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Karnal News: दर्दनाक दास्तां... मलेशिया में 10वीं मंजिल से युवा जोड़े ने लगाई छलांग, पत्नी की मौत और कोमा में पहुंच गया था पति
Sat, 02 May 2026 12:44 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Sat, 02 May 2026 12:44 AM IST
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मलेशिया में अस्पताल में दाखिल कपिलका फाइल फोटो।
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निसिंग। विदेश में कमाई से परिवार के आर्थिक हालात सुधारने के सपने देखने वाले युवा जोड़े कपिल (28) और अनुष्का (25) की यह दर्दनाक दास्तां है। पति-पत्नी परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का सपना पाले हुए मलेशिया में गए थे। टूरिस्ट वीजा मिला था। अवधि खत्म होने के बाद भी वहां पर काम करते रहे। आप्रवासन अधिकारियों ने छापा मारा तो डरकर दसवीं मंजिल से कूद गए थे। पत्नी अनुष्का की मौत हो चुकी है। कपिल कोमा में थे। ठीक होने पर 15 दिन पहले भारत लाए गए।
सिंघड़ा गांव के लखविंद्र सिंह ने बताया कि कपिल के पिता बलराज सिंह दिहाड़ी मजदूर हैं। ढाई साल पहले कपिल परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए पत्नी अनुष्का के साथ मलेशिया गए थे। टूरिस्ट वीजा था। कुआलालंपुर में एक इमारत की दसवीं मंजिल पर रहते थे। वीजा की अवधि खत्म हो गई थी तो आशंकित रहते थे। फरवरी माह में वहां बिना कागजात के रहने वाले लोगों की जांच शुरू हुई। आप्रवासन अधिकारियों की एक टीम कपिल की इमारत में भी जांच करने पहुंची। डर के कारण पति-पत्नी ने दसवीं मंजिल से छलांग लगा दी।
कपिल के परिवार को पता लगा तो उन्होंने बहू के शव को भारत लाने और बेटे का उचित इलाज करवाने के लिए प्रशासन से गुहार लगाई। कपिल के पिता बलराज ने बताया कि बहू के शव को लाने के लिए हर जगह गए। समाजसेवी विकास सुखीजा और लखविंद्र ने केंद्रीय मंत्री और सरकार के अन्य लोगों से मिलवाया। करीब दो माह पहले मार्च में बहू का शव गांव पहुंचा। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल और मुख्यमंत्री नायब सैनी के प्रयासाें से बेटा 15 दिन पहले भारत पहुंच गया। अस्पताल से इलाज के बाद दो दिन पहले वह परिवार के बीच पहुंच गया।
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एनजीओ ने इलाज के नाम पर ऐंठे रुपये
लखविंद्र सिंह ने बताया कि मलेशिया की एक एनजीओ ने परिवार को फोन पर वीडियो भेजकर वहां हादसा होने की जानकारी दी थी। इसके बाद उनसे इलाज के नाम पर दो लाख रुपये की मांग की। परिवार ने इधर-उधर से जुटाकर एक लाख 80 हजार रुपये वहां भेजे। एनजीओ ने केवल 70 हजार रुपये ही इलाज पर खर्च किए।
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सिंघड़ा गांव के लखविंद्र सिंह ने बताया कि कपिल के पिता बलराज सिंह दिहाड़ी मजदूर हैं। ढाई साल पहले कपिल परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए पत्नी अनुष्का के साथ मलेशिया गए थे। टूरिस्ट वीजा था। कुआलालंपुर में एक इमारत की दसवीं मंजिल पर रहते थे। वीजा की अवधि खत्म हो गई थी तो आशंकित रहते थे। फरवरी माह में वहां बिना कागजात के रहने वाले लोगों की जांच शुरू हुई। आप्रवासन अधिकारियों की एक टीम कपिल की इमारत में भी जांच करने पहुंची। डर के कारण पति-पत्नी ने दसवीं मंजिल से छलांग लगा दी।
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कपिल के परिवार को पता लगा तो उन्होंने बहू के शव को भारत लाने और बेटे का उचित इलाज करवाने के लिए प्रशासन से गुहार लगाई। कपिल के पिता बलराज ने बताया कि बहू के शव को लाने के लिए हर जगह गए। समाजसेवी विकास सुखीजा और लखविंद्र ने केंद्रीय मंत्री और सरकार के अन्य लोगों से मिलवाया। करीब दो माह पहले मार्च में बहू का शव गांव पहुंचा। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल और मुख्यमंत्री नायब सैनी के प्रयासाें से बेटा 15 दिन पहले भारत पहुंच गया। अस्पताल से इलाज के बाद दो दिन पहले वह परिवार के बीच पहुंच गया।
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एनजीओ ने इलाज के नाम पर ऐंठे रुपये
लखविंद्र सिंह ने बताया कि मलेशिया की एक एनजीओ ने परिवार को फोन पर वीडियो भेजकर वहां हादसा होने की जानकारी दी थी। इसके बाद उनसे इलाज के नाम पर दो लाख रुपये की मांग की। परिवार ने इधर-उधर से जुटाकर एक लाख 80 हजार रुपये वहां भेजे। एनजीओ ने केवल 70 हजार रुपये ही इलाज पर खर्च किए।

मलेशिया में अस्पताल में दाखिल कपिलका फाइल फोटो।