट फिट अनफिट
बहादुरगढ़ पीएचईडी 18 01 02 00
झज्जर पीएचईडी-1 184 42 1949 314
झज्जर पीएचईडी-2 163 49 1742 213
झज्जर पीएचईडी-3 132 02 1555 126
प्राइवेट 152ं 36 37 07
एसएचजीएम --- ---- 579 82

वर्जन
विभाग की तरफ से हर साल अलग-अलग पेयजल की सैंपलिंग कराई जाती है जहां पेयजल की गुणवत्ता खराब मिलती है। उसे ठीक करवाकर दोबारा सैंपलिंग की जाती है ताकि लोगों को शुद्ध पेयजल मिल सके।
अश्वनी सांगवान, एक्सईएन, जन स्वास्थ्य एवं अभियांककी विभाग
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