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Jind News: एलआईसी में प्रस्तावित हिस्सेदारी बिक्री के विरोध में कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन
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05जेएनडी 28: एलआईसी कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन करते हुए कर्मचारी। संवाद
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जींद। भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) में केंद्र सरकार की प्रस्तावित हिस्सेदारी बिक्री के विरोध में बुधवार को जींद स्थित एलआईसी कार्यालय के बाहर कर्मचारियों और अधिकारियों ने लंच-ऑवर के दौरान प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन अखिल भारतीय बीमा कर्मचारी संघ (एआईआईईए) के देशव्यापी आह्वान पर आयोजित किया गया।
कर्मचारियों ने सरकार से एलआईसी में हिस्सेदारी कम करने के निर्णय को वापस लेने की मांग की।जींद शाखा के सचिव रणधीर पहल ने कहा कि सरकार ने तीन अगस्त को ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) के माध्यम से एलआईसी की 2.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने और ग्रीनशू विकल्प के तहत इसे 6.5 प्रतिशत तक बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है।
उनका कहना था कि इससे पहले वर्ष 2022 में भी एलआईसी की हिस्सेदारी बेची जा चुकी है और अब दोबारा विनिवेश का निर्णय सार्वजनिक क्षेत्र के हित में नहीं है।
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एलआईसी केवल एक बीमा कंपनी नहीं, बल्कि करोड़ों पॉलिसीधारकों के भरोसे और देश की बचत से बनी राष्ट्रीय संस्था है। इस संस्था ने वर्षों से देश के विकास, सामाजिक सुरक्षा और जीवन बीमा सेवाओं के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे में सार्वजनिक स्वामित्व को कमजोर करना देश और पॉलिसीधारकों के दीर्घकालिक हितों के विपरीत होगा।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से प्रस्तावित ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) को तत्काल वापस लेने और एलआईसी के सार्वजनिक स्वरूप को बनाए रखने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने इस निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किया तो कर्मचारी संगठन आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध जारी रखेंगे।
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कर्मचारियों ने सरकार से एलआईसी में हिस्सेदारी कम करने के निर्णय को वापस लेने की मांग की।जींद शाखा के सचिव रणधीर पहल ने कहा कि सरकार ने तीन अगस्त को ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) के माध्यम से एलआईसी की 2.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने और ग्रीनशू विकल्प के तहत इसे 6.5 प्रतिशत तक बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है।
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उनका कहना था कि इससे पहले वर्ष 2022 में भी एलआईसी की हिस्सेदारी बेची जा चुकी है और अब दोबारा विनिवेश का निर्णय सार्वजनिक क्षेत्र के हित में नहीं है।
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एलआईसी केवल एक बीमा कंपनी नहीं, बल्कि करोड़ों पॉलिसीधारकों के भरोसे और देश की बचत से बनी राष्ट्रीय संस्था है। इस संस्था ने वर्षों से देश के विकास, सामाजिक सुरक्षा और जीवन बीमा सेवाओं के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे में सार्वजनिक स्वामित्व को कमजोर करना देश और पॉलिसीधारकों के दीर्घकालिक हितों के विपरीत होगा।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से प्रस्तावित ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) को तत्काल वापस लेने और एलआईसी के सार्वजनिक स्वरूप को बनाए रखने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने इस निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किया तो कर्मचारी संगठन आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध जारी रखेंगे।