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Karnal News: 2.61 करोड़ रुपये के धान गबन मामले में यूनाइटेड फूड राइस मिल का मालिक नसीब गिरफ्तार
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2.61 करोड़ रुपये के धान गबन मामले में यूनाइटेड फूड राइस मिल का मालिक नसीब गिरफ्तार
1000 टन धान गायब मिलने के मामले में एसआईटी की बड़ी कार्रवाई, जांच में खाद्य आपूर्ति विभाग के निरीक्षक की संलिप्तता भी आई थी सामने
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। जिले के शेखपुरा खालसा स्थित यूनाइटेड फूड राइस मिल में सरकारी धान के गबन के बहुचर्चित मामले में पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मिल मालिक नसीब सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। करीब 2.61 करोड़ रुपये मूल्य के 1000 टन धान के गबन के मामले में यह बड़ी गिरफ्तारी मानी जा रही है। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी है कि सरकारी धान को किस प्रकार ठिकाने लगाया गया और इस पूरे खेल में किन-किन लोगों की भूमिका रही।
यह मामला उस समय सामने आया था जब जिला प्रशासन द्वारा जिले की राइस मिलों का भौतिक सत्यापन कराया गया। सत्यापन के दौरान शेखपुरा खालसा स्थित यूनाइटेड फूड राइस मिल में रिकॉर्ड के मुकाबले करीब 1000 टन धान कम मिला। जांच में गायब धान की कीमत लगभग 2.61 करोड़ रुपये आंकी गई, जिससे सरकारी एजेंसियों में हड़कंप मच गया।
डीएफएससी की शिकायत पर दर्ज हुआ था केस
मामले में तत्कालीन जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक (डीएफएससी) अनिल की शिकायत पर इंद्री थाना पुलिस ने मिल मालिक नसीब सिंह और उसकी साझेदार संतोष रानी के खिलाफ सरकारी धान के गबन सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया था। इसके बाद जांच की जिम्मेदारी एसआईटी को सौंपी गई।
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जांच में निरीक्षक की भूमिका भी आई सामने
एसआईटी की जांच के दौरान यह भी सामने आया कि खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के निरीक्षक रणधीर की भी मामले में संलिप्तता रही। जांच के अनुसार मंडी में फर्जी धान खरीद दर्शाकर रिकॉर्ड में मिल में धान की आवक दिखाई गई, जबकि वास्तविक रूप से उतना धान मौजूद नहीं था। इसी फर्जीवाड़े के जरिए सरकारी धान का गबन किया गया, जिससे सरकार को करीब 2.61 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचा।
पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी एसआईटी
पुलिस का मानना है कि इतना बड़ा गबन अकेले संभव नहीं था। इसलिए एसआईटी अब यह जांच कर रही है कि फर्जी खरीद, रिकॉर्ड में हेराफेरी और सरकारी धान के गबन में किन अधिकारियों, कर्मचारियों या अन्य लोगों की भूमिका रही। गिरफ्तार मिल मालिक से पूछताछ के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।
जिले की अन्य मिलें भी जांच के दायरे में
उल्लेखनीय है कि जिले की राइस मिलों में सरकारी धान और चावल के स्टॉक का व्यापक सत्यापन अभियान चलाया गया था। इसी अभियान के दौरान यूनाइटेड फूड राइस मिल में भारी अनियमितता सामने आई थी। इस कार्रवाई के बाद अन्य राइस मिलों के स्टॉक की भी गहन जांच की जा रही है, ताकि सरकारी अनाज में किसी प्रकार की गड़बड़ी को रोका जा सके।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस की एसआईटी टीम से जांच अधिकारी श्रीकांत ने बताया कि नसीब को आज गिरफ्तार कर लिया गया है। आगामी कार्रवाई में अनुसार अमल में लाई जाएगी।
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1000 टन धान गायब मिलने के मामले में एसआईटी की बड़ी कार्रवाई, जांच में खाद्य आपूर्ति विभाग के निरीक्षक की संलिप्तता भी आई थी सामने
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। जिले के शेखपुरा खालसा स्थित यूनाइटेड फूड राइस मिल में सरकारी धान के गबन के बहुचर्चित मामले में पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मिल मालिक नसीब सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। करीब 2.61 करोड़ रुपये मूल्य के 1000 टन धान के गबन के मामले में यह बड़ी गिरफ्तारी मानी जा रही है। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी है कि सरकारी धान को किस प्रकार ठिकाने लगाया गया और इस पूरे खेल में किन-किन लोगों की भूमिका रही।
यह मामला उस समय सामने आया था जब जिला प्रशासन द्वारा जिले की राइस मिलों का भौतिक सत्यापन कराया गया। सत्यापन के दौरान शेखपुरा खालसा स्थित यूनाइटेड फूड राइस मिल में रिकॉर्ड के मुकाबले करीब 1000 टन धान कम मिला। जांच में गायब धान की कीमत लगभग 2.61 करोड़ रुपये आंकी गई, जिससे सरकारी एजेंसियों में हड़कंप मच गया।
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डीएफएससी की शिकायत पर दर्ज हुआ था केस
मामले में तत्कालीन जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक (डीएफएससी) अनिल की शिकायत पर इंद्री थाना पुलिस ने मिल मालिक नसीब सिंह और उसकी साझेदार संतोष रानी के खिलाफ सरकारी धान के गबन सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया था। इसके बाद जांच की जिम्मेदारी एसआईटी को सौंपी गई।
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जांच में निरीक्षक की भूमिका भी आई सामने
एसआईटी की जांच के दौरान यह भी सामने आया कि खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के निरीक्षक रणधीर की भी मामले में संलिप्तता रही। जांच के अनुसार मंडी में फर्जी धान खरीद दर्शाकर रिकॉर्ड में मिल में धान की आवक दिखाई गई, जबकि वास्तविक रूप से उतना धान मौजूद नहीं था। इसी फर्जीवाड़े के जरिए सरकारी धान का गबन किया गया, जिससे सरकार को करीब 2.61 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचा।
पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी एसआईटी
पुलिस का मानना है कि इतना बड़ा गबन अकेले संभव नहीं था। इसलिए एसआईटी अब यह जांच कर रही है कि फर्जी खरीद, रिकॉर्ड में हेराफेरी और सरकारी धान के गबन में किन अधिकारियों, कर्मचारियों या अन्य लोगों की भूमिका रही। गिरफ्तार मिल मालिक से पूछताछ के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।
जिले की अन्य मिलें भी जांच के दायरे में
उल्लेखनीय है कि जिले की राइस मिलों में सरकारी धान और चावल के स्टॉक का व्यापक सत्यापन अभियान चलाया गया था। इसी अभियान के दौरान यूनाइटेड फूड राइस मिल में भारी अनियमितता सामने आई थी। इस कार्रवाई के बाद अन्य राइस मिलों के स्टॉक की भी गहन जांच की जा रही है, ताकि सरकारी अनाज में किसी प्रकार की गड़बड़ी को रोका जा सके।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस की एसआईटी टीम से जांच अधिकारी श्रीकांत ने बताया कि नसीब को आज गिरफ्तार कर लिया गया है। आगामी कार्रवाई में अनुसार अमल में लाई जाएगी।