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एचआरए बढ़ोतरी में देरी से हो रहा नुकसान : मलिक
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कैथल। हरियाणा स्कूल लेक्चरर एसोसिएशन ने प्रदेश सरकार से राज्य कर्मचारियों के हाउस रेंट अलाउंस (एचआरए) में तत्काल संशोधन करने की मांग की है। हसला के जिला प्रधान राजीव मलिक ने कहा कि प्रदेश के लाखों कर्मचारी लंबे समय से एचआरए बढ़ोत्तरी की प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से अब तक इस संबंध में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है, जिसके कारण कर्मचारियों को लगातार आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
मलिक ने बताया कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार कर्मचारियों के लिए एक्स, वाई और जेड श्रेणी के शहरों में 24 प्रतिशत, 16 प्रतिशत और 8 प्रतिशत एचआरए निर्धारित किया गया था। साथ ही यह प्रावधान भी किया गया था कि महंगाई भत्ता डीए 25 प्रतिशत से अधिक होने पर एचआरए दरें बढ़कर 27 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 9 प्रतिशत तथा डीए 50 प्रतिशत से अधिक होने पर 30 प्रतिशत, 20 प्रतिशत और 10 प्रतिशत हो जाएंगी।
उन्होंने कहा कि हरियाणा के कर्मचारियों का डीए जुलाई 2021 में 25 प्रतिशत तथा जनवरी 2024 में 50 प्रतिशत के स्तर को पार कर चुका है, लेकिन इसके बावजूद कर्मचारियों को आज भी पुरानी एचआरए दरों पर ही भुगतान किया जा रहा है। यदि सरकार समय पर एचआरए संशोधित करती तो कर्मचारियों को वर्षों पहले ही इसका लाभ मिल जाता। सरकार की इस देरी के कारण कर्मचारियों को प्रतिमाह हजारों रुपये तथा सामूहिक रूप से करोड़ों रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को एचआरए बढ़ोतरी का लाभ मिलना उनका वैधानिक अधिकार है। सरकार को कर्मचारियों के हितों की अनदेखी करने के बजाय उनकी लंबे समय से लंबित मांगों का समाधान प्राथमिकता के आधार पर करना चाहिए। वे मुख्यमंत्री से मांग करते हैं कि इसको गंभीरता से लेते हुए तुरंत संशोंधित करने का कार्य किया जाए।
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मलिक ने बताया कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार कर्मचारियों के लिए एक्स, वाई और जेड श्रेणी के शहरों में 24 प्रतिशत, 16 प्रतिशत और 8 प्रतिशत एचआरए निर्धारित किया गया था। साथ ही यह प्रावधान भी किया गया था कि महंगाई भत्ता डीए 25 प्रतिशत से अधिक होने पर एचआरए दरें बढ़कर 27 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 9 प्रतिशत तथा डीए 50 प्रतिशत से अधिक होने पर 30 प्रतिशत, 20 प्रतिशत और 10 प्रतिशत हो जाएंगी।
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उन्होंने कहा कि हरियाणा के कर्मचारियों का डीए जुलाई 2021 में 25 प्रतिशत तथा जनवरी 2024 में 50 प्रतिशत के स्तर को पार कर चुका है, लेकिन इसके बावजूद कर्मचारियों को आज भी पुरानी एचआरए दरों पर ही भुगतान किया जा रहा है। यदि सरकार समय पर एचआरए संशोधित करती तो कर्मचारियों को वर्षों पहले ही इसका लाभ मिल जाता। सरकार की इस देरी के कारण कर्मचारियों को प्रतिमाह हजारों रुपये तथा सामूहिक रूप से करोड़ों रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को एचआरए बढ़ोतरी का लाभ मिलना उनका वैधानिक अधिकार है। सरकार को कर्मचारियों के हितों की अनदेखी करने के बजाय उनकी लंबे समय से लंबित मांगों का समाधान प्राथमिकता के आधार पर करना चाहिए। वे मुख्यमंत्री से मांग करते हैं कि इसको गंभीरता से लेते हुए तुरंत संशोंधित करने का कार्य किया जाए।