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Jhajjar-Bahadurgarh News: उपायुक्त ने मत्स्य पालन योजना की प्रगति का जायजा लिया
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झज्जर। उपायुक्त स्वप्निल रविंद्र पाटिल ने मंगलवार को जिले में चल रही मत्स्य पालन योजना की प्रगति का मौके पर जाकर जायजा लिया। उपायुक्त विभागीय अधिकारियों के साथ भटेड़ा और पाटौदा में चल रहे मत्स्य पालन केंद्रों पर पंहुचे। उन्होंने मत्स्य पालकों से सीधा संवाद किया। मत्स्य पालन के लिए सरकार की ओर से चलाई जा रही अनुदान आधारित योजनाओं की जानकारी दी।
उन्होंने मत्स्य पालकोंं से उत्पादन,परिवहन, स्टोरेज और मार्केटिंग आदि के बारे विस्तार से जानकारी प्राप्त की। भेटड़ा और पाटौदा में प्रगतिशील मत्स्य पालक श्याम पाल, देवेंद्र और संजय तंवर ने अपनी सफलता के अनुभव डीसी के साथ साझा किए। पाटौदा में संजय ने बताया कि सर्दियों में मत्स्य पालन का ऑफ सीजन होने पर मशरूम की खेती करते हैं।
डीसी ने मशरूम के प्लांट का भी दौरा किया और जागरूक किसान की प्रशंसा की। उपायुक्त ने परियोजनाओं के विभिन्न घटकों की विस्तार से समीक्षा करते हुए कहा कि मत्स्य पालन न केवल किसानों की अतिरिक्त आय का सशक्त माध्यम बन रहा है बल्कि ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित कर रहा है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि परियोजनाओं में आधुनिक तकनीकों, वैज्ञानिक पद्धतियों और बेहतर प्रबंधन प्रणाली को प्राथमिकता दी जाए ताकि उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि सुनिश्चित हो सके। डीसी ने कहा कि पंचायती जमीन और जल भराव वाले क्षेत्रों को इच्छुक मत्स्य पालकों को प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराएं।
डीसी ने दौरे के दौरान तालाबों की संरचना, जल की गुणवत्ता, मछलियों के संरक्षण, आहार प्रबंधन, बीज उपलब्धता तथा स्वच्छता संबंधी व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने कहा कि योजनाओं का प्रभाव तभी दिखाई देता है जब मत्स्य पालकों को लाभ मिले। इसके लिए संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें और नियमित रूप से मत्स्य पालकों का मार्गदर्शन करते हुए जागरूक करते रहें।
उपायुक्त स्वप्निल रविंद्र पाटिल ने यह भी निर्देश दिए कि भटेड़ा और पाटोदा में अपनाई जा रही सफल कार्यप्रणालियों का अध्ययन कर उन्हें जिले के अन्य गांवों में लागू करने की संभावनाएं तलाशी जाएं।
उन्होंने कहा कि यदि इन परियोजनाओं के मॉडल को व्यापक स्तर पर अपनाया जाए तो जिले में मत्स्य उत्पादन को नई गति मिलेगी और ग्रामीण क्षेत्र आर्थिक रूप से अधिक सुदृढ़ बनेंगे। इस अवसर पर जिला मत्स्य अधिकारी अमित सिंह, सीएमजीजीए खुशी कौशल, बीडीपीओ धर्मपाल मौजूद रहे।
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उन्होंने मत्स्य पालकोंं से उत्पादन,परिवहन, स्टोरेज और मार्केटिंग आदि के बारे विस्तार से जानकारी प्राप्त की। भेटड़ा और पाटौदा में प्रगतिशील मत्स्य पालक श्याम पाल, देवेंद्र और संजय तंवर ने अपनी सफलता के अनुभव डीसी के साथ साझा किए। पाटौदा में संजय ने बताया कि सर्दियों में मत्स्य पालन का ऑफ सीजन होने पर मशरूम की खेती करते हैं।
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डीसी ने मशरूम के प्लांट का भी दौरा किया और जागरूक किसान की प्रशंसा की। उपायुक्त ने परियोजनाओं के विभिन्न घटकों की विस्तार से समीक्षा करते हुए कहा कि मत्स्य पालन न केवल किसानों की अतिरिक्त आय का सशक्त माध्यम बन रहा है बल्कि ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित कर रहा है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि परियोजनाओं में आधुनिक तकनीकों, वैज्ञानिक पद्धतियों और बेहतर प्रबंधन प्रणाली को प्राथमिकता दी जाए ताकि उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि सुनिश्चित हो सके। डीसी ने कहा कि पंचायती जमीन और जल भराव वाले क्षेत्रों को इच्छुक मत्स्य पालकों को प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराएं।
डीसी ने दौरे के दौरान तालाबों की संरचना, जल की गुणवत्ता, मछलियों के संरक्षण, आहार प्रबंधन, बीज उपलब्धता तथा स्वच्छता संबंधी व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने कहा कि योजनाओं का प्रभाव तभी दिखाई देता है जब मत्स्य पालकों को लाभ मिले। इसके लिए संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें और नियमित रूप से मत्स्य पालकों का मार्गदर्शन करते हुए जागरूक करते रहें।
उपायुक्त स्वप्निल रविंद्र पाटिल ने यह भी निर्देश दिए कि भटेड़ा और पाटोदा में अपनाई जा रही सफल कार्यप्रणालियों का अध्ययन कर उन्हें जिले के अन्य गांवों में लागू करने की संभावनाएं तलाशी जाएं।
उन्होंने कहा कि यदि इन परियोजनाओं के मॉडल को व्यापक स्तर पर अपनाया जाए तो जिले में मत्स्य उत्पादन को नई गति मिलेगी और ग्रामीण क्षेत्र आर्थिक रूप से अधिक सुदृढ़ बनेंगे। इस अवसर पर जिला मत्स्य अधिकारी अमित सिंह, सीएमजीजीए खुशी कौशल, बीडीपीओ धर्मपाल मौजूद रहे।
