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Jind News: हाइड्रोजन ट्रेन के वायरिंग और प्लेटिंग में आईं खामी, प्रस्तावित ट्रायल पर संशय
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25जेएनडी17-हाइड्रोजन ट्रेन, जिसका 26 जून को हाई स्पीड ट्रायल लिया जाना है। संवाद
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जींद। हाइड्रोजन ट्रेन के प्रस्तावित हाईस्पीड ट्रायल को लेकर संशय बन गया है। ट्रेन में वायरिंग और प्लेटिंग से जुड़े कार्यों में कुछ तकनीकी खामियां सामने आने के बाद यह स्थिति बनी है। ऐसे में 26 जून को प्रस्तावित हाईस्पीड ट्रायल होगा या नहीं, इस पर अभी निर्णय नहीं लिया गया है।
ट्रेन का हाईस्पीड ट्रायल दिल्ली से सोनीपत होते हुए जींद रूट पर किया जाना प्रस्तावित है। इस दौरान ट्रेन को अधिकतम 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ाया जाना है। रेलवे अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों की निगरानी में होने वाला यह परीक्षण हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ट्रायल से पहले ट्रेन के कुछ हिस्सों में वायरिंग और प्लेटिंग के कार्य में तकनीकी कमियां पाई गई हैं। इन खामियों को दूर करने के लिए लखनऊ से आई अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) की टीम लगातार कार्य कर रही है। टीम की ओर से वायरिंग की दोबारा जांच, कनेक्शन की गुणवत्ता परीक्षण और प्लेटिंग से जुड़े कार्यों को दुरुस्त किया जा रहा है ताकि ट्रायल के दौरान किसी प्रकार की तकनीकी समस्या न आए।
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रेलवे अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा मानकों से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। यदि सभी तकनीकी मानक समय पर पूरे हो जाते हैं तो ट्रायल निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार कराया जाएगा। वहीं, खामियां बरकरार रहने की स्थिति में ट्रायल की तिथि में बदलाव किया जा सकता है।
गौरतलब है कि इससे पहले हाइड्रोजन ट्रेन का कम गति वाला ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। अब रेलवे की ओर से उच्च गति परीक्षण के माध्यम से ट्रेन के विभिन्न तकनीकी पहलुओं, सुरक्षा प्रणाली, ऊर्जा आपूर्ति और संचालन क्षमता का आकलन किया जाना है।
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ट्रेन का हाईस्पीड ट्रायल दिल्ली से सोनीपत होते हुए जींद रूट पर किया जाना प्रस्तावित है। इस दौरान ट्रेन को अधिकतम 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ाया जाना है। रेलवे अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों की निगरानी में होने वाला यह परीक्षण हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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ट्रायल से पहले ट्रेन के कुछ हिस्सों में वायरिंग और प्लेटिंग के कार्य में तकनीकी कमियां पाई गई हैं। इन खामियों को दूर करने के लिए लखनऊ से आई अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) की टीम लगातार कार्य कर रही है। टीम की ओर से वायरिंग की दोबारा जांच, कनेक्शन की गुणवत्ता परीक्षण और प्लेटिंग से जुड़े कार्यों को दुरुस्त किया जा रहा है ताकि ट्रायल के दौरान किसी प्रकार की तकनीकी समस्या न आए।
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रेलवे अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा मानकों से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। यदि सभी तकनीकी मानक समय पर पूरे हो जाते हैं तो ट्रायल निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार कराया जाएगा। वहीं, खामियां बरकरार रहने की स्थिति में ट्रायल की तिथि में बदलाव किया जा सकता है।
गौरतलब है कि इससे पहले हाइड्रोजन ट्रेन का कम गति वाला ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। अब रेलवे की ओर से उच्च गति परीक्षण के माध्यम से ट्रेन के विभिन्न तकनीकी पहलुओं, सुरक्षा प्रणाली, ऊर्जा आपूर्ति और संचालन क्षमता का आकलन किया जाना है।