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Karnal News: इलाज की उम्मीद... सुरक्षा की मियाद खत्म
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उपमंडल नागरिक अस्पताल में लगा अग्निशमन यंत्र। संवाद
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इंद्री। जिस अस्पताल की दहलीज पर लोग जिंदगी की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, वहीं आग जैसी आपदा से निपटने के इंतजाम खुद दम तोड़ चुके हैं। उपमंडल नागरिक अस्पताल इंद्री में लगे कई अग्निशमन यंत्रों की वैधता समाप्त हो चुकी है।
यानी यदि अस्पताल में आग लग जाए तो सबसे पहले इस्तेमाल होने वाले सुरक्षा उपकरण ही भरोसेमंद नहीं हैं। रोजाना सैकड़ों मरीजों, तीमारदारों और स्वास्थ्य कर्मियों की आवाजाही वाले अस्पताल में यह लापरवाही किसी बड़े खतरे की चेतावनी बनकर सामने आई है।
अस्पताल परिसर में जगह-जगह अग्निशमन यंत्र तो लगे हैं लेकिन उनकी एक्सपायरी अवधि 15 मई 2026 को खत्म हो चुकी है। ऐसे में आग लगने की स्थिति में इन उपकरणों के प्रभावी होने की कोई गारंटी नहीं है। अस्पताल में ऑक्सीजन सिलेंडर, बिजली के उपकरण और दवाओं का भंडारण होने के कारण आग का जोखिम सामान्य इमारतों की तुलना में अधिक माना जाता है। इसके बावजूद सुरक्षा व्यवस्था की नियमित निगरानी नहीं हो रही।
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रोज सैकड़ों लोगों की आवाजाही, खतरा सभी पर
उपमंडल नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन सैकड़ों मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। उनके साथ आने वाले तीमारदार और अस्पताल का स्टाफ भी पूरे दिन परिसर में मौजूद रहता है। ऐसे में यदि आग जैसी आपात स्थिति उत्पन्न हो जाए तो शुरुआती कुछ मिनट सबसे अहम होते हैं। लेकिन एक्सपायर हो चुके अग्निशमन यंत्र इस पहली सुरक्षा पंक्ति को ही कमजोर कर रहे हैं।
बदलाव की प्रक्रिया लंबित, तब तक भगवान भरोसे व्यवस्था
अस्पताल में नए अग्निशमन यंत्र लगाने अथवा पुराने बदलने की प्रक्रिया लंबित है। हालांकि जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था अधूरी ही रहेगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में संसाधनों की कमी अपनी जगह है, लेकिन सुरक्षा उपकरणों की अनदेखी किसी बड़ी दुर्घटना को न्योता दे सकती है।
विभाग की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, सिलिन्डर की मियाद 5 वर्ष की है। जो स्टिकर्स लगे हैं वे जल्द ही बदल दिए जाएंगे। - डॉ. संदीप अबरोल, एसएमओ
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यानी यदि अस्पताल में आग लग जाए तो सबसे पहले इस्तेमाल होने वाले सुरक्षा उपकरण ही भरोसेमंद नहीं हैं। रोजाना सैकड़ों मरीजों, तीमारदारों और स्वास्थ्य कर्मियों की आवाजाही वाले अस्पताल में यह लापरवाही किसी बड़े खतरे की चेतावनी बनकर सामने आई है।
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अस्पताल परिसर में जगह-जगह अग्निशमन यंत्र तो लगे हैं लेकिन उनकी एक्सपायरी अवधि 15 मई 2026 को खत्म हो चुकी है। ऐसे में आग लगने की स्थिति में इन उपकरणों के प्रभावी होने की कोई गारंटी नहीं है। अस्पताल में ऑक्सीजन सिलेंडर, बिजली के उपकरण और दवाओं का भंडारण होने के कारण आग का जोखिम सामान्य इमारतों की तुलना में अधिक माना जाता है। इसके बावजूद सुरक्षा व्यवस्था की नियमित निगरानी नहीं हो रही।
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रोज सैकड़ों लोगों की आवाजाही, खतरा सभी पर
उपमंडल नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन सैकड़ों मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। उनके साथ आने वाले तीमारदार और अस्पताल का स्टाफ भी पूरे दिन परिसर में मौजूद रहता है। ऐसे में यदि आग जैसी आपात स्थिति उत्पन्न हो जाए तो शुरुआती कुछ मिनट सबसे अहम होते हैं। लेकिन एक्सपायर हो चुके अग्निशमन यंत्र इस पहली सुरक्षा पंक्ति को ही कमजोर कर रहे हैं।
बदलाव की प्रक्रिया लंबित, तब तक भगवान भरोसे व्यवस्था
अस्पताल में नए अग्निशमन यंत्र लगाने अथवा पुराने बदलने की प्रक्रिया लंबित है। हालांकि जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था अधूरी ही रहेगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में संसाधनों की कमी अपनी जगह है, लेकिन सुरक्षा उपकरणों की अनदेखी किसी बड़ी दुर्घटना को न्योता दे सकती है।
विभाग की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, सिलिन्डर की मियाद 5 वर्ष की है। जो स्टिकर्स लगे हैं वे जल्द ही बदल दिए जाएंगे। - डॉ. संदीप अबरोल, एसएमओ