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Karnal News: जितना तपस्वी बनोगे उतना ही भविष्य बेहतर होगा- आचार्य देवव्रत

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 02 Feb 2026 02:50 AM IST
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The more ascetic you become, the better your future will be - Acharya Devvrat
गुरुकुल नीलोखेड़ी में आयोजित कार्यक्रम में मंच पर उप​स्थित  गुजरात एवं महाराष्ट्र के राज्यपाल आ
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माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। हर माता-पिता में बच्चों के प्रति आकांक्षा छिपी हैं। बच्चों के भविष्य को उन्नत, संस्कारी बनाने के लिए उन्होंने आपको दूर भेजा। हमारा नैतिक कर्तव्य है कि उनकी जो आकाक्षाएं हैं वे पूर्ण हों। जितना तपस्वी बनोगे उतना ही भविष्य बेहतर होगा।
रविवार को गुरुकुल नीलोखेड़ी में आयोजित इंट्रेक्शन कार्यक्रम में बच्चों व अभिभावकों को संबोधित करते हुए गुजरात एवं महाराष्ट्र के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने यह सीख दी। मुख्य अतिथि के रूप में उन्होंने कहा कि आदमी अपूर्ण है अगर नियत से कमजोरी हो तो दुखदाई होती है। नियत बिलकुल साफ हो तो मंजिल आसान हो जाती है। इस मिशन को लेकर गुरुकुल कार्य कर रहा है। हमारे सानिध्य में रहकर की वे देश का एक जिम्मेदार नागरिक बनें।
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उन्होंने कहा कि शारीरिक रूप से बलवान रहें, बौद्धिक रूप से अच्छे शिक्षक बनें और वैचारिक रूप से संस्कारवान बनें। ये तीनों चीज यदि इस आयु में मिल जाती हैं तो दुनिया में आगे बढ़ने में बहुत ही लाभदायक होती हैं। उन्होंने कहा कि इस दुनिया की दौड़ में हमारे बच्चे किसी से पीछे न रहें। अब तक 40 से 45 बच्चे आईआईटी, नीट और एनडीए में दे चुके हैं और यह लक्ष्य अभी प्रारंभिक है हमें और आगे बढ़ना है।
ओएसडी डाॅ. राजेंद्र सिंह, प्रिंसिपल अर्जुन देव, दिनेश आर्यकुलम, महेंद्र सिंह, शिव कुमार, अतुल आदि मौजूद रहे।
फास्टफूड दे रहा बीमारी
राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि आजकल के बच्चे बहुत फास्ट फूड व चाउमिन, बर्गर खाने लगे हैं। इसका परिणाम छोटे-छोटे बच्चों को कैंसर, हृदय रोग, मधुमेह जैसे गंभीर बीमारियां हो रही है। हमने निर्णय लिया और बेकरी लगाई उस बेकरी में बच्चों के स्वास्थ्य के अनुरूप खाद्य पदार्थ तैयार किए जा रहे हैं। इससे बच्चों का स्वास्थ्य अच्छा रहे। कुरुक्षेत्र गुरुकुल में गोशाला बना दी और बच्चों को वहां से शुद्ध दूध उपलब्ध करवाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि 50 से 100 एकड़ जमीन 10 वर्ष तक लीज पर लेकर काम कर रहे है ताकि केमिकल रहित अच्छी फसल हो। गाय के गोबर को फसलों में खाद्य के रूप में प्रयोग किया जाता है।
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