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Jhajjar-Bahadurgarh News: कुत्तों के बधियाकरण में लापरवाही का मामला डीसी तक पहुंचा, वकील ने की थी शिकायत
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फोटो-60: बहादुरगढ़ के विवेकानंद नगर की गली में घूमते कुत्ते। फाइल फोटो
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बहादुरगढ़। कुत्तों के बधियाकरण को लेकर लापरवाही और अनियमितताओं के मामले में जीव प्रेमी वकील नवीन ने 30 दिसंबर को रोहतक रेंज के स्टेट विजिलेंस एवं एंटी करप्शन ब्यूरो को शिकायत दी थी। उनकी शिकायत को पुलिस अधीक्षक ने झज्जर के उपायुक्त को भेज दी है।
पत्र में बताया गया है कि बहादुरगढ़ क्षेत्र में कथित रूप से अवैध एनीमल बर्थ कंट्रोल ऑपरेशनों से संबंधित एक लिखित शिकायत प्राप्त हुई थी। जांच के बाद पाया गया कि यह मामला जिला प्रशासन झज्जर के अधिकार क्षेत्र में आता है इसलिए कार्रवाई के लिए शिकायत को उपायुक्त झज्जर को भेजा गया है।
ब्यूरो ने उपायुक्त से संज्ञान लेते हुए नियमानुसार कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। पत्र की एक प्रति शिकायतकर्ता सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता एवं जीव प्रेमी नवीन सिंगल को भी सूचना के लिए भेजी गई है।
गौरतलब है कि नगर परिषद की ओर से करीब 36 लाख रुपये की लागत से तीन हजार कुत्तों के बधियाकरण का ठेका नैन फाउंडेशन को दिया गया था। दिसंबर माह में एजेंसी द्वारा कुत्तों को पकड़ने का कार्य शुरू होते ही विवाद खड़ा हो गया।
नियमों की अनदेखी और गलत तरीके से काम करने के आरोपों के चलते यह अभियान रोक दिया गया। अधिवक्ता नवीन सिंगल ने शहरी स्थानीय निकाय विभाग, विजिलेंस और पशु कल्याण से जुड़े आठ विभागों व उच्च अधिकारियों को शिकायत भेजी थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि जिस संस्था को ठेका दिया गया, उसके पास पशु जन्म नियंत्रण नियम-2023 के तहत आवश्यक एडब्ल्यूबीआई की मान्यता नहीं थी। इसके बावजूद नसबंदी अभियान शुरू कर दिया गया। वहीं कुत्तों को 50 किलोमीटर से अधिक दूर रोहतक ले जाना भी नियमों के खिलाफ बताया गया।
अधिवक्ता नवीन सिंगल ने कहा कि ठेका प्रक्रिया और इसमें शामिल सभी लोग जांच के दायरे में आते हैं। जांच सही होने पर एजेंसी के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई तय मानी जा रही है।
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पत्र में बताया गया है कि बहादुरगढ़ क्षेत्र में कथित रूप से अवैध एनीमल बर्थ कंट्रोल ऑपरेशनों से संबंधित एक लिखित शिकायत प्राप्त हुई थी। जांच के बाद पाया गया कि यह मामला जिला प्रशासन झज्जर के अधिकार क्षेत्र में आता है इसलिए कार्रवाई के लिए शिकायत को उपायुक्त झज्जर को भेजा गया है।
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ब्यूरो ने उपायुक्त से संज्ञान लेते हुए नियमानुसार कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। पत्र की एक प्रति शिकायतकर्ता सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता एवं जीव प्रेमी नवीन सिंगल को भी सूचना के लिए भेजी गई है।
गौरतलब है कि नगर परिषद की ओर से करीब 36 लाख रुपये की लागत से तीन हजार कुत्तों के बधियाकरण का ठेका नैन फाउंडेशन को दिया गया था। दिसंबर माह में एजेंसी द्वारा कुत्तों को पकड़ने का कार्य शुरू होते ही विवाद खड़ा हो गया।
नियमों की अनदेखी और गलत तरीके से काम करने के आरोपों के चलते यह अभियान रोक दिया गया। अधिवक्ता नवीन सिंगल ने शहरी स्थानीय निकाय विभाग, विजिलेंस और पशु कल्याण से जुड़े आठ विभागों व उच्च अधिकारियों को शिकायत भेजी थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि जिस संस्था को ठेका दिया गया, उसके पास पशु जन्म नियंत्रण नियम-2023 के तहत आवश्यक एडब्ल्यूबीआई की मान्यता नहीं थी। इसके बावजूद नसबंदी अभियान शुरू कर दिया गया। वहीं कुत्तों को 50 किलोमीटर से अधिक दूर रोहतक ले जाना भी नियमों के खिलाफ बताया गया।
अधिवक्ता नवीन सिंगल ने कहा कि ठेका प्रक्रिया और इसमें शामिल सभी लोग जांच के दायरे में आते हैं। जांच सही होने पर एजेंसी के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई तय मानी जा रही है।