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Karnal News: रिकॉर्ड की कमी से नहीं कर सकते क्लेम खारिज
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Mon, 19 Jan 2026 02:51 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने भैंस की मौत के बाद बीमा क्लेम खारिज करने के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए ‘’न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को सेवा में कोताही का दोषी माना है।
आयोग ने आदेश दिया है कि कंपनी शिकायतकर्ता अंकित कंबोज को कुल 96 हजार रुपये हर्जाने के रूप में अदा करे। अंकित कंपनी की ओर से मांगे गए दस्तावेज जमा नहीं कर पाए थे। आयोग ने कहा कि सिर्फ रिकॉर्ड न होना क्लेम खारिज करने का आधार नहीं हो सकता।
बदरपुर गांव निवासी पशुपालक अंकित कांबोज ने बताया कि उनकी भैंस 16 किलो दूध देती थी। उन्होंने न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से उसका बीमा कराया था। कंपनी ने जांच के बाद भैंस की कीमत 65 हजार रुपये तय की थी। उनसे प्रीमियम के तौर पर 969 रुपये लिए थे। बीमा पॉलिसी जारी की गई थी।
बीमित भैंस 2 जनवरी, 2021 को मर गई। उन्होंने मृत भैंस का ब्याना के पशु अस्पताल के डॉक्टर से पोस्टमार्टम करवाया। रिपोर्ट में निमोनिया के कारण मौत होना दर्शाया गया। बीमा कंपनी को कागजात जमा करवाए लेकिन क्लेम खारिज कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के समक्ष शिकायत दर्ज करवाई।
बीमा कंपनी ने आयोग के समक्ष तर्क रखा कि शिकायतकर्ता ने भैंस के इलाज से संबंधित चिकित्सा रिकॉर्ड कंपनी के पास जमा नहीं कराया। पॉलिसी की शर्तों के अनुसार इलाज का विवरण देना अनिवार्य है। मामले में सुनवाई करते हुए आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह ने पाया कि शिकायतकर्ता ने स्थानीय डॉक्टर से इलाज कराया था जिसने कोई लिखित रिकॉर्ड नहीं रखा था, इसलिए रिकॉर्ड न दे पाना क्लेम खारिज करने का आधार नहीं हो सकता।
आयोग ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि बीमा कंपनियां प्रीमियम वसूलने में तो रुचि दिखाती हैं लेकिन क्लेम देने के समय तकनीकी बहानों से अपनी जिम्मेदारी से बचती हैं। ऐसा नहीं किया जाना चाहिए।
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आयोग ने आदेश दिया है कि कंपनी शिकायतकर्ता अंकित कंबोज को कुल 96 हजार रुपये हर्जाने के रूप में अदा करे। अंकित कंपनी की ओर से मांगे गए दस्तावेज जमा नहीं कर पाए थे। आयोग ने कहा कि सिर्फ रिकॉर्ड न होना क्लेम खारिज करने का आधार नहीं हो सकता।
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बदरपुर गांव निवासी पशुपालक अंकित कांबोज ने बताया कि उनकी भैंस 16 किलो दूध देती थी। उन्होंने न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से उसका बीमा कराया था। कंपनी ने जांच के बाद भैंस की कीमत 65 हजार रुपये तय की थी। उनसे प्रीमियम के तौर पर 969 रुपये लिए थे। बीमा पॉलिसी जारी की गई थी।
बीमित भैंस 2 जनवरी, 2021 को मर गई। उन्होंने मृत भैंस का ब्याना के पशु अस्पताल के डॉक्टर से पोस्टमार्टम करवाया। रिपोर्ट में निमोनिया के कारण मौत होना दर्शाया गया। बीमा कंपनी को कागजात जमा करवाए लेकिन क्लेम खारिज कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के समक्ष शिकायत दर्ज करवाई।
बीमा कंपनी ने आयोग के समक्ष तर्क रखा कि शिकायतकर्ता ने भैंस के इलाज से संबंधित चिकित्सा रिकॉर्ड कंपनी के पास जमा नहीं कराया। पॉलिसी की शर्तों के अनुसार इलाज का विवरण देना अनिवार्य है। मामले में सुनवाई करते हुए आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह ने पाया कि शिकायतकर्ता ने स्थानीय डॉक्टर से इलाज कराया था जिसने कोई लिखित रिकॉर्ड नहीं रखा था, इसलिए रिकॉर्ड न दे पाना क्लेम खारिज करने का आधार नहीं हो सकता।
आयोग ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि बीमा कंपनियां प्रीमियम वसूलने में तो रुचि दिखाती हैं लेकिन क्लेम देने के समय तकनीकी बहानों से अपनी जिम्मेदारी से बचती हैं। ऐसा नहीं किया जाना चाहिए।