{"_id":"6a82eee746d696df360b28ed","slug":"native-plant-nursery-set-up-at-ratan-tata-city-forest-bahadurgarh-news-c-200-1-bgh1005-126325-2026-08-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jhajjar-Bahadurgarh News: रतन टाटा सिटी फॉरेस्ट में देसी पौधों की नर्सरी तैयार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jhajjar-Bahadurgarh News: रतन टाटा सिटी फॉरेस्ट में देसी पौधों की नर्सरी तैयार
Mon, 17 Aug 2026 04:52 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Mon, 17 Aug 2026 04:52 PM IST
विज्ञापन
फोटो-53: नर्सरी में पौध तैयार करते क्लीन एंड ग्रीन ट्रस्ट के सदस्य। स्रोत ट्रस्ट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बहादुरगढ़। क्लीन एंड ग्रीन ट्रस्ट ने रतन टाटा सिटी फॉरेस्ट में देसी और स्थानीय प्रजातियों की पौध तैयार करने की पहल की है। यह प्रयास शहर के हरित भविष्य के लिए प्रकृति से मिली हरियाली को बचाने पर केंद्रित है। ट्रस्ट का लक्ष्य इस हरियाली को बचाकर शहर तक पहुंचाना है।
ट्रस्ट के सदस्य नीम, पीपल, बरगद, जामुन, अर्जुन, इमली, सहजन और निर्गुंडी जैसी देसी प्रजातियों के बीज व कलम से पौध बना रहे हैं। इन प्रजातियों का चयन स्थानीय जलवायु के अनुकूल होने के कारण किया गया है। ये पौधे पर्यावरण के लिए भी बहुत उपयोगी माने जाते हैं। पौध तैयार करने के लिए दूध की थैली व अन्य प्लास्टिक की थैलियों का प्रयोग किया जाता है।
इससे ये थैलियां कूड़े में जाने से बचती हैं और उनका सदुपयोग होता है। प्लास्टिक की थैलियां नालियों व सीवर में अवरोधक पैदा करती हैं। अब तक एक हजार से ज्यादा पौध तैयार की जा चुकी है। नर्सरी में केवल बीज और कलम से ही पौधे तैयार नहीं किए जा रहे हैं। बारिश के मौसम में पार्कों, सड़कों और गलियों में प्राकृतिक रूप से उगने वाली छोटी पौध को भी पहचाना जाता है।
विज्ञापन
इन्हें सावधानी से निकालकर नर्सरी में नई जिंदगी दी जा रही है। सामान्य तौर पर लोग इन पौधों को अनदेखा कर देते हैं या सफाई के दौरान हटा देते हैं। नर्सरी में इन नन्ही पौध को उचित मिट्टी, पानी और देखभाल देकर मजबूत किया जा रहा है। 10 हेडिंग बनाएं
इंसेट
हरियाली का सफर और जनभागीदारी
इन तैयार पौधों को शहर के पार्कों, सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर रोपित करने की योजना है। क्लीन एंड ग्रीन ट्रस्ट के सदस्य प्रदीप रेढू ने बताया कि भविष्य में ये पौध शहरवासियों को निशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी। ट्रस्ट के सदस्य अजय जैन ने शहरवासियों से इस अभियान में भागीदारी की अपील की है। नागरिक देसी प्रजातियों के बीज या बारिश में उगी छोटी पौध नर्सरी तक पहुंचा सकते हैं। समाजसेवी राजकुमार अरोड़ा और पर्यावरणविद जयपाल सांगवान ने इस पहल को हरियाली बढ़ाने का सरल तरीका बताया है।
0000
रतन टाटा सिटी फॉरेस्ट में देसी पौधों की नर्सरी तैयार
क्लीन एंड ग्रीन ट्रस्ट ने शुरू की हरियाली बचाने की पहल
नीम-पीपल समेत देसी प्रजातियों की पौध तैयार कर रहा ट्रस्ट
प्रकृति की हरियाली को बचाकर शहर तक पहुंचाने का लक्ष्य
प्लास्टिक की थैलियों का सदुपयोग, तैयार किए जा रहे पौधे
एक हजार से ज्यादा देसी पौध तैयार, शहर को मिलेगा हरित सहारा
बारिश में खुद उगने वाली नन्ही पौध को भी मिल रही नई जिंदगी
सफाई में हट जाने वाले पौधों को नर्सरी में दिया जा रहा संरक्षण
स्थानीय जलवायु के अनुकूल प्रजातियों से संवरेगा बहादुरगढ़
बीज और कलम के साथ प्राकृतिक पौधों का भी संरक्षण
विज्ञापन
ट्रस्ट के सदस्य नीम, पीपल, बरगद, जामुन, अर्जुन, इमली, सहजन और निर्गुंडी जैसी देसी प्रजातियों के बीज व कलम से पौध बना रहे हैं। इन प्रजातियों का चयन स्थानीय जलवायु के अनुकूल होने के कारण किया गया है। ये पौधे पर्यावरण के लिए भी बहुत उपयोगी माने जाते हैं। पौध तैयार करने के लिए दूध की थैली व अन्य प्लास्टिक की थैलियों का प्रयोग किया जाता है।
विज्ञापन
इससे ये थैलियां कूड़े में जाने से बचती हैं और उनका सदुपयोग होता है। प्लास्टिक की थैलियां नालियों व सीवर में अवरोधक पैदा करती हैं। अब तक एक हजार से ज्यादा पौध तैयार की जा चुकी है। नर्सरी में केवल बीज और कलम से ही पौधे तैयार नहीं किए जा रहे हैं। बारिश के मौसम में पार्कों, सड़कों और गलियों में प्राकृतिक रूप से उगने वाली छोटी पौध को भी पहचाना जाता है।
विज्ञापन
इन्हें सावधानी से निकालकर नर्सरी में नई जिंदगी दी जा रही है। सामान्य तौर पर लोग इन पौधों को अनदेखा कर देते हैं या सफाई के दौरान हटा देते हैं। नर्सरी में इन नन्ही पौध को उचित मिट्टी, पानी और देखभाल देकर मजबूत किया जा रहा है। 10 हेडिंग बनाएं
इंसेट
हरियाली का सफर और जनभागीदारी
इन तैयार पौधों को शहर के पार्कों, सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर रोपित करने की योजना है। क्लीन एंड ग्रीन ट्रस्ट के सदस्य प्रदीप रेढू ने बताया कि भविष्य में ये पौध शहरवासियों को निशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी। ट्रस्ट के सदस्य अजय जैन ने शहरवासियों से इस अभियान में भागीदारी की अपील की है। नागरिक देसी प्रजातियों के बीज या बारिश में उगी छोटी पौध नर्सरी तक पहुंचा सकते हैं। समाजसेवी राजकुमार अरोड़ा और पर्यावरणविद जयपाल सांगवान ने इस पहल को हरियाली बढ़ाने का सरल तरीका बताया है।
0000
रतन टाटा सिटी फॉरेस्ट में देसी पौधों की नर्सरी तैयार
क्लीन एंड ग्रीन ट्रस्ट ने शुरू की हरियाली बचाने की पहल
नीम-पीपल समेत देसी प्रजातियों की पौध तैयार कर रहा ट्रस्ट
प्रकृति की हरियाली को बचाकर शहर तक पहुंचाने का लक्ष्य
प्लास्टिक की थैलियों का सदुपयोग, तैयार किए जा रहे पौधे
एक हजार से ज्यादा देसी पौध तैयार, शहर को मिलेगा हरित सहारा
बारिश में खुद उगने वाली नन्ही पौध को भी मिल रही नई जिंदगी
सफाई में हट जाने वाले पौधों को नर्सरी में दिया जा रहा संरक्षण
स्थानीय जलवायु के अनुकूल प्रजातियों से संवरेगा बहादुरगढ़
बीज और कलम के साथ प्राकृतिक पौधों का भी संरक्षण