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Kaithal News: प्लाट के नाम पर ठगी का खेल बेनकाब, दो गिरफ्तार
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 30 Apr 2026 12:37 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। प्लाट खरीदवाने के नाम पर धोखाधड़ी करने के मामले में पुलिस ने वार्ड नंबर 3, चीका निवासी विजय कुमार और गांव रामनगर, भूना निवासी भोलाराम को गिरफ्तार कर लिया है। अदालत से दोनों आरोपियों का दो दिन का पुलिस रिमांड हासिल किया गया है। रिमांड के दौरान पुलिस आरोपियों से मामले की गहनता से पूछताछ कर रही है।
पुलिस प्रवक्ता प्रवीण श्योकंद ने बताया कि चीका निवासी शंकर गर्ग ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वह अपनी पत्नी रिम्पी के नाम पर अमर सिटी, चीका में 5 मरले का प्लाट खरीदना चाहता था। इसी दौरान उसकी मुलाकात विजय कुमार से हुई, जिसने उसे उचित दाम पर प्लाट दिलाने का भरोसा दिलाया।
विजय कुमार ने परमिंदर कौर के नाम का एक प्लाट दिखाकर सौदा तय कराया। 23 जनवरी 2025 को दोनों पक्ष तहसील कार्यालय पहुंचे, जहां स्टांप पेपर और रजिस्ट्रेशन फीस जमा करवाई गई, लेकिन किसी कारणवश रजिस्ट्री नहीं हो सकी। अगले दिन भी यही स्थिति बनी रही।
इसके बाद 24 जनवरी 2025 को एक इकरारनामा तैयार किया गया, जिसमें 28 फरवरी 2025 तक रजिस्ट्री कराने की बात तय हुई। इस दौरान शंकर गर्ग ने आरोपियों को छह लाख रुपये नकद बतौर बयाना दे दिए।
जांच के दौरान सामने आया कि संबंधित प्लाट पहले से ही न्यायालय में विचाराधीन था। नवंबर 2024 में यह प्लाट किसी अन्य व्यक्ति के नाम पंजीकृत हो चुका था और उसका इंतकाल भी दर्ज था। इसके बावजूद आरोपियों ने धोखे से प्लाट का सौदा कर लिया।
मामले में थाना चीका में प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। अब पुलिस रिमांड के दौरान आरोपियों से और खुलासे होने की संभावना है।
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कैथल। प्लाट खरीदवाने के नाम पर धोखाधड़ी करने के मामले में पुलिस ने वार्ड नंबर 3, चीका निवासी विजय कुमार और गांव रामनगर, भूना निवासी भोलाराम को गिरफ्तार कर लिया है। अदालत से दोनों आरोपियों का दो दिन का पुलिस रिमांड हासिल किया गया है। रिमांड के दौरान पुलिस आरोपियों से मामले की गहनता से पूछताछ कर रही है।
पुलिस प्रवक्ता प्रवीण श्योकंद ने बताया कि चीका निवासी शंकर गर्ग ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वह अपनी पत्नी रिम्पी के नाम पर अमर सिटी, चीका में 5 मरले का प्लाट खरीदना चाहता था। इसी दौरान उसकी मुलाकात विजय कुमार से हुई, जिसने उसे उचित दाम पर प्लाट दिलाने का भरोसा दिलाया।
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विजय कुमार ने परमिंदर कौर के नाम का एक प्लाट दिखाकर सौदा तय कराया। 23 जनवरी 2025 को दोनों पक्ष तहसील कार्यालय पहुंचे, जहां स्टांप पेपर और रजिस्ट्रेशन फीस जमा करवाई गई, लेकिन किसी कारणवश रजिस्ट्री नहीं हो सकी। अगले दिन भी यही स्थिति बनी रही।
इसके बाद 24 जनवरी 2025 को एक इकरारनामा तैयार किया गया, जिसमें 28 फरवरी 2025 तक रजिस्ट्री कराने की बात तय हुई। इस दौरान शंकर गर्ग ने आरोपियों को छह लाख रुपये नकद बतौर बयाना दे दिए।
जांच के दौरान सामने आया कि संबंधित प्लाट पहले से ही न्यायालय में विचाराधीन था। नवंबर 2024 में यह प्लाट किसी अन्य व्यक्ति के नाम पंजीकृत हो चुका था और उसका इंतकाल भी दर्ज था। इसके बावजूद आरोपियों ने धोखे से प्लाट का सौदा कर लिया।
मामले में थाना चीका में प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। अब पुलिस रिमांड के दौरान आरोपियों से और खुलासे होने की संभावना है।
