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Jind News: 22 लाख खर्च कर मानसिक यातनाओं के बाद वापस लौटा युवक
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जींद। कजाकिस्तान में फर्जी एजेंटों के चंगुल में फंसकर मानसिक और शारीरिक यातनाएं झेलने के बाद सुरक्षित लौटे युवक ने वीरवार को एसपी कार्यालय पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई। पीड़ित हेमराज ने आपबीती सुनाते हुए कहा कि वह चाहता है कि भविष्य में कोई अन्य युवा ऐसे गिरोह के चंगुल में न फंसें।
ढाठरथ निवासी हेमराज ने बताया कि उसने अपने एक दोस्त के साथ मिलकर फोन के जरिए जालंधर के एजेंट मनप्रीत, सोनू और परविंदर कौर से संपर्क किया था। एजेंटों ने 22 लाख रुपये में कनाडा भेजने का झांसा दिया।
27 फरवरी को एजेंटों ने उन्हें दिल्ली से मुंबई की टिकट भेजी। मुंबई पहुंचने पर जब उन्हें अल्माटी (कजाकिस्तान) की टिकट दी गई तो एयरपोर्ट पर उन्हें पता चला कि वह फर्जी है। इसके बाद उन्होंने अपने खर्च पर 33 हजार रुपये देकर नई टिकट खरीदी और 28 फरवरी को अल्माटी पहुंचे।
हेमराज के अनुसार, वहां पहुंचते ही एजेंट उन्हें एक मकान में ले गए जहां उनका सामान और मोबाइल छीन लिया गया। दोनों युवकों को बंधक बनाकर हाथ-पांव बांध दिए गए।
एक मार्च को उनके साथ मारपीट की गई और कपड़े उतरवाकर वीडियो बनाई गई। परिजनों को डराने के लिए जबरन वीडियो में कहलवाया गया कि वे कनाडा के टोरंटो पहुंच चुके हैं ताकि घरवाले 22 लाख रुपये भेज दें।
हेमराज ने सूझबूझ दिखाते हुए अपने अमेरिका में रह रहे भाई को गुप्त लोकेशन भेज दी। इसके बाद चार मार्च को कजाकिस्तान पुलिस ने हेमराज और उसके दोस्त को एजेंटों के चंगुल से छुड़वा लिया। 14 अप्रैल को सही-सलामत घर लौट आए। अब पीड़ित ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि इस तरह के फर्जी एजेंटों पर लगाम लगाई जा सके।
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ढाठरथ निवासी हेमराज ने बताया कि उसने अपने एक दोस्त के साथ मिलकर फोन के जरिए जालंधर के एजेंट मनप्रीत, सोनू और परविंदर कौर से संपर्क किया था। एजेंटों ने 22 लाख रुपये में कनाडा भेजने का झांसा दिया।
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27 फरवरी को एजेंटों ने उन्हें दिल्ली से मुंबई की टिकट भेजी। मुंबई पहुंचने पर जब उन्हें अल्माटी (कजाकिस्तान) की टिकट दी गई तो एयरपोर्ट पर उन्हें पता चला कि वह फर्जी है। इसके बाद उन्होंने अपने खर्च पर 33 हजार रुपये देकर नई टिकट खरीदी और 28 फरवरी को अल्माटी पहुंचे।
हेमराज के अनुसार, वहां पहुंचते ही एजेंट उन्हें एक मकान में ले गए जहां उनका सामान और मोबाइल छीन लिया गया। दोनों युवकों को बंधक बनाकर हाथ-पांव बांध दिए गए।
एक मार्च को उनके साथ मारपीट की गई और कपड़े उतरवाकर वीडियो बनाई गई। परिजनों को डराने के लिए जबरन वीडियो में कहलवाया गया कि वे कनाडा के टोरंटो पहुंच चुके हैं ताकि घरवाले 22 लाख रुपये भेज दें।
हेमराज ने सूझबूझ दिखाते हुए अपने अमेरिका में रह रहे भाई को गुप्त लोकेशन भेज दी। इसके बाद चार मार्च को कजाकिस्तान पुलिस ने हेमराज और उसके दोस्त को एजेंटों के चंगुल से छुड़वा लिया। 14 अप्रैल को सही-सलामत घर लौट आए। अब पीड़ित ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि इस तरह के फर्जी एजेंटों पर लगाम लगाई जा सके।

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