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भक्ति और संत समागम से होता है परमात्मा का वास : धर्मपाल नाभा
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02जेएनडी23: कथावचन करते हुए कथावाचक धर्मपाल नाभा । संवाद।
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नरवाना। बाबा गैबी साहब के वार्षिकोत्सव के अवसर पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में सोमवार को सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही। हरिनाम संकीर्तन, भजन-कीर्तन और जयकारों से पूरा परिसर भक्तिमय हो गया।
कथावाचक धर्मपाल नाभा ने भक्ति की महिमा पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि जहां सच्ची भक्ति का वास होता है, वहीं स्वयं परमात्मा निवास करते हैं। उन्होंने कहा कि संतों के संग से मनुष्य को भगवान की विशेष कृपा स्वयं प्राप्त होती है।
उन्होंने स्वामी तुलसीदास के प्रसिद्ध वचन संत समागम हरि कथा का भावपूर्ण उल्लेख करते हुए बताया कि संतों का संग और हरिकथा मानव जीवन को पवित्र बनाकर उसे मोक्ष की ओर अग्रसर करती है। धर्मपाल नाभा ने श्रीमद्भागवत को कलियुग में मानव कल्याण का श्रेष्ठ ग्रंथ बताते हुए कहा कि इसमें धर्म, भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है।
कथा से जीवन को सकारात्मक दिशा मिलती है और व्यक्ति के भीतर सदाचार व सेवा भाव जागृत होता है। यह पावन कथा महंत अजयगिरी महाराज के सानिध्य में प्रारंभ की गई। उनके आशीर्वचनों से आयोजन को विशेष आध्यात्मिक गरिमा प्राप्त हुई।
महंत अजयगिरी महाराज ने कहा कि भागवत कथा केवल सुनने का विषय नहीं है, बल्कि इसके उपदेशों को जीवन में उतारना ही सच्ची भक्ति है। कथा के शुभारंभ अवसर पर विधिवत पूजन-अर्चना पार्षद आशुतोष शर्मा एवं अन्य भक्तों द्वारा महंत अजयगिरी महाराज की उपस्थिति में की गई। उपरांत मंगल आरती संपन्न हुई।
आयोजन समिति ने बताया कि आगामी दिनों में श्रीकृष्ण लीला, भक्त प्रह्लाद, ध्रुव चरित्र सहित अनेक प्रेरक प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा। इस अवसर पर तरसेम शर्मा, राजबीर मोर, अशोक मिर्धा, पार्षद आशुतोष शर्मा, काकू शर्मा, अंचल मित्तल, बिंदर मिर्धा, रामकला मिर्धा मौजूद रहे।
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कथावाचक धर्मपाल नाभा ने भक्ति की महिमा पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि जहां सच्ची भक्ति का वास होता है, वहीं स्वयं परमात्मा निवास करते हैं। उन्होंने कहा कि संतों के संग से मनुष्य को भगवान की विशेष कृपा स्वयं प्राप्त होती है।
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उन्होंने स्वामी तुलसीदास के प्रसिद्ध वचन संत समागम हरि कथा का भावपूर्ण उल्लेख करते हुए बताया कि संतों का संग और हरिकथा मानव जीवन को पवित्र बनाकर उसे मोक्ष की ओर अग्रसर करती है। धर्मपाल नाभा ने श्रीमद्भागवत को कलियुग में मानव कल्याण का श्रेष्ठ ग्रंथ बताते हुए कहा कि इसमें धर्म, भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है।
कथा से जीवन को सकारात्मक दिशा मिलती है और व्यक्ति के भीतर सदाचार व सेवा भाव जागृत होता है। यह पावन कथा महंत अजयगिरी महाराज के सानिध्य में प्रारंभ की गई। उनके आशीर्वचनों से आयोजन को विशेष आध्यात्मिक गरिमा प्राप्त हुई।
महंत अजयगिरी महाराज ने कहा कि भागवत कथा केवल सुनने का विषय नहीं है, बल्कि इसके उपदेशों को जीवन में उतारना ही सच्ची भक्ति है। कथा के शुभारंभ अवसर पर विधिवत पूजन-अर्चना पार्षद आशुतोष शर्मा एवं अन्य भक्तों द्वारा महंत अजयगिरी महाराज की उपस्थिति में की गई। उपरांत मंगल आरती संपन्न हुई।
आयोजन समिति ने बताया कि आगामी दिनों में श्रीकृष्ण लीला, भक्त प्रह्लाद, ध्रुव चरित्र सहित अनेक प्रेरक प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा। इस अवसर पर तरसेम शर्मा, राजबीर मोर, अशोक मिर्धा, पार्षद आशुतोष शर्मा, काकू शर्मा, अंचल मित्तल, बिंदर मिर्धा, रामकला मिर्धा मौजूद रहे।

02जेएनडी23: कथावचन करते हुए कथावाचक धर्मपाल नाभा । संवाद।
