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Jind News: नागरिक अस्पताल में 10 जरूरी दवा खत्म, मरीजों को बाहर से खरीदनी पड़ रही
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01जेएनडी10: नागरिक अस्पताल की दवा खिड़की पर लगी मरीजों की भीड़। संवाद
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जींद। नागरिक अस्पताल में इन दिनों गैस और अन्य बीमारी में दी जाने वाली ओमेप्राजोल, ग्लिसरीन, एमआर, एंटासिड, रैनटैक, मिथाइलकोलाबाइन, एल्प्रैक्स, कोमो फ्लेक्स समेत 10 जरूरी दवा की कमी हैं। ऐसे में मरीजों को मजबूरी में बाजार से दवा खरीदनी पड़ रही हैं।
अस्पताल प्रशासन ने संबंधित विभाग को डिमांड भेज दी गई है। वीरवार तक दवा की सप्लाई पहुंचने की उम्मीद है। अस्पताल में रोजाना मनोरोग से संबंधित मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। साइकेट्रिक के 500 से अधिक मरीज नियमित दवा पर निर्भर हैं।
वहीं मरीजों को नींद और मानसिक संतुलन से जुड़ी तीन प्रकार की गोलियां भी उपलब्ध नहीं हैं। इसके अलावा एक ही चिकित्सक के पास इन मरीजों की दवा का प्रबंधन होने से समस्या और बढ़ गई है।
अंगूरी, दर्शन और राकेश का कहना है कि अस्पताल में मुफ्त दवा मिलने की सुविधा होने के बावजूद उन्हें बाहर से महंगी दवा खरीदनी पड़ रही हैं। उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है। उन्हें यह खर्च उठाना मुश्किल हो रहा है जिससे उनका उपचार प्रभावित हो सकता है।
वर्जन
प्रतिदिन होती है 1700 से ज्यादा मरीजों की ओपीडी
नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन 1700 से ज्यादा मरीजों की सामान्य ओपीडी होती है। छुट्टी के अगले दिन की ओपीडी कभी कभी तो 2200 तक पहुंच जाती है। अस्पताल में जरूरी दवा नहीं होने के कारण 100 से 200 मरीजों को परेशानी हो रही है। मानसिक रोगियों की कुछ दवाएं अस्पताल के बाहर बनाए जनऔषधि केंद्र में भी नहीं मिल रही।
वर्जन
अस्पताल में मरीजों के उपचार के लिए लगभग सभी तरह की दवा उपलब्ध हैं। कुछ दवाओं की कमी सामने आई थी। उनकी डिमांड भेजी गई है। वीरवार तक अस्पताल में दवा पहुंच जाएंगी। इसके बाद मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं आने दी जाएगी। जो दवा फिलहाल नहीं हैं, उनकी वैकल्पिक दवाएं हैं। -डाॅ. रघुवीर पूनिया, पीएमओ नागरिक अस्पताल जींद
अस्पताल प्रशासन ने संबंधित विभाग को डिमांड भेज दी गई है। वीरवार तक दवा की सप्लाई पहुंचने की उम्मीद है। अस्पताल में रोजाना मनोरोग से संबंधित मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। साइकेट्रिक के 500 से अधिक मरीज नियमित दवा पर निर्भर हैं।
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वहीं मरीजों को नींद और मानसिक संतुलन से जुड़ी तीन प्रकार की गोलियां भी उपलब्ध नहीं हैं। इसके अलावा एक ही चिकित्सक के पास इन मरीजों की दवा का प्रबंधन होने से समस्या और बढ़ गई है।
अंगूरी, दर्शन और राकेश का कहना है कि अस्पताल में मुफ्त दवा मिलने की सुविधा होने के बावजूद उन्हें बाहर से महंगी दवा खरीदनी पड़ रही हैं। उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है। उन्हें यह खर्च उठाना मुश्किल हो रहा है जिससे उनका उपचार प्रभावित हो सकता है।
वर्जन
प्रतिदिन होती है 1700 से ज्यादा मरीजों की ओपीडी
नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन 1700 से ज्यादा मरीजों की सामान्य ओपीडी होती है। छुट्टी के अगले दिन की ओपीडी कभी कभी तो 2200 तक पहुंच जाती है। अस्पताल में जरूरी दवा नहीं होने के कारण 100 से 200 मरीजों को परेशानी हो रही है। मानसिक रोगियों की कुछ दवाएं अस्पताल के बाहर बनाए जनऔषधि केंद्र में भी नहीं मिल रही।
वर्जन
अस्पताल में मरीजों के उपचार के लिए लगभग सभी तरह की दवा उपलब्ध हैं। कुछ दवाओं की कमी सामने आई थी। उनकी डिमांड भेजी गई है। वीरवार तक अस्पताल में दवा पहुंच जाएंगी। इसके बाद मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं आने दी जाएगी। जो दवा फिलहाल नहीं हैं, उनकी वैकल्पिक दवाएं हैं। -डाॅ. रघुवीर पूनिया, पीएमओ नागरिक अस्पताल जींद