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Jind News: विद्यार्थियों ने सीखी वर्मी-कम्पोस्टिंग की तकनीक
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09जेएनडी16: प्योर थार आर्गेनिक वर्मी-कम्पोस्टिंग की जानकारी लेते हुए विद्यार्थी। स्रोत संस्थान।
- फोटो : 1
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नरवाना। केएम राजकीय महाविद्यालय में बीए एवं बीएससी लाइफ साइंस के विद्यार्थियों ने बसंत विहार स्थित प्योर थार आर्गेनिक वर्मी-कम्पोस्टिंग यूनिट का शैक्षणिक भ्रमण किया। भ्रमण का उद्देश्य विद्यार्थियों को जैविक अपशिष्ट प्रबंधन, वर्मी-कम्पोस्टिंग की वैज्ञानिक प्रक्रिया की जानकारी देना रहा।
भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को केंचुओं की प्रमुख प्रजाति आइसेनिया फोटिडा के बारे में विस्तार से बताया गया जिसे वर्मी-कम्पोस्टिंग के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है। यह प्रजाति किचन वेस्ट, कृषि अवशेष और गोबर को खाकर उसे पोषक तत्वों से भरपूर जैविक खाद में परिवर्तित करती है।
विद्यार्थियों ने इस पूरी प्रक्रिया को प्रत्यक्ष रूप से देखा जिससे उन्हें इसके व्यावहारिक महत्व की बेहतर समझ मिली। यूनिट के संचालक पवन और सुनील ने वर्मी-कम्पोस्टिंग की संपूर्ण प्रक्रिया जैसे बेड तैयार करना, केंचुओं का प्रबंधन, नमी व तापमान का संतुलन बनाए रखना और तैयार खाद को अलग करने की विधि के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
प्राणीशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रोफेसर कीर्ति बेनीवाल ने बताया कि इस तरह के शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव भी प्रदान करते हैं। इससे उनकी विषय के प्रति रुचि और समझ में वृद्धि होती है। इस अवसर पर प्रो.डॉ. संजय कुमार, तनु और ज्योति मौजूद रहीं।
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भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को केंचुओं की प्रमुख प्रजाति आइसेनिया फोटिडा के बारे में विस्तार से बताया गया जिसे वर्मी-कम्पोस्टिंग के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है। यह प्रजाति किचन वेस्ट, कृषि अवशेष और गोबर को खाकर उसे पोषक तत्वों से भरपूर जैविक खाद में परिवर्तित करती है।
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विद्यार्थियों ने इस पूरी प्रक्रिया को प्रत्यक्ष रूप से देखा जिससे उन्हें इसके व्यावहारिक महत्व की बेहतर समझ मिली। यूनिट के संचालक पवन और सुनील ने वर्मी-कम्पोस्टिंग की संपूर्ण प्रक्रिया जैसे बेड तैयार करना, केंचुओं का प्रबंधन, नमी व तापमान का संतुलन बनाए रखना और तैयार खाद को अलग करने की विधि के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
प्राणीशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रोफेसर कीर्ति बेनीवाल ने बताया कि इस तरह के शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव भी प्रदान करते हैं। इससे उनकी विषय के प्रति रुचि और समझ में वृद्धि होती है। इस अवसर पर प्रो.डॉ. संजय कुमार, तनु और ज्योति मौजूद रहीं।