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Kurukshetra News: गर्मी बढ़ी तो प्राचीन लक्ष्मी नारायण मंदिर में चले एसी व पंखे

संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र Updated Mon, 27 Apr 2026 01:52 AM IST
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As the heat increased, ACs and fans were used in the ancient Lakshmi Narayan temple.
कुरुक्षेत्र। लक्ष्मी नारायण मंदिर के व्यवस्थापक स्वामी हरिनारायण गिरी पूजा अर्चना करते हुए व लग
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कुरुक्षेत्र। पारा लगातार चढ़ रहा है। सड़क से लेकर हर चीज से तपन महसूस होने लगी है तो हर कोई इससे अपने बचाव के प्रयास में भी जुटा है। इसी क्रम में ही अब भगवान लक्ष्मी नारायण, कुबेर व गणेश जी को भी शीतलता प्रदान करने के लिए पंखे से लेकर एसी तक का सहारा लिया जा रहा है। सन्निहित सरोवर पर स्थित प्राचीन लक्ष्मी नारायण मंदिर में गर्मी के सीजन को देख खास व्यवस्था की गई है तो वहीं देख के भोग में भी भक्तों की ओर से बदलाव किया गया है। यहां मुख्य ग्रह में पंखा ही नहीं एसी भी लगाया गया है, जो हर समय चलते हैं। इसके पीछे लक्ष्य देवों को शीतलता प्रदान करना ही है। आरती के समय में भी बदलाव किया गया है। पहले सुबह आरती छह बजे होती थी, जो अब पांच बजे की जाने लगी है। शाम को आरती साढ़े सात बजे की जाती है जो पहले छह बजे होती थी।
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इस तरह किया भोग में बदलाव
सुबह के समय - चावल, दही, खिचड़ी व मट्ठा।
दोपहर के समय - खरबूजा व तरबूज।
शाम के समय- ठंडा दूध, जिसमें केसर भी डाला जाता है।

भगवान के प्रति भाव ही सब कुछ : गिरी
व्यवस्थापक स्वामी हरिनारायण गिरी बताते हैं कि भगवान के प्रति हमारा भाव ही सब कुछ होता है। मौसम के अनुसार भक्तों का अपने भगवान के प्रति भाव भी गहराता रहता है। अब गर्मी का सीजन है तो शीतलता प्रदान करने के लिए आरती समय से लेकर भोग तक में बदलाव किया गया है।
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दो माह तक सूर्य की पहली किरण सीधे भगवान के चरणों में
स्वामी हरिनारायण गिरी के मुताबिक लक्ष्मी नारायण मंदिर की अहम मान्यता व महत्ता है। यहां हर रोज हजारों श्रद्वालु पहुंचते हैं। लक्ष्मी नारायण जी के साथ यहां कुबेर जी, गणेश जी व हनुमान जी भी विराजे हुए हैं। मार्च व अप्रैल के माह में सूर्य की पहली सीधी किरणें यहां भगवान के चरणों में पड़ती है। राजा कुरू ने इसी पवित्र स्थल पर चार सौ साल तक तपस्या की थी। महाभारत के अंत में भगवान श्रीकष्ण यहीं से अंर्तध्यान होकर द्वारिका गए थे।
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