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Kurukshetra News: सुदामा चरित का किया भावपूर्ण वर्णन
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Tue, 19 May 2026 01:34 AM IST
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कुरुक्षेत्र। गौरी शंकर मंदिर में कथा के दौरान आशीर्वाद लेते थानेसर विधायक अशोक अरोड़ा एवं अन्य
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। श्री गो गीता गायत्री सत्संग सेवा समिति के तत्वावधान में सेक्टर-8 गौरी शंकर मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया गया। भागवत प्रवक्ता अनिल शास्त्री ने सुदामा चरित का भावपूर्ण चित्रण किया। उन्होंने बताया कि सुदामा अत्यंत निर्धन थे और भगवान कृष्ण के बाल सखा थे। पत्नी सुशीला के आग्रह पर जब वे द्वारका अपने मित्र से मिलने पहुंचे तो द्वारपालों ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया।
कृष्ण को जब सुदामा के आगमन का समाचार मिला तो वे नंगे पांव दौड़ते हुए स्वयं द्वार पर पहुंचे। उन्हें आदरपूर्वक महल में ले गए। भगवान ने सुदामा को सिंहासन पर बैठाया और स्वयं उनके चरण धोए। उन्होंने बिना कुछ कहे ही सुदामा की सारी निर्धनता दूर कर दी। शास्त्री ने परीक्षित और शुकदेव मुनि प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि सात दिन तक कथा श्रवण के बाद राजा परीक्षित मृत्यु के भय से मुक्त हो चुके थे और तक्षक नाग की प्रतीक्षा करने लगे।
उनके पुत्र जनमेजय ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था कर रखी थी, लेकिन तक्षक नाग फूलों की माला में सूक्ष्म रूप धारण कर भीतर प्रवेश कर गया। जैसे ही राजा परीक्षित ने माला धारण की, तक्षक ने ऋषि के श्राप को पूर्ण किया, जिससे परीक्षित को मोक्ष की प्राप्ति हुई। इस अवसर पर थानेसर विधायक अशोक अरोड़ा, पिहोवा विधायक मंदीप चट्ठा, उद्योगपति प्रदीप सैनी, दिव्यम सैनी, सीएमओ डॉ. अर्चना सिंह, सुभाष पाली और चेयरमैन राकेश सैनी एवं नरेश गर्ग सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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कुरुक्षेत्र। श्री गो गीता गायत्री सत्संग सेवा समिति के तत्वावधान में सेक्टर-8 गौरी शंकर मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया गया। भागवत प्रवक्ता अनिल शास्त्री ने सुदामा चरित का भावपूर्ण चित्रण किया। उन्होंने बताया कि सुदामा अत्यंत निर्धन थे और भगवान कृष्ण के बाल सखा थे। पत्नी सुशीला के आग्रह पर जब वे द्वारका अपने मित्र से मिलने पहुंचे तो द्वारपालों ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया।
कृष्ण को जब सुदामा के आगमन का समाचार मिला तो वे नंगे पांव दौड़ते हुए स्वयं द्वार पर पहुंचे। उन्हें आदरपूर्वक महल में ले गए। भगवान ने सुदामा को सिंहासन पर बैठाया और स्वयं उनके चरण धोए। उन्होंने बिना कुछ कहे ही सुदामा की सारी निर्धनता दूर कर दी। शास्त्री ने परीक्षित और शुकदेव मुनि प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि सात दिन तक कथा श्रवण के बाद राजा परीक्षित मृत्यु के भय से मुक्त हो चुके थे और तक्षक नाग की प्रतीक्षा करने लगे।
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उनके पुत्र जनमेजय ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था कर रखी थी, लेकिन तक्षक नाग फूलों की माला में सूक्ष्म रूप धारण कर भीतर प्रवेश कर गया। जैसे ही राजा परीक्षित ने माला धारण की, तक्षक ने ऋषि के श्राप को पूर्ण किया, जिससे परीक्षित को मोक्ष की प्राप्ति हुई। इस अवसर पर थानेसर विधायक अशोक अरोड़ा, पिहोवा विधायक मंदीप चट्ठा, उद्योगपति प्रदीप सैनी, दिव्यम सैनी, सीएमओ डॉ. अर्चना सिंह, सुभाष पाली और चेयरमैन राकेश सैनी एवं नरेश गर्ग सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।