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Kaithal News: बजट को विपक्ष ने नकारा
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Mon, 02 Feb 2026 01:59 AM IST
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कैथल। विपक्ष ने इस पूरी कवायद को जुमला और जनविरोधी बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया है। विपक्षी दलों ने बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि धरातल पर स्थिति बिल्कुल अलग है। विपक्ष ने इसे जनता की आंखों में धूल झोंकने वाला कदम बताया।
माकपा ने केंद्रीय बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह पूरी तरह से जन-विरोधी और संघीय-विरोधी है। प्रदेश सचिव कामरेड प्रेम चंद और जिला सचिव सतपाल आनंद ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से बताया कि वित्त मंत्री द्वारा संसद में प्रस्तुत नौवां केंद्रीय बजट बड़े व्यापारिक घरानों और अमीर वर्ग के संकीर्ण हितों को बढ़ावा देने का प्रमाण है।
माकपा का कहना है कि बजट में मेहनतकश लोगों और समाज के सामाजिक रूप से शोषित वर्गों की स्थिति पर असर पड़ा है और राष्ट्रीय आर्थिक हितों की कीमत पर यह तैयार किया गया है। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा बताए गए ‘’राजकोषीय अनुशासन’’ का लाभ मुख्य रूप से कॉर्पोरेट क्षेत्र और अमीरों को टैक्स में छूट देने के लिए होता है, जबकि आवश्यक खर्चों में कटौती की गई है। इसके चलते इस साल और अगले साल के बजट में राजस्व में कमी और खर्च में कटौती दिखाई दे रही है। संवाद
आम बजट में आम जनता के लिए कुछ भी नहीं था। बजट से मिडिल क्लास को बहुत उम्मीदें होती हैं लेकिन इस बार भी वे खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं । बजट के बाद शेयर बाजार का धड़ाम हो कर गिरना साफ साफ बताता है कि बाजार ने भी बजट को सिरे से नकार दिया है। -मयंक असीजा, हल्का महासचिव जेजेपी कैथल एडवोकेट
बजट में आम जनता के लिए कुछ भी नहीं था। जनता को बजट के नाम पर गुमराह करने का काम किया गया है। -आदित्य सुरजेवाला, विधायक
किसान, मजदूर, मध्यम वर्ग सभी को निराश करने वाला बजट है। पूरे बजट में जनता के हाथ खाली रहे हैं। -रामपाल माजरा, इनेलो प्रदेशाध्यक्ष
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माकपा ने केंद्रीय बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह पूरी तरह से जन-विरोधी और संघीय-विरोधी है। प्रदेश सचिव कामरेड प्रेम चंद और जिला सचिव सतपाल आनंद ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से बताया कि वित्त मंत्री द्वारा संसद में प्रस्तुत नौवां केंद्रीय बजट बड़े व्यापारिक घरानों और अमीर वर्ग के संकीर्ण हितों को बढ़ावा देने का प्रमाण है।
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माकपा का कहना है कि बजट में मेहनतकश लोगों और समाज के सामाजिक रूप से शोषित वर्गों की स्थिति पर असर पड़ा है और राष्ट्रीय आर्थिक हितों की कीमत पर यह तैयार किया गया है। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा बताए गए ‘’राजकोषीय अनुशासन’’ का लाभ मुख्य रूप से कॉर्पोरेट क्षेत्र और अमीरों को टैक्स में छूट देने के लिए होता है, जबकि आवश्यक खर्चों में कटौती की गई है। इसके चलते इस साल और अगले साल के बजट में राजस्व में कमी और खर्च में कटौती दिखाई दे रही है। संवाद
आम बजट में आम जनता के लिए कुछ भी नहीं था। बजट से मिडिल क्लास को बहुत उम्मीदें होती हैं लेकिन इस बार भी वे खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं । बजट के बाद शेयर बाजार का धड़ाम हो कर गिरना साफ साफ बताता है कि बाजार ने भी बजट को सिरे से नकार दिया है। -मयंक असीजा, हल्का महासचिव जेजेपी कैथल एडवोकेट
बजट में आम जनता के लिए कुछ भी नहीं था। जनता को बजट के नाम पर गुमराह करने का काम किया गया है। -आदित्य सुरजेवाला, विधायक
किसान, मजदूर, मध्यम वर्ग सभी को निराश करने वाला बजट है। पूरे बजट में जनता के हाथ खाली रहे हैं। -रामपाल माजरा, इनेलो प्रदेशाध्यक्ष
