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समाज में ज्ञान-संपन्नता और बौद्धिक वातावरण के निर्माण में पुस्तकों की अहम भूमिका : प्रो. सोमनाथ
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कुरुक्षेत्र। पुस्तक प्रदर्शनी में जानकारी लेते मुख्यातिथि कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा सहित अन्
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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सामुदायिक केंद्र में तीन दिवसीय पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इसका उद्घाटन कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने किया। राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) के सहयोग से आयोजित यह प्रदर्शनी 29 जनवरी तक चलेगी।
कुलपति ने कहा कि समाज में ज्ञान-संपन्नता और बौद्धिक वातावरण के निर्माण में पुस्तकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। डिजिटल युग के बावजूद मुद्रित पुस्तकों का महत्व आज भी बना हुआ है, क्योंकि पुस्तकें सोचने, समझने और विश्लेषण की क्षमता को विकसित करती हैं। विश्वविद्यालय केवल परीक्षाओं और डिग्रियों तक सीमित नहीं होते बल्कि वे विचारों, शोध और ज्ञान-विस्तार के केंद्र होते हैं। पुस्तकों के माध्यम से नई पीढ़ी को न केवल बौद्धिक रूप से समृद्ध किया जा सकता है बल्कि उन्हें वैश्विक दृष्टिकोण भी प्रदान किया जा सकता है।
डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. राकेश कुमार ने कहा कि इस प्रकार की पुस्तक प्रदर्शनी विश्वविद्यालय के शैक्षणिक वातावरण को और अधिक सुदृढ़ करती है। इससे विद्यार्थियों और शिक्षकों में पठन-पाठन की संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा और उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में भी सकारात्मक सुधार आएगा। पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. संजीव शर्मा ने बताया कि इस प्रदर्शनी के आयोजन के लिए रूसा के अंतर्गत एक करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई है। इस राशि से विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए उपयोगी पुस्तकों की खरीद की जाएगी। इससे विश्वविद्यालय के पुस्तकालय संसाधनों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
पुस्तकालय अध्यक्ष डॉ. चेतन शर्मा ने कहा कि यह पुस्तक प्रदर्शनी ज्ञानवर्धन का एक उत्कृष्ट अवसर सिद्ध हो रही है। प्रदर्शनी के पहले ही दिन पुस्तक प्रेमियों में खासा उत्साह देखने को मिला और विभिन्न स्टॉलों पर पाठकों की अच्छी उपस्थिति रही। इस मौके पर प्रो. संजीव अग्रवाल, प्रो. सुनील ढींगरा, पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. संजीव शर्मा, प्रो. जसबीर ढांडा, प्रो. जितेंद्र शर्मा, प्रो. प्रीति जैन, प्रॉक्टर प्रो. अनिल गुप्ता सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
50 से अधिक प्रतिष्ठित प्रकाशकों ने लिया भाग
उप-पुस्तकालयाध्यक्ष व प्रदर्शनी के संयोजक डॉ. संजय कौशिक ने बताया कि प्रदर्शनी में देश-विदेश के 50 से अधिक प्रतिष्ठित प्रकाशकों ने भाग लिया है। इनमें भारतीय और विदेशी प्रकाशक शामिल हैं। प्रदर्शनी में शैक्षणिक, शोध, साहित्यिक, तकनीकी, प्रतियोगी परीक्षाओं और सामान्य ज्ञान से संबंधित पुस्तकों का विशाल और विविध संग्रह उपलब्ध है। इसे देखने और क्रय करने के लिए बड़ी संख्या में विद्यार्थी, शोधार्थी और पुस्तक प्रेमी पहुंच रहे हैं।
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कुलपति ने कहा कि समाज में ज्ञान-संपन्नता और बौद्धिक वातावरण के निर्माण में पुस्तकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। डिजिटल युग के बावजूद मुद्रित पुस्तकों का महत्व आज भी बना हुआ है, क्योंकि पुस्तकें सोचने, समझने और विश्लेषण की क्षमता को विकसित करती हैं। विश्वविद्यालय केवल परीक्षाओं और डिग्रियों तक सीमित नहीं होते बल्कि वे विचारों, शोध और ज्ञान-विस्तार के केंद्र होते हैं। पुस्तकों के माध्यम से नई पीढ़ी को न केवल बौद्धिक रूप से समृद्ध किया जा सकता है बल्कि उन्हें वैश्विक दृष्टिकोण भी प्रदान किया जा सकता है।
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डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. राकेश कुमार ने कहा कि इस प्रकार की पुस्तक प्रदर्शनी विश्वविद्यालय के शैक्षणिक वातावरण को और अधिक सुदृढ़ करती है। इससे विद्यार्थियों और शिक्षकों में पठन-पाठन की संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा और उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में भी सकारात्मक सुधार आएगा। पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. संजीव शर्मा ने बताया कि इस प्रदर्शनी के आयोजन के लिए रूसा के अंतर्गत एक करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई है। इस राशि से विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए उपयोगी पुस्तकों की खरीद की जाएगी। इससे विश्वविद्यालय के पुस्तकालय संसाधनों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
पुस्तकालय अध्यक्ष डॉ. चेतन शर्मा ने कहा कि यह पुस्तक प्रदर्शनी ज्ञानवर्धन का एक उत्कृष्ट अवसर सिद्ध हो रही है। प्रदर्शनी के पहले ही दिन पुस्तक प्रेमियों में खासा उत्साह देखने को मिला और विभिन्न स्टॉलों पर पाठकों की अच्छी उपस्थिति रही। इस मौके पर प्रो. संजीव अग्रवाल, प्रो. सुनील ढींगरा, पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. संजीव शर्मा, प्रो. जसबीर ढांडा, प्रो. जितेंद्र शर्मा, प्रो. प्रीति जैन, प्रॉक्टर प्रो. अनिल गुप्ता सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
50 से अधिक प्रतिष्ठित प्रकाशकों ने लिया भाग
उप-पुस्तकालयाध्यक्ष व प्रदर्शनी के संयोजक डॉ. संजय कौशिक ने बताया कि प्रदर्शनी में देश-विदेश के 50 से अधिक प्रतिष्ठित प्रकाशकों ने भाग लिया है। इनमें भारतीय और विदेशी प्रकाशक शामिल हैं। प्रदर्शनी में शैक्षणिक, शोध, साहित्यिक, तकनीकी, प्रतियोगी परीक्षाओं और सामान्य ज्ञान से संबंधित पुस्तकों का विशाल और विविध संग्रह उपलब्ध है। इसे देखने और क्रय करने के लिए बड़ी संख्या में विद्यार्थी, शोधार्थी और पुस्तक प्रेमी पहुंच रहे हैं।
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