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Jind News: कक्षा तत्परता कार्यक्रम से निखर रही बच्चों की प्रतिभा और आत्मविश्वास
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29जेएनडी08: सीआरपी के तहत बच्चों द्वारा बनाई गई रचनात्मक गतिविधियां। स्रोत संस्थान
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जींद। शिक्षा विभाग के सरकारी स्कूलों में संचालित कक्षा तत्परता कार्यक्रम ने न केवल बच्चों में नई ऊर्जा का संचार किया है बल्कि उनके आत्मविश्वास को भी एक नई पहचान दी है। अभियान के माध्यम से बच्चों की छिपी हुई प्रतिभा खुलकर सामने आ रही है जिससे उनका सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो रहा है।
जिला समन्वयक राजेश वशिष्ठ ने बताया कि कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं ने बच्चों में सकारात्मक सोच और आगे बढ़ने का जुनून पैदा किया है। अब विद्यार्थी केवल किताबों तक सीमित नहीं हैं बल्कि वे स्वयं सीखने की पद्धति को अपना रहे हैं।
स्कूलों में चित्रकला, निबंध लेखन, समूह चर्चा, नाटक, गीत-संगीत और विज्ञान मॉडल निर्माण जैसी गतिविधियां निरंतर आयोजित की जा रही हैं। इन गतिविधियों से बच्चों की कल्पनाशक्ति को पंख लगे हैं और वे अपने विचारों को अभिव्यक्त करने में अधिक सहज और निपुण महसूस कर रहे हैं।
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू बच्चों में सामाजिक और भावनात्मक परिपक्वता लाना है। राजेश वशिष्ठ ने बताया कि समूह में कार्य करने से विद्यार्थियों में सहयोग, अनुशासन और नेतृत्व की भावना मजबूत हुई है। बच्चे अब एक-दूसरे की मद्द करते हुए सामूहिक लक्ष्यों को प्राप्त करना सीख रहे हैं। यह टीम वर्क भविष्य में उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक बनाने में सहायक सिद्ध होगा।
शैक्षणिक मजबूती के साथ-साथ जीवन कौशल में भी बच्चे परिपक्व हो रहे हैं। कक्षा तत्परता कार्यक्रम के सकारात्मक परिणामों ने शिक्षा प्रणाली के प्रति धारणा को भी बदला है। राजकीय स्कूलों में बच्चों के व्यक्तित्व में आ रहे निखार को देखकर अब अभिभावकों का विश्वास भी बढ़ा है। इस पहल ने शिक्षा के क्षेत्र में नई दिशा तय की है।
बच्चों के अटूट जज्बे और जुनून ने यह साबित कर दिया है कि यदि उन्हें सही मार्गदर्शन और अवसर मिले, तो वे किसी भी क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना सकते हैं। इस कार्यक्रम ने सरकारी शिक्षा प्रणाली में नई ऊर्जा और अटूट विश्वास का संचार किया है।
जिला समन्वयक राजेश वशिष्ठ ने बताया कि कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं ने बच्चों में सकारात्मक सोच और आगे बढ़ने का जुनून पैदा किया है। अब विद्यार्थी केवल किताबों तक सीमित नहीं हैं बल्कि वे स्वयं सीखने की पद्धति को अपना रहे हैं।
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स्कूलों में चित्रकला, निबंध लेखन, समूह चर्चा, नाटक, गीत-संगीत और विज्ञान मॉडल निर्माण जैसी गतिविधियां निरंतर आयोजित की जा रही हैं। इन गतिविधियों से बच्चों की कल्पनाशक्ति को पंख लगे हैं और वे अपने विचारों को अभिव्यक्त करने में अधिक सहज और निपुण महसूस कर रहे हैं।
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू बच्चों में सामाजिक और भावनात्मक परिपक्वता लाना है। राजेश वशिष्ठ ने बताया कि समूह में कार्य करने से विद्यार्थियों में सहयोग, अनुशासन और नेतृत्व की भावना मजबूत हुई है। बच्चे अब एक-दूसरे की मद्द करते हुए सामूहिक लक्ष्यों को प्राप्त करना सीख रहे हैं। यह टीम वर्क भविष्य में उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक बनाने में सहायक सिद्ध होगा।
शैक्षणिक मजबूती के साथ-साथ जीवन कौशल में भी बच्चे परिपक्व हो रहे हैं। कक्षा तत्परता कार्यक्रम के सकारात्मक परिणामों ने शिक्षा प्रणाली के प्रति धारणा को भी बदला है। राजकीय स्कूलों में बच्चों के व्यक्तित्व में आ रहे निखार को देखकर अब अभिभावकों का विश्वास भी बढ़ा है। इस पहल ने शिक्षा के क्षेत्र में नई दिशा तय की है।
बच्चों के अटूट जज्बे और जुनून ने यह साबित कर दिया है कि यदि उन्हें सही मार्गदर्शन और अवसर मिले, तो वे किसी भी क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना सकते हैं। इस कार्यक्रम ने सरकारी शिक्षा प्रणाली में नई ऊर्जा और अटूट विश्वास का संचार किया है।
