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Jind News: शहद का संरक्षित मूल्य 120 रुपये प्रति किलो निर्धारित
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Fri, 06 Mar 2026 12:38 AM IST
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जींद। हरियाणा सरकार की तरफ से भावांतर भरपाई योजना के तहत शहद का संरक्षित मूल्य 120 रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित किया गया है। इससे मधुमक्खी पालकों को बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव से राहत मिलेगी और उन्हें अपने उत्पाद का उचित मूल्य सुनिश्चित होगा।
एसडीएम पुलकित मल्होत्रा ने बताया कि हरियाणा सरकार ने मधुमक्खी पालकों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भावांतर भरपाई योजना के तहत शहद के लिए संरक्षित मूल्य तय किया है। यह निर्णय सरकार की किसान हितैषी सोच और कृषि से जुड़ी सहायक गतिविधियों को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
उन्होंने बताया कि मधुमक्खी पालन किसानों के लिए आय का महत्वपूर्ण अतिरिक्त स्रोत बनकर उभरा है। यह न केवल किसानों की आमदनी बढ़ाता है बल्कि परागण के माध्यम से फसलों की उत्पादकता बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाता है। हरियाणा सरकार कृषि विविधीकरण को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा कि योजना के तहत पंजीकरण और सत्यापन की प्रक्रिया मधुक्रांति पोर्टल ( मधुक्रांति डॉट इन ) तथा भावांतर भरपाई योजना पोर्टल (शहद) हॉर्ट हरियाणा डॉट जीओवी डॉट इन के माध्यम से की जाएगी। पंजीकरण की अवधि एक जनवरी से 30 जून तक निर्धारित की गई है। योजना का लाभ लेने के लिए हरियाणा राज्य की सीमा के भीतर सत्यापन अनिवार्य होगा। उन्होंने बताया कि लाभार्थियों को परिवार पहचान पत्र और बैंक खाते के विवरण के आधार पर सत्यापन कराना होगा।
यह प्रक्रिया अधिकृत अधिकारियों द्वारा पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न की जाएगी, ताकि योजना का लाभ वास्तविक मधुमक्खी पालकों तक पहुंच सके। एसडीएम ने मधुमक्खी पालकों से आह्वान किया कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना पंजीकरण करवाकर योजना का लाभ उठाएं।
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एसडीएम पुलकित मल्होत्रा ने बताया कि हरियाणा सरकार ने मधुमक्खी पालकों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भावांतर भरपाई योजना के तहत शहद के लिए संरक्षित मूल्य तय किया है। यह निर्णय सरकार की किसान हितैषी सोच और कृषि से जुड़ी सहायक गतिविधियों को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
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उन्होंने बताया कि मधुमक्खी पालन किसानों के लिए आय का महत्वपूर्ण अतिरिक्त स्रोत बनकर उभरा है। यह न केवल किसानों की आमदनी बढ़ाता है बल्कि परागण के माध्यम से फसलों की उत्पादकता बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाता है। हरियाणा सरकार कृषि विविधीकरण को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा कि योजना के तहत पंजीकरण और सत्यापन की प्रक्रिया मधुक्रांति पोर्टल ( मधुक्रांति डॉट इन ) तथा भावांतर भरपाई योजना पोर्टल (शहद) हॉर्ट हरियाणा डॉट जीओवी डॉट इन के माध्यम से की जाएगी। पंजीकरण की अवधि एक जनवरी से 30 जून तक निर्धारित की गई है। योजना का लाभ लेने के लिए हरियाणा राज्य की सीमा के भीतर सत्यापन अनिवार्य होगा। उन्होंने बताया कि लाभार्थियों को परिवार पहचान पत्र और बैंक खाते के विवरण के आधार पर सत्यापन कराना होगा।
यह प्रक्रिया अधिकृत अधिकारियों द्वारा पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न की जाएगी, ताकि योजना का लाभ वास्तविक मधुमक्खी पालकों तक पहुंच सके। एसडीएम ने मधुमक्खी पालकों से आह्वान किया कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना पंजीकरण करवाकर योजना का लाभ उठाएं।