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Jind News: तहसील में कार्यों की मनमानी फीस वसूल रहे पटवारी
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Mon, 23 Mar 2026 02:57 AM IST
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22जेएनडी14-रंगशाला के पास बना पटवारखाना, जहां पर फीस संबंधित सूची नहीं लगी है। संवाद
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जींद। जिले की तहसीलों में आमजन को अपने काम करवाने के लिए अब सरकारी निर्धारित शुल्क से अधिक राशि चुकानी पड़ रही है। आरोप है कि पटवारी विभिन्न कार्यों के नाम पर मनमानी फीस वसूल रहे हैं जिससे लोगों में रोष बढ़ता जा रहा है। इतना ही नहीं कई मामलों में शुल्क लेने के बावजूद रसीद तक नहीं दी जा रही है जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्रदेश सरकार ने तहसीलों में सभी सेवाओं की फीस सूची सार्वजनिक स्थान पर प्रदर्शित करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। इससे लोगों को सही जानकारी मिल सकेगी और कोई भी कर्मचारी मनमानी नहीं कर सकेगा। लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग दिखाई दे रही है। जिले की सभी तहसीलों और पटवारखाने में अब तक फीस की सूची नहीं लगाई गई है और इसका फायदा उठाकर अतिरिक्त वसूली हो रही है।
हालांकि नामांतरण, जमाबंदी नकल, इंतकाल, फर्द और अन्य राजस्व संबंधित कार्यों के लिए तय शुल्क स्पष्ट रूप से निर्धारित है लेकिन अधिक पैसे मांगे जा रहे हैं। यदि कोई व्यक्ति अधिक शुल्क देने से मना करता है तो उसका काम लटकाया जाता है या बार-बार चक्कर कटवाए जाते हैं। इसको लेकर कई बार मजबूरी में अतिरिक्त पैसे देने पड़ते हैं क्योंकि बिना पैसे दिए काम समय पर नहीं होता।
कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि पैसे लेने के बाद भी उन्हें रसीद नहीं दी जाती। इससे यह स्पष्ट नहीं हो पाता कि कितना शुल्क सरकारी खाते में जमा हुआ और कितना निजी तौर पर लिया गया।
डीसी और राजस्व विभाग को दिए जा चुके हैं आदेश
तहसील और पटवारखाने में संबंधित कार्याें की सूची सार्वजनिक स्थानों में लगाने के लिए वित्तायुक्त राजस्व एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव ने सभी डीसी और राजस्व विभाग अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे। इसको लेकर प्रदेश के कई डीसी ने संबंधित अधिकारियों को पत्र जारी कर दिए हैं लेकिन जींद में अभी तक इसको लेकर पत्र जारी नहीं हुआ है। ऐसे में लोगों को ज्यादा वसूली और रसीद नहीं मिलने के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सवालों के घेरे में कार्यप्रणाली
पूरे मामले में प्रशासन की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है। कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। शिकायतें या तो लंबित रह जाती हैं या फिर संबंधित कर्मचारियों को बचाने की कोशिश की जाती है। लोगों की मांग है कि तहसीलों में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। सभी सेवाओं की फीस सूची स्पष्ट रूप से प्रदर्शित की जाए और बिना रसीद पैसे लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
सजरा की फीस ली, रसीद नहीं दी
पिछले दिनों वह सजरा का नक्शा लेने पटवारखाने में गया था। वहां पर पटवारियों ने उससे नक्शा देने की एवज में 15 रुपये फीस ली लेकिन उसको रसीद नहीं दी। उसने संबंधित कर्मचारी से रसीद भी मांगी लेकिन उन्होंने रसीद नहीं होने का हवाला देकर मना कर दिया।
- अधिवक्ता सुनील वर्मा
यह मामला संज्ञान में है। इसको लेकर संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए जा चुके हैं। जल्द ही तहसील कार्यालय और पटवारखाने में फीस संबंधित सूची लगा दी जाएगी।
- मोहम्मद इमरान रजा, डीसी जींद
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प्रदेश सरकार ने तहसीलों में सभी सेवाओं की फीस सूची सार्वजनिक स्थान पर प्रदर्शित करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। इससे लोगों को सही जानकारी मिल सकेगी और कोई भी कर्मचारी मनमानी नहीं कर सकेगा। लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग दिखाई दे रही है। जिले की सभी तहसीलों और पटवारखाने में अब तक फीस की सूची नहीं लगाई गई है और इसका फायदा उठाकर अतिरिक्त वसूली हो रही है।
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हालांकि नामांतरण, जमाबंदी नकल, इंतकाल, फर्द और अन्य राजस्व संबंधित कार्यों के लिए तय शुल्क स्पष्ट रूप से निर्धारित है लेकिन अधिक पैसे मांगे जा रहे हैं। यदि कोई व्यक्ति अधिक शुल्क देने से मना करता है तो उसका काम लटकाया जाता है या बार-बार चक्कर कटवाए जाते हैं। इसको लेकर कई बार मजबूरी में अतिरिक्त पैसे देने पड़ते हैं क्योंकि बिना पैसे दिए काम समय पर नहीं होता।
कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि पैसे लेने के बाद भी उन्हें रसीद नहीं दी जाती। इससे यह स्पष्ट नहीं हो पाता कि कितना शुल्क सरकारी खाते में जमा हुआ और कितना निजी तौर पर लिया गया।
डीसी और राजस्व विभाग को दिए जा चुके हैं आदेश
तहसील और पटवारखाने में संबंधित कार्याें की सूची सार्वजनिक स्थानों में लगाने के लिए वित्तायुक्त राजस्व एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव ने सभी डीसी और राजस्व विभाग अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे। इसको लेकर प्रदेश के कई डीसी ने संबंधित अधिकारियों को पत्र जारी कर दिए हैं लेकिन जींद में अभी तक इसको लेकर पत्र जारी नहीं हुआ है। ऐसे में लोगों को ज्यादा वसूली और रसीद नहीं मिलने के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सवालों के घेरे में कार्यप्रणाली
पूरे मामले में प्रशासन की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है। कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। शिकायतें या तो लंबित रह जाती हैं या फिर संबंधित कर्मचारियों को बचाने की कोशिश की जाती है। लोगों की मांग है कि तहसीलों में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। सभी सेवाओं की फीस सूची स्पष्ट रूप से प्रदर्शित की जाए और बिना रसीद पैसे लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
सजरा की फीस ली, रसीद नहीं दी
पिछले दिनों वह सजरा का नक्शा लेने पटवारखाने में गया था। वहां पर पटवारियों ने उससे नक्शा देने की एवज में 15 रुपये फीस ली लेकिन उसको रसीद नहीं दी। उसने संबंधित कर्मचारी से रसीद भी मांगी लेकिन उन्होंने रसीद नहीं होने का हवाला देकर मना कर दिया।
- अधिवक्ता सुनील वर्मा
यह मामला संज्ञान में है। इसको लेकर संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए जा चुके हैं। जल्द ही तहसील कार्यालय और पटवारखाने में फीस संबंधित सूची लगा दी जाएगी।
- मोहम्मद इमरान रजा, डीसी जींद

22जेएनडी14-रंगशाला के पास बना पटवारखाना, जहां पर फीस संबंधित सूची नहीं लगी है। संवाद