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कुंजपुरा गोदाम में घोटाले की खुली नई परत : पहले दो करोड़ का गेहूं गायब, अब 1500 कट्टों में 43.5 लाख का गेहूं सड़ा मिला
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कुंजपुरा गोदाम में घोटाले की खुली नई परत : पहले दो करोड़ का गेहूं गायब, अब 1500 कट्टों में 43.5
- फोटो : कुंजपुरा गोदाम में घोटाले की खुली नई परत : पहले दो करोड़ का गेहूं गायब, अब 1500 कट्टों में 43.5 लाख का गेहूं सड़ा मिला
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के कुंजपुरा गोदाम में सामने आए करोड़ों रुपये के गेहूं घोटाले में अब एक और बड़ा खुलासा हुआ है। पहले जहां गोदाम से करीब दो करोड़ रुपये के हजारों कट्टे गेहूं गायब होने का मामला सामने आया था, वहीं अब गोदाम में रखा करीब 1500 कट्टों में 43.50 लाख रुपये मूल्य का गेहूं खराब मिला है। विजिलेंस जांच के बाद शुक्रवार को एक बार फिर गोदाम में रखे गेहूं की विभागीय टीम ने जांच की। जांच टीम ने खराब गेहूं के सैंपल भरकर प्रयोगशाला जांच के लिए भेज दिए हैं।
मामले में भारतीय खाद्य निगम और खाद्य एवं आपूर्ति विभाग का रिकॉर्ड अब तक मेल नहीं खा रहा है। विभाग ने करीब एक माह पहले एफसीआई से पुराने स्टॉक के रखरखाव और उठान का रिकॉर्ड मांगा था लेकिन अब तक उपलब्ध नहीं कराया गया। अब सोमवार को एफसीआई से पूरा रिकॉर्ड लेकर उसका विभागीय रिकॉर्ड से मिलान किया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि इसके बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि वास्तव में कितना गेहूं गायब हुआ, कितना खराब हुआ और पूरे घोटाले का वास्तविक स्वरूप क्या है।
दोबारा जांच में शिकायतकर्ता भी रहा मौजूद
पहले हो चुकी विजिलेंस जांच के बाद शिकायतकर्ता विकास शर्मा की शिकायत पर खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने एक बार फिर गोदाम में रखे गेहूं के स्टॉक की जांच कराई। इस बार शिकायतकर्ता को भी जांच प्रक्रिया में शामिल किया गया। जांच के दौरान एएफएसओ, एसओ और अन्य विभागीय अधिकारी गोदाम पहुंचे और स्टॉक की दोबारा भौतिक जांच की। जांच के दौरान गोदाम में मौजूद 9315 कट्टों का निरीक्षण किया गया। इनमें गेहूं के लगे चार स्टैक में सबसे नीचे वाली परत में रखे करीब 1500 कट्टों का गेहूं पूरी तरह खराब मिला। अधिकारियों ने मौके पर खराब गेहूं के सैंपल भरकर सील किए और उन्हें गुणवत्ता जांच के लिए भेज दिया। मौके पर जांच में शामिल होने पहुंचे शिकायतकर्ता विकास शर्मा ने कहा कि कुंजपुरा गोदाम का यह मामला पहले ही करोड़ों रुपये के गेहूं घोटाले को लेकर चर्चा में है। प्रारंभिक जांच में 2257 कट्टे कम पाए गए थे। बाद में विस्तृत जांच और विजिलेंस की पड़ताल में 9585 कट्टे गेहूं गायब मिलने का खुलासा हुआ। अब गोदाम में बचा हुआ हजारों कट्टों का गेहूं भी खराब मिला है।
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सोमवार को रिकॉर्ड मिलान से खुल सकते हैं कई राज
मौके पर जांच करने पहुंचे अनुभाग अधिकारी विकास खोखर ने कहा कि उन्होंने एक माह पहले एफसीआई से रिकॉर्ड मांगा था जो अब तक नहीं मिला है। मामले की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी एफसीआई और खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के रिकॉर्ड का मिलान है। अब सोमवार को दोनों पक्षों के रिकॉर्ड का मिलान किया जाएगा। इसके बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि गोदाम में कब कितना गेहूं आया, कितना उठाया गया, कितना स्टॉक बचा और आखिर हजारों कट्टों का हिसाब कहां गड़बड़ाया। खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक मुकेश कुमार का कहना है कि जांच के बाद ही असल नुकसान, उसके जिम्मेदार और भरपाई कैसे की जाए इसकी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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करनाल। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के कुंजपुरा गोदाम में सामने आए करोड़ों रुपये के गेहूं घोटाले में अब एक और बड़ा खुलासा हुआ है। पहले जहां गोदाम से करीब दो करोड़ रुपये के हजारों कट्टे गेहूं गायब होने का मामला सामने आया था, वहीं अब गोदाम में रखा करीब 1500 कट्टों में 43.50 लाख रुपये मूल्य का गेहूं खराब मिला है। विजिलेंस जांच के बाद शुक्रवार को एक बार फिर गोदाम में रखे गेहूं की विभागीय टीम ने जांच की। जांच टीम ने खराब गेहूं के सैंपल भरकर प्रयोगशाला जांच के लिए भेज दिए हैं।
मामले में भारतीय खाद्य निगम और खाद्य एवं आपूर्ति विभाग का रिकॉर्ड अब तक मेल नहीं खा रहा है। विभाग ने करीब एक माह पहले एफसीआई से पुराने स्टॉक के रखरखाव और उठान का रिकॉर्ड मांगा था लेकिन अब तक उपलब्ध नहीं कराया गया। अब सोमवार को एफसीआई से पूरा रिकॉर्ड लेकर उसका विभागीय रिकॉर्ड से मिलान किया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि इसके बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि वास्तव में कितना गेहूं गायब हुआ, कितना खराब हुआ और पूरे घोटाले का वास्तविक स्वरूप क्या है।
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दोबारा जांच में शिकायतकर्ता भी रहा मौजूद
पहले हो चुकी विजिलेंस जांच के बाद शिकायतकर्ता विकास शर्मा की शिकायत पर खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने एक बार फिर गोदाम में रखे गेहूं के स्टॉक की जांच कराई। इस बार शिकायतकर्ता को भी जांच प्रक्रिया में शामिल किया गया। जांच के दौरान एएफएसओ, एसओ और अन्य विभागीय अधिकारी गोदाम पहुंचे और स्टॉक की दोबारा भौतिक जांच की। जांच के दौरान गोदाम में मौजूद 9315 कट्टों का निरीक्षण किया गया। इनमें गेहूं के लगे चार स्टैक में सबसे नीचे वाली परत में रखे करीब 1500 कट्टों का गेहूं पूरी तरह खराब मिला। अधिकारियों ने मौके पर खराब गेहूं के सैंपल भरकर सील किए और उन्हें गुणवत्ता जांच के लिए भेज दिया। मौके पर जांच में शामिल होने पहुंचे शिकायतकर्ता विकास शर्मा ने कहा कि कुंजपुरा गोदाम का यह मामला पहले ही करोड़ों रुपये के गेहूं घोटाले को लेकर चर्चा में है। प्रारंभिक जांच में 2257 कट्टे कम पाए गए थे। बाद में विस्तृत जांच और विजिलेंस की पड़ताल में 9585 कट्टे गेहूं गायब मिलने का खुलासा हुआ। अब गोदाम में बचा हुआ हजारों कट्टों का गेहूं भी खराब मिला है।
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सोमवार को रिकॉर्ड मिलान से खुल सकते हैं कई राज
मौके पर जांच करने पहुंचे अनुभाग अधिकारी विकास खोखर ने कहा कि उन्होंने एक माह पहले एफसीआई से रिकॉर्ड मांगा था जो अब तक नहीं मिला है। मामले की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी एफसीआई और खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के रिकॉर्ड का मिलान है। अब सोमवार को दोनों पक्षों के रिकॉर्ड का मिलान किया जाएगा। इसके बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि गोदाम में कब कितना गेहूं आया, कितना उठाया गया, कितना स्टॉक बचा और आखिर हजारों कट्टों का हिसाब कहां गड़बड़ाया। खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक मुकेश कुमार का कहना है कि जांच के बाद ही असल नुकसान, उसके जिम्मेदार और भरपाई कैसे की जाए इसकी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।