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Karnal News: इस माह चार दिन बजेगी शहनाई, फिर दिसंबर तक का इंतजार
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- देवशयनी एकादशी के बाद नवंबर तक नहीं होंगे विवाह, इस महीने केवल चार शुभ मुहूर्त
भगवान दास
करनाल। जुलाई माह में विवाह के लिए केवल चार शुभ मुहूर्त शेष हैं। इसके बाद 25 जुलाई से चातुर्मास प्रारंभ हो जाएगा। इस कारण नवंबर तक विवाह जैसे मांगलिक कार्यों पर विराम रहेगा। ज्योतिषों के अनुसार, देवशयनी एकादशी के बाद भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसी कारण चातुर्मास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। जिन परिवारों में विवाह तय हैं, वे इन सीमित मुहूर्तों में ही आयोजन करने की तैयारी कर रहे हैं। इस अवधि में नवंबर तक विवाह जैसे मांगलिक कार्य स्थगित रहेंगे।
वहीं, 15 जुलाई से आषाढ़ गुप्त नवरात्र का शुभारंभ होगा। नौ दिनों तक श्रद्धालु मां भगवती के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा करेंगे। इस दौरान साधना, जप, हवन, दुर्गा सप्तशती का पाठ और व्रत का विशेष महत्व रहेगा। मंदिरों में भी विशेष धार्मिक आयोजन होंगे और श्रद्धालु सुख, समृद्धि की कामना करेंगे। श्री श्याम बालाजी ज्योतिष केंद्र के संचालक पंडित विनोद शास्त्री ने बताया कि 25 जुलाई से चातुर्मास आरंभ होने के बाद नवंबर तक विवाह के शुभ मुहूर्त नहीं रहेंगे। इसलिए जिन परिवारों में विवाह की तैयारियां चल रही हैं, उन्हें इन उपलब्ध मुहूर्तों के अनुसार ही आयोजन करना होगा। संवाद
आषाढ़ गुप्त नवरात्र का महत्व
15 जुलाई से शुरू होने वाले आषाढ़ गुप्त नवरात्र नौ दिनों तक चलेंगे। इस दौरान मां भगवती के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाएगी। श्रद्धालु साधना, जप, हवन और दुर्गा सप्तशती का पाठ कर सकते हैं। व्रत रखने का भी विशेष महत्व बताया गया है। मंदिरों में भी इन दिनों विशेष धार्मिक आयोजन होंगे।
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जुलाई के प्रमुख विवाह मुहूर्त-
6 जुलाई : रात 1:41 बजे से अगली सुबह 5:29 बजे तक।
7 जुलाई : सुबह 5:29 बजे से दोपहर 2:31 बजे तक।
11 जुलाई : देर रात 12:05 बजे से 12 जुलाई सुबह 5:32 बजे तक।
12 जुलाई : सुबह 6:13 बजे से रात 10:29 बजे तक।
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भगवान दास
करनाल। जुलाई माह में विवाह के लिए केवल चार शुभ मुहूर्त शेष हैं। इसके बाद 25 जुलाई से चातुर्मास प्रारंभ हो जाएगा। इस कारण नवंबर तक विवाह जैसे मांगलिक कार्यों पर विराम रहेगा। ज्योतिषों के अनुसार, देवशयनी एकादशी के बाद भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसी कारण चातुर्मास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। जिन परिवारों में विवाह तय हैं, वे इन सीमित मुहूर्तों में ही आयोजन करने की तैयारी कर रहे हैं। इस अवधि में नवंबर तक विवाह जैसे मांगलिक कार्य स्थगित रहेंगे।
वहीं, 15 जुलाई से आषाढ़ गुप्त नवरात्र का शुभारंभ होगा। नौ दिनों तक श्रद्धालु मां भगवती के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा करेंगे। इस दौरान साधना, जप, हवन, दुर्गा सप्तशती का पाठ और व्रत का विशेष महत्व रहेगा। मंदिरों में भी विशेष धार्मिक आयोजन होंगे और श्रद्धालु सुख, समृद्धि की कामना करेंगे। श्री श्याम बालाजी ज्योतिष केंद्र के संचालक पंडित विनोद शास्त्री ने बताया कि 25 जुलाई से चातुर्मास आरंभ होने के बाद नवंबर तक विवाह के शुभ मुहूर्त नहीं रहेंगे। इसलिए जिन परिवारों में विवाह की तैयारियां चल रही हैं, उन्हें इन उपलब्ध मुहूर्तों के अनुसार ही आयोजन करना होगा। संवाद
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आषाढ़ गुप्त नवरात्र का महत्व
15 जुलाई से शुरू होने वाले आषाढ़ गुप्त नवरात्र नौ दिनों तक चलेंगे। इस दौरान मां भगवती के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाएगी। श्रद्धालु साधना, जप, हवन और दुर्गा सप्तशती का पाठ कर सकते हैं। व्रत रखने का भी विशेष महत्व बताया गया है। मंदिरों में भी इन दिनों विशेष धार्मिक आयोजन होंगे।
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जुलाई के प्रमुख विवाह मुहूर्त-
6 जुलाई : रात 1:41 बजे से अगली सुबह 5:29 बजे तक।
7 जुलाई : सुबह 5:29 बजे से दोपहर 2:31 बजे तक।
11 जुलाई : देर रात 12:05 बजे से 12 जुलाई सुबह 5:32 बजे तक।
12 जुलाई : सुबह 6:13 बजे से रात 10:29 बजे तक।