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Karnal News: कार्तिकेय को समर्पित स्कंद षष्ठी व्रत 22 को
Tue, 21 Apr 2026 02:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Tue, 21 Apr 2026 02:16 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की स्कंद षष्ठी का व्रत 22 अप्रैल को रखा जाएगा। यह व्रत विशेष रूप से भगवान कार्तिकेय की उपासना के लिए समर्पित होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को श्रद्धा और विधि-विधान से करने पर भगवान कार्तिकेय भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं।
श्री श्याम बाला जी ज्योतिष केंद्र के संचालक पंडित विनोद शास्त्री के अनुसार, मान्यता है कि स्कंद षष्ठी का व्रत रखने से संतान सुख, ज्ञान की प्राप्ति और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। साथ ही यह व्रत संतान की रक्षा और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए भी अत्यंत फलदायी माना गया है। इस दिन षष्ठी तिथि रात 10 बजकर 19 मिनट तक रहेगी। श्रद्धालुओं को इसी समयावधि में व्रत और पूजा संपन्न करनी चाहिए।
विधि : सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। भगवान मुरुगन की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। इसके बाद उन्हें पुष्प, माला, धूप और दीप अर्पित करें। ‘स्कंद षष्ठी कवचम’ का पाठ करना अत्यंत शुभ और कल्याणकारी माना गया है। पंड़ित विनोद शास्त्री के अनुसार कार्तिकेय भगवान की पूजा करते समय मोर पंख को जरूर शामिल करें। एक तो भगवान कार्तिकेय का वाहन मोर है और इससे सांपों का भय समाप्त हो जाता है।
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करनाल। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की स्कंद षष्ठी का व्रत 22 अप्रैल को रखा जाएगा। यह व्रत विशेष रूप से भगवान कार्तिकेय की उपासना के लिए समर्पित होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को श्रद्धा और विधि-विधान से करने पर भगवान कार्तिकेय भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं।
श्री श्याम बाला जी ज्योतिष केंद्र के संचालक पंडित विनोद शास्त्री के अनुसार, मान्यता है कि स्कंद षष्ठी का व्रत रखने से संतान सुख, ज्ञान की प्राप्ति और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। साथ ही यह व्रत संतान की रक्षा और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए भी अत्यंत फलदायी माना गया है। इस दिन षष्ठी तिथि रात 10 बजकर 19 मिनट तक रहेगी। श्रद्धालुओं को इसी समयावधि में व्रत और पूजा संपन्न करनी चाहिए।
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विधि : सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। भगवान मुरुगन की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। इसके बाद उन्हें पुष्प, माला, धूप और दीप अर्पित करें। ‘स्कंद षष्ठी कवचम’ का पाठ करना अत्यंत शुभ और कल्याणकारी माना गया है। पंड़ित विनोद शास्त्री के अनुसार कार्तिकेय भगवान की पूजा करते समय मोर पंख को जरूर शामिल करें। एक तो भगवान कार्तिकेय का वाहन मोर है और इससे सांपों का भय समाप्त हो जाता है।
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