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Karnal News: डकैती के पांच दोषियों को 10-10 साल की कैद, 52 हजार रुपये अर्थदंड

संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल Updated Sun, 22 Mar 2026 12:43 AM IST
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Five robbery convicts sentenced to 10 years imprisonment and a fine of Rs 52,000
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संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल/असंध। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रामावतार पारीक की अदालत ने असंध में 3 मई, 2023 की रात को हुई डकैती के पांच दोषियों को 10-10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है। पांचों पर 52 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। दोषियों में जींद के छातर गांव निवासी संदीप, कैथल जिले के मंडवाल गांव निवासी एवं हाल में असंध निवासी सुच्चा सिंह, जींद के कहसुन गांव निवासी वजीर सिंह, जींद के नंगूरा गांव निवासी दीपक उर्फ गोनी और जींद के मोहनगढ़ गांव निवासी दीपक उर्फ बांडा शामिल हैं।

असंध के पाॅश इलाके दरबारा काॅलोनी में 3 मई, 2023 की रात को सराफ दीपक और उनके परिवार को घर में बंधक बनाकर चार नकाबपोश बदमाशों ने लूटपाट की थी। उनके पास बंदूक और तलवार सहित अन्य हथियार थे। बदमाश करीब 60 तोले सोना और 5.80 लाख रुपये नकदी ले गए थे। आरोपियों ने मैगनेट के ताला को तोड़कर घर के अंदर प्रवेश किया था। इसके बाद सोते हुए दीपक, उनकी पत्नी और तीन बच्चों को उठाया। सभी को बंधक बना लिया था।
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दूसरे कमरे में सो रही दीपक की माता के हाथ-पैर बांध दिए थे। इस दौरान दीपक आरोपियों से भिड़ गए थे। बदमाशों ने गोली चलाई तो मिस फायर हो गया। इसके बाद तलवार से दीपक के सिर पर हमला कर घायल कर दिया गया था। वारदात को 50 मिनट में अंजाम दिया गया था।
असंध थाना पुलिस ने हथियारों के बल पर डकैती करने सहित अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की थी। जांच में पता चला कि दीपक के दोस्त सुच्चा सिंह ने मामले में रेकी करवाई थी। खुद भी वारदात में शामिल था। उसे भी गिरफ्तार कर लिया गया था।
अब अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रामावतार पारीक की अदालत ने पांचों को दोषी मानते हुए डकैती में 10 साल का कठोर कारावास और 10-10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। इसके अलावा आपराधिक साजिश में 10 साल, आपराधिक धमकी की धारा में चार साल और शस्त्र अधिनियम में दोषी वजीर सिंह को हथियार रखने और उनके इस्तेमाल के लिए अतिरिक्त तीन साल की सजा और दो हजार रुपये की अर्थदंड की सजा सुनाई है।

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दोषियों ने मांगी थी राहत, अदालत ने कहा- उचित सजा जरूरी
सुनवाई के दौरान दोषियों ने अदालत से नरम रुख अपनाने की गुहार लगाई थी। दोषी संदीप और वजीर ने बताया था कि उनके तीन-तीन बच्चे और बीमार बुजुर्ग माता-पिता हैं। दोषी सुच्चा सिंह ने अपनी पत्नी की बीमारी का हवाला दिया था। दीपक उर्फ गोनी ने बताया था कि उसकी तीन बेटियां हैं और पिता की मृत्यु हो चुकी है। दीपक उर्फ बोंडा ने अपनी तीन साल की बेटी और मानसिक रूप से बीमार पिता की देखभाल की बात कही थी। बचाव पक्ष ने दलील दी कि दोषी पहली बार अपराध में शामिल हुए हैं, इसलिए उन्हें प्रोबेशन पर रिहा किया जाए। अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए प्रोबेशन की अर्जी खारिज कर दी। न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि समाज में कानून का डर बनाए रखने के लिए ऐसे मामलों में उचित सजा देना आवश्यक है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। दोषियों के जेल में बिताई गई पिछली अवधि को उनकी मुख्य सजा में से घटा दिया जाएगा।

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डकैती के बाद सराफ ने सुच्चा सिंह को किया था पहला फोन

दीपक मेहता ने बताया कि उन्होंने वारदात के बाद पुलिस को फोन करने के बाद पहला फोन अपने खास दोस्त सुच्चा सिंह को किया था। सुच्चा सिंह उनके घर आया और उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचा। तब उसने कहा था कि जान बच गई, धन तो और भी कमाया जाएगा। पुलिस जांच में सामने आया था कि सुच्चा सिंह को दीपक के घर के बारे में सारी जानकारी थी। उसको पता था कि दीपक के घर में काफी जेवर व नकदी है। उसने ये जानकारी वजीर को दी। वारदात से चार-पांच दिन पहले रेकी करते हुए वजीर को सराफ का घर दिखा दिया था।
पुलिस के अनुसार वजीर आदतन अपराधी हैं जो 2013 से वारदातों को अंजाम दे रहा है। उसने अपने साथियों के साथ मिलकर डकैती की वारदात को अंजाम दिया था।
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