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Karnal News: लगातार नकारात्मक विचार हो सकते हैं बीमारी का संकेत
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करनाल। लगातार नकारात्मक विचार आएं, डर और निराशा रहे तो नजरअंदाज न करें। चिकित्सक की सलाह लें। परिजन से बात करें। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार लगातार नकारात्मक सोच अवसाद, चिंता मानसिक रोगों का बड़ा संकेत है, जिसे लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं।
जिला नागरिक अस्पताल की मानसिक रोग ओपीडी में रोजाना 30 से 40 मरीज चिंता, अवसाद और विभिन्न मानसिक समस्याओं के इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। बड़ी संख्या में युवा और कामकाजी लोग हैं। शुरुआत में समस्या को सामान्य तनाव समझकर टालते रहते हैं लेकिन जब नकारात्मक विचार जीवन पर हावी होने लगे और अवसाद का शिकार हो गए, तो उपचार के लिए पहुंचे।
नागरिक अस्पताल से मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. सौभाग्य कौशिक का कहना है कि समय बीतने पर समस्या मेजर डिप्रेशन में बदल गई और लगातार उदासी, निराशा और बेकार होने की भावना से घिरते गए। छोटी-छोटी बातों के लिए खुद को दोष देना और भविष्य को लेकर अंधकार महसूस करना आम लक्षण हैं जिन्हें लोग नजरअंदाज कर देते हैं। हर समय सामान्यीकृत चिंता विकार में हर समय किसी अनहोनी की आशंका बनी रहती है, जिससे दिमाग नकारात्मक सोच के चक्र में फंसकर अवसाद की चपेट में आ रहे हैं।
कारण :
बदलती लाइफस्टाइल अवसाद का बड़ा कारण है। मोबाइल और स्क्रीन टाइम बढ़ना, नींद की कमी, पारिवारिक तनाव और काम का दबाव भी इन समस्याओं को बढ़ा रहा है। युवा आगे निकलने की दौड़ में चिंता और अवसाद की चपेट में आ रहा है।
- लक्षण
भूख में बदलाव। एकाग्रता में कमी। बेचैनी और चिंता। आत्ममूल्य में कमी। आत्मघाती विचार आना। नींद खराब होना। चिड़चिड़े रहना। मन घबराना। लंबे समय से नकारात्मक विचार आना।
बचाव
अपने विचारों को चुनौती दें। खुद के दोस्त बनें, परिवार के उन सदस्यों या उन दोस्तों के साथ समय बिताएं जिनसे एक सकारात्मक ऊर्जा मिले और सहायक लोगों से बात करें। जो बीत गया और जो आने वाला समय है उसके बारे में न सोचकर वर्तमान पर ध्यान केंद्रित करें ताकि आप व्यस्त रहें। जितना आपका दिमाग अन्य कामों में व्यस्त रहेगा उतना कम वह आपकी सोच को प्रभावित कर पाएगा।
(जैसा कि मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. सौभाग्य कौशिक ने बताया)
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जिला नागरिक अस्पताल की मानसिक रोग ओपीडी में रोजाना 30 से 40 मरीज चिंता, अवसाद और विभिन्न मानसिक समस्याओं के इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। बड़ी संख्या में युवा और कामकाजी लोग हैं। शुरुआत में समस्या को सामान्य तनाव समझकर टालते रहते हैं लेकिन जब नकारात्मक विचार जीवन पर हावी होने लगे और अवसाद का शिकार हो गए, तो उपचार के लिए पहुंचे।
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नागरिक अस्पताल से मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. सौभाग्य कौशिक का कहना है कि समय बीतने पर समस्या मेजर डिप्रेशन में बदल गई और लगातार उदासी, निराशा और बेकार होने की भावना से घिरते गए। छोटी-छोटी बातों के लिए खुद को दोष देना और भविष्य को लेकर अंधकार महसूस करना आम लक्षण हैं जिन्हें लोग नजरअंदाज कर देते हैं। हर समय सामान्यीकृत चिंता विकार में हर समय किसी अनहोनी की आशंका बनी रहती है, जिससे दिमाग नकारात्मक सोच के चक्र में फंसकर अवसाद की चपेट में आ रहे हैं।
कारण :
बदलती लाइफस्टाइल अवसाद का बड़ा कारण है। मोबाइल और स्क्रीन टाइम बढ़ना, नींद की कमी, पारिवारिक तनाव और काम का दबाव भी इन समस्याओं को बढ़ा रहा है। युवा आगे निकलने की दौड़ में चिंता और अवसाद की चपेट में आ रहा है।
- लक्षण
भूख में बदलाव। एकाग्रता में कमी। बेचैनी और चिंता। आत्ममूल्य में कमी। आत्मघाती विचार आना। नींद खराब होना। चिड़चिड़े रहना। मन घबराना। लंबे समय से नकारात्मक विचार आना।
बचाव
अपने विचारों को चुनौती दें। खुद के दोस्त बनें, परिवार के उन सदस्यों या उन दोस्तों के साथ समय बिताएं जिनसे एक सकारात्मक ऊर्जा मिले और सहायक लोगों से बात करें। जो बीत गया और जो आने वाला समय है उसके बारे में न सोचकर वर्तमान पर ध्यान केंद्रित करें ताकि आप व्यस्त रहें। जितना आपका दिमाग अन्य कामों में व्यस्त रहेगा उतना कम वह आपकी सोच को प्रभावित कर पाएगा।
(जैसा कि मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. सौभाग्य कौशिक ने बताया)