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Karnal News: पालकी में सवार होकर आएंगी मां दुर्गा... हाथी पर प्रस्थान
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Tue, 17 Mar 2026 01:14 AM IST
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मां मनसा देवी मंदिर में स्थापित मां मनसा देवी की प्रतिमा। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। चैत्र नवरात्र का शुभारंभ 19 मार्च से हो रहा है। इस साल मां दुर्गा पालकी में सवार होकर आएंगी और हाथी पर सवार होकर जाएंगी। श्री श्याम बाला जी ज्योतिष केंद्र के संचालक पंडित विनोद शास्त्री के अनुसार मां का पालकी में सवार होकर आना शुभ नहीं माना जाता। पालकी पर माता का आना प्राकृतिक आपदाओं या बीमारियों में वृद्धि का संकेत हो सकता है।
उन्होंने बताया कि हालांकि माता रानी का प्रस्थान हाथी पर हो रहा है, जो शुभ माना जाता है और अच्छी वर्षा तथा समृद्धि का संकेत देता है। पहले दिन ग्रह-नक्षत्रों के तीन अत्यंत शुभ संयोग भी बन रहे हैं। 19 मार्च को शुक्ल, ब्रह्म और सर्वार्थ सिद्धि योग का महासंयोग है। ये तीनों ही योग बेहद शुभकारी माने जाते हैं।
उन्होंने बताया कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 19 मार्च को सुबह 6:54 बजे हो रही है। इसका समापन 20 मार्च को तड़के 4:50 बजे होगा। 19 मार्च को सूर्योदय अमावस्या तिथि में ही होगा। लिहाजा पूरे दिन अमावस्या तिथि का ही मान्य होगा। अमावस्या तिथि में कलश स्थापना का दुर्लभ संयोग करीब 72 साल बाद बन रहा है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 19 मार्च से शिव शांति का रुद्र नामक नया विक्रम संवत 2083 प्रारंभ होगा। इस संवत का राजा गुरु और मंत्री मंगल है और कलश स्थापना 19 मार्च तारीख अभिजीत मुहूर्त में करना शुभ रहेगा।
मंदिरों में तैयारियां
नवरात्र के लिए मंदिरों में तैयारियां की जा रही हैं। पूर्व कमेटी चौक स्थित मां मनसा देवी मंदिर, पुराने जीटी रोड स्थित मां दुर्गा भवानी मंदिर, सदर बाजार के रघुनाथ मंदिर, प्रेम नगर के माता मंदिर, राम नगर के शिव मंदिर, प्रेम नगर के शिव मंदिर, सेक्टर-8 के श्रीराम मंदिर, श्री कर्णेश्वरम महादेव मंदिर सेक्टर-6, सेक्टर-6 के शिव मंदिर के साथ शहर के हर मंदिर में तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। मां मनसा मंदिर और मां दुर्गा भवानी मंदिर से श्रद्धालु मां की अखंड़ जोत जलाने के लिए गाजे-बाजे के साथ जोत लेने आएंगे।
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करनाल। चैत्र नवरात्र का शुभारंभ 19 मार्च से हो रहा है। इस साल मां दुर्गा पालकी में सवार होकर आएंगी और हाथी पर सवार होकर जाएंगी। श्री श्याम बाला जी ज्योतिष केंद्र के संचालक पंडित विनोद शास्त्री के अनुसार मां का पालकी में सवार होकर आना शुभ नहीं माना जाता। पालकी पर माता का आना प्राकृतिक आपदाओं या बीमारियों में वृद्धि का संकेत हो सकता है।
उन्होंने बताया कि हालांकि माता रानी का प्रस्थान हाथी पर हो रहा है, जो शुभ माना जाता है और अच्छी वर्षा तथा समृद्धि का संकेत देता है। पहले दिन ग्रह-नक्षत्रों के तीन अत्यंत शुभ संयोग भी बन रहे हैं। 19 मार्च को शुक्ल, ब्रह्म और सर्वार्थ सिद्धि योग का महासंयोग है। ये तीनों ही योग बेहद शुभकारी माने जाते हैं।
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उन्होंने बताया कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 19 मार्च को सुबह 6:54 बजे हो रही है। इसका समापन 20 मार्च को तड़के 4:50 बजे होगा। 19 मार्च को सूर्योदय अमावस्या तिथि में ही होगा। लिहाजा पूरे दिन अमावस्या तिथि का ही मान्य होगा। अमावस्या तिथि में कलश स्थापना का दुर्लभ संयोग करीब 72 साल बाद बन रहा है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 19 मार्च से शिव शांति का रुद्र नामक नया विक्रम संवत 2083 प्रारंभ होगा। इस संवत का राजा गुरु और मंत्री मंगल है और कलश स्थापना 19 मार्च तारीख अभिजीत मुहूर्त में करना शुभ रहेगा।
मंदिरों में तैयारियां
नवरात्र के लिए मंदिरों में तैयारियां की जा रही हैं। पूर्व कमेटी चौक स्थित मां मनसा देवी मंदिर, पुराने जीटी रोड स्थित मां दुर्गा भवानी मंदिर, सदर बाजार के रघुनाथ मंदिर, प्रेम नगर के माता मंदिर, राम नगर के शिव मंदिर, प्रेम नगर के शिव मंदिर, सेक्टर-8 के श्रीराम मंदिर, श्री कर्णेश्वरम महादेव मंदिर सेक्टर-6, सेक्टर-6 के शिव मंदिर के साथ शहर के हर मंदिर में तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। मां मनसा मंदिर और मां दुर्गा भवानी मंदिर से श्रद्धालु मां की अखंड़ जोत जलाने के लिए गाजे-बाजे के साथ जोत लेने आएंगे।