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Kaithal News: 500 से 600 क्विंटल फिरनी का होगा कारोबार, 1.25 करोड़ रुपये तक व्यापार की उम्मीद

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 12 Jul 2026 11:53 PM IST
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Trade in Phirni to range from 500 to 600 quintals; business worth up to 1.25 crore expected.
फिरनी बनाते हुए एक दुकान पर हलवाई। संवाद
पूंडरी। आगरा के पेठे और गोहाना की जलेबी की तरह पूंडरी की फिरनी भी अपनी अलग पहचान बना चुकी है। सावन के मौसम में इस पारंपरिक मिठाई की मांग चरम पर पहुंच जाती है। कारोबारियों के अनुसार इस वर्ष पूंडरी में 500 से 600 क्विंटल फिरनी का कारोबार होने का अनुमान है। इससे करीब 1.25 करोड़ रुपये तक का व्यापार होने की उम्मीद है।
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पिछले वर्ष लगभग 400 क्विंटल फिरनी की बिक्री हुई थी, जबकि इस बार करीब 200 क्विंटल अधिक कारोबार का अनुमान लगाया जा रहा है। बाजार में फिरनी 280 से 300 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव से बिक रही है। हरियाणा के अलावा पंजाब, दिल्ली, राजस्थान सहित कई राज्यों में इसकी सप्लाई हो रही है। वहीं इस बार ऑस्ट्रेलिया और कनाडा से भी बड़ी संख्या में ऑर्डर मिल रहे हैं। कारोबारियों के अनुसार प्रतिदिन 100 किलोग्राम से अधिक फिरनी इन देशों में भेजी जा रही है।
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फिरनी व्यवसाय से जुड़े कृष्ण सैनी हलवाई ने बताया कि इस बार सावन शुरू होने से पहले कारोबार में तेजी आ रही है। शुरुआत में एक-दो दुकानों में ही यह मिठाई बनाई जाती थी। लोगों का क्रेज देखकर धीरे-धीरे इसका कारोबार बढ़ता गया। यहां का पानी इस मिठाई को खास बनाता है। आज हरियाणा के कई शहरों से व्यापारी यहां से फिरनी खरीदकर अपने शहरों में बेचते हैं।
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1936 में हुई थी पूंडरी की मशहूर फिरनी की शुरुआत
पूंडरी के निकट गांव फतेहपुर निवासी स्वर्गीय हरिकिशन ब्यास ने वर्ष 1936 में फिरनी बनाने की शुरुआत की थी। उन्होंने गांव में एक छोटी-सी दुकान से यह काम शुरू किया, जो धीरे-धीरे पूरे देश में प्रसिद्ध हो गया। उस समय वे अकेले फिरनी बनाने का काम करते थे। स्थानीय लोगों के अनुसार उनकी बनाई फिरनी का स्वाद इतना प्रसिद्ध था कि अंग्रेज अधिकारी भी उसके दीवाने थे। आज भी क्षेत्र में मेहमान-नवाजी के दौरान फिरनी परोसना परंपरा का हिस्सा माना जाता है।

शुगर फ्री फिरनी और रबड़ी वाला घेवर
कैथल में शुगर फ्री फिरनी भी तैयार की जाती है जिसमें मीठे की मात्रा न के बराबर होती है। इससे मधुमेह के मरीज भी इसका लुत्फ उठा सकते हैं। साथ ही यहां के रबड़ी वाला घेवर भी मशहूर है। यहां के घेवर की खासियत यह है कि यह घेवर क्रिस्पी और कम मीठा होता है। साइज में बहुत ही छोटा बनाया जाता है।

फीकी फिरनी एक महीने पहले से होती है तैयार
हलवाइयों के अनुसार फीकी फिरनी एक महीने पहले से तैयार कर ली जाती है। जैसे-जैसे थोक ऑर्डर मिलते हैं, उसमें जरूरत के अनुसार मीठा मिलाकर ग्राहकों को उपलब्ध कराया जाता है। फीकी फिरनी एक महीने तक सुरक्षित रहती है जिससे दूर-दराज के राज्यों और विदेशों तक इसकी आपूर्ति आसानी से हो पाती है।
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