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चैत्र कृष्ण चौदस पर ऐतिहासिक होगी अष्टकोशी तीर्थयात्रा : धुमन सिंह

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 17 Mar 2026 01:57 AM IST
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Ashtakoshi pilgrimage will be historic on Chaitra Krishna Chaturdashi: Dhuman Singh
कुरुक्षेत्र। पत्रकारों से बातचीत करते सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष धुमन सिंह किरमच। स
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कुरुक्षेत्र। सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष धुमन सिंह किरमच ने जिला भाजपा कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि प्राचीन धार्मिक परंपराओं को पुनर्जीवित करने के क्रम में इस वर्ष भी अष्टकोशी तीर्थयात्रा का आयोजन किया जा रहा है। यह यात्रा चैत्र कृष्ण चौदस, 18 मार्च को सुबह पांच बजे दर्रा खेड़ा नाभ कमल मंदिर से प्रारंभ होगी और शाम छह बजे उसी स्थान पर समाप्त होगी।
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धुमन सिंह किरमच ने बताया कि कुरुक्षेत्र की अष्टकोशी परिक्रमा वास्तव में सन्निहित सरोवर की परिक्रमा है जिसका विस्तार चारों दिशाओं में दो-दो कोस था। तीर्थ के तट पर स्थित मंदिरों में स्नान-दान की परंपरा सदियों पुरानी है। यह यात्रा पितरों की मुक्ति, मनोकामनाओं की पूर्ति, मोक्ष प्राप्ति और अक्षय लोक की प्राप्ति का माध्यम मानी जाती है।
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उन्होंने कहा कि पौराणिक मान्यता के अनुसार सर्वप्रथम ब्रह्मा, विष्णु और महेश त्रिदेवों ने उपवास रखकर अष्टकोशी परिक्रमा की और सृष्टि निर्माण के लिए अपने-अपने देवत्व भार ग्रहण किए। उसके बाद हजारों वर्षों से देवता, ऋषि-मुनि और धार्मिक पुरुष इस यात्रा को निरंतर जारी रखे हुए हैं। एक बार करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं, दो बार से मोक्ष और तीन बार से अक्षय लोक की प्राप्ति होती है।
24 किलोमीटर लंबी होगी तीर्थयात्रा
धुमन सिंह ने बताया कि साहसिक तीर्थयात्रा लगभग 24 किलोमीटर लंबी है, जो खेतों की पगडंडियों और सरस्वती नदी के किनारे-किनारे चलती है। यात्रा का मार्ग नाभ कमल तीर्थ से शुरू होकर ओजस तीर्थ, स्थानेश्वर तीर्थ, कुबेर तीर्थ, बदर पाचन तीर्थ, क्षीर सागर तीर्थ, पूर्ववाहिनी सरस्वती तीर्थ, खेड़ी मारकंडा, दधीचि तीर्थ, वृद्ध कन्या तीर्थ, रंतुक यक्ष, पावन तीर्थ, औघड़ तीर्थ, बाणगंगा, उपगया तीर्थ, नरकतारी बाणगंगा होते हुए वापस नाभ कमल तीर्थ पर समाप्त होती है।
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