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Karnal News: जांच कमेटी के अध्यक्ष बोले- मुझे जांच की एबीसीडी तक नहीं पता, फिर भी बना दिया अध्यक्ष
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के कुंजपुरा गोदाम में सामने आए करोड़ों रुपये के गेहूं घोटाले की जांच अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। जहां एक ओर गोदाम से हजारों कट्टे गेहूं गायब होने और लाखों रुपये का गेहूं खराब मिलने की जांच चल रही है, वहीं दूसरी ओर विभाग के अधिकारी ही एक-दूसरे के खिलाफ खुलकर बयान दे रहे हैं। इन आरोप-प्रत्यारोपों के बीच विभाग की कार्यप्रणाली, जांच प्रक्रिया और रिकॉर्ड प्रबंधन से जुड़े कई अहम राज भी सामने आने लगे हैं।
सबसे बड़ा खुलासा जांच कमेटी के अध्यक्ष एवं अनुभाग अधिकारी विकास खोखर ने किया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उन्हें इस प्रकार की जांच का कोई अनुभव नहीं है, फिर भी विभाग ने उन्हें करोड़ों रुपये के गेहूं घोटाले की जांच का अध्यक्ष बना दिया। विकास खोखर ने कहा कि उन्होंने अपने पूरे सेवाकाल में न तो कभी मंडी का काम देखा और न ही गेहूं के कट्टों की गणना या स्टॉक सत्यापन किया। इसके बावजूद पहले उन्हें फर्जी गेट पास से जुड़े मामले की जांच सौंपी गई और अब कुंजपुरा गोदाम जैसे बड़े घोटाले की जांच का अध्यक्ष बना दिया गया। उन्होंने कहा कि उन्हें तो जांच की एबीसीडी तक नहीं पता। उन्हें यह भी जानकारी नहीं कि गोदाम में कट्टों की गणना कैसे होती है। उन्होंने कहा कि उन्होंने विभाग को पहले ही बता दिया था कि वे इस तरह की तकनीकी जांच के लिए उपयुक्त नहीं हैं लेकिन फिर भी मुझे जिम्मेदारी दे दी गई।
एफसीआई ने एक माह से नहीं दिया रिकॉर्ड :
विकास खोखर ने बताया कि जांच पूरी करने के लिए भारतीय खाद्य निगम से पुराने स्टॉक के उठान और रखरखाव का रिकॉर्ड करीब एक माह पहले मांगा गया था लेकिन आज तक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया। रिकॉर्ड के अभाव में जांच अधूरी है, फिर भी उन्हें जवाबदेह ठहराते हुए चार्जशीट कर दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि खराब गेहूं की गुणवत्ता जांच तकनीकी विशेषज्ञ करते हैं लेकिन विभाग के विशेषज्ञ अधिकारी छुट्टी पर होने के कारण एक इंस्पेक्टर से ही गेहूं के सैंपल भरवा दिए गए।
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एएफएसओ बोले- मामला धीरे-धीरे बढ़ता गया
वहीं, एएफएसओ मुकेश गुप्ता ने कहा कि शुरुआत में गोदाम में करीब 40 क्विंटल गेहूं कम मिला था। बाद में विजिलेंस जांच में 9500 कट्टों की कमी सामने आई। इनके बीच एक अन्य जांच के दौरान संबंधित चट्टे में 2257 कट्टे और कम पाए गए। उन्होंने कहा कि गोदाम से गेहूं उठाने का पूरा कार्य एक समिति की निगरानी में होता था। वे उस कमेटी के मुखिया जरूर थे लेकिन लेकिन पूरी जिम्मेदारी केवल उनकी नहीं बनती। पूरे उठान की जिम्मेदारी पूरी कमेटी की बनती है। एएफएसओ मुकेश गुप्ता ने ये भी बताया कि जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक के स्पष्ट निर्देश थे कि शिकायतकर्ता विकास शर्मा को जांच में शामिल नहीं किया जाए, क्योंकि वह विभाग से बाहर के व्यक्ति हैं। इसी कारण उन्हें जांच प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बनाया गया। उन्होंने ये भी कहा कि इस घोटाले के मुख्य आरोपी निलंबित इंस्पेक्टर अशोक हैं। अब तक उन्होंने पूरा रिकॉर्ड विभाग के सुपुर्द नहीं किया है।
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करनाल। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के कुंजपुरा गोदाम में सामने आए करोड़ों रुपये के गेहूं घोटाले की जांच अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। जहां एक ओर गोदाम से हजारों कट्टे गेहूं गायब होने और लाखों रुपये का गेहूं खराब मिलने की जांच चल रही है, वहीं दूसरी ओर विभाग के अधिकारी ही एक-दूसरे के खिलाफ खुलकर बयान दे रहे हैं। इन आरोप-प्रत्यारोपों के बीच विभाग की कार्यप्रणाली, जांच प्रक्रिया और रिकॉर्ड प्रबंधन से जुड़े कई अहम राज भी सामने आने लगे हैं।
सबसे बड़ा खुलासा जांच कमेटी के अध्यक्ष एवं अनुभाग अधिकारी विकास खोखर ने किया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उन्हें इस प्रकार की जांच का कोई अनुभव नहीं है, फिर भी विभाग ने उन्हें करोड़ों रुपये के गेहूं घोटाले की जांच का अध्यक्ष बना दिया। विकास खोखर ने कहा कि उन्होंने अपने पूरे सेवाकाल में न तो कभी मंडी का काम देखा और न ही गेहूं के कट्टों की गणना या स्टॉक सत्यापन किया। इसके बावजूद पहले उन्हें फर्जी गेट पास से जुड़े मामले की जांच सौंपी गई और अब कुंजपुरा गोदाम जैसे बड़े घोटाले की जांच का अध्यक्ष बना दिया गया। उन्होंने कहा कि उन्हें तो जांच की एबीसीडी तक नहीं पता। उन्हें यह भी जानकारी नहीं कि गोदाम में कट्टों की गणना कैसे होती है। उन्होंने कहा कि उन्होंने विभाग को पहले ही बता दिया था कि वे इस तरह की तकनीकी जांच के लिए उपयुक्त नहीं हैं लेकिन फिर भी मुझे जिम्मेदारी दे दी गई।
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एफसीआई ने एक माह से नहीं दिया रिकॉर्ड :
विकास खोखर ने बताया कि जांच पूरी करने के लिए भारतीय खाद्य निगम से पुराने स्टॉक के उठान और रखरखाव का रिकॉर्ड करीब एक माह पहले मांगा गया था लेकिन आज तक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया। रिकॉर्ड के अभाव में जांच अधूरी है, फिर भी उन्हें जवाबदेह ठहराते हुए चार्जशीट कर दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि खराब गेहूं की गुणवत्ता जांच तकनीकी विशेषज्ञ करते हैं लेकिन विभाग के विशेषज्ञ अधिकारी छुट्टी पर होने के कारण एक इंस्पेक्टर से ही गेहूं के सैंपल भरवा दिए गए।
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एएफएसओ बोले- मामला धीरे-धीरे बढ़ता गया
वहीं, एएफएसओ मुकेश गुप्ता ने कहा कि शुरुआत में गोदाम में करीब 40 क्विंटल गेहूं कम मिला था। बाद में विजिलेंस जांच में 9500 कट्टों की कमी सामने आई। इनके बीच एक अन्य जांच के दौरान संबंधित चट्टे में 2257 कट्टे और कम पाए गए। उन्होंने कहा कि गोदाम से गेहूं उठाने का पूरा कार्य एक समिति की निगरानी में होता था। वे उस कमेटी के मुखिया जरूर थे लेकिन लेकिन पूरी जिम्मेदारी केवल उनकी नहीं बनती। पूरे उठान की जिम्मेदारी पूरी कमेटी की बनती है। एएफएसओ मुकेश गुप्ता ने ये भी बताया कि जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक के स्पष्ट निर्देश थे कि शिकायतकर्ता विकास शर्मा को जांच में शामिल नहीं किया जाए, क्योंकि वह विभाग से बाहर के व्यक्ति हैं। इसी कारण उन्हें जांच प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बनाया गया। उन्होंने ये भी कहा कि इस घोटाले के मुख्य आरोपी निलंबित इंस्पेक्टर अशोक हैं। अब तक उन्होंने पूरा रिकॉर्ड विभाग के सुपुर्द नहीं किया है।