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संपूर्ण वेदों और शास्त्रों का सार श्रीकृष्ण की भक्ति और श्रीमद्भागवत कथा : कौशिक
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Tue, 19 May 2026 01:34 AM IST
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कुरुक्षेत्र। वार्ड-20 के गुरुदेव नगर में कथा के दौरान पूजन करते यजमान एवं आयोजक। स्वयं
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। जय मां दुर्गा-जय श्री महाकाल ट्रस्ट की ओर से वार्ड-20 के गुरुदेव नगर में पुरुषोत्तम मास के उपलक्ष्य में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का शुभारंभ हुआ। भागवत प्रवचनों में कथाव्यास पंडित विकास कौशिक ने कथा की महिमा, पूजन विधि और आरंभिक प्रसंग भजनों सहित विस्तार से सुनाए।
प्रथम अध्याय में कथाव्यास ने बताया कि नैमिषारण्य तीर्थ में सूत जी और शौनक आदि ऋषियों के संवाद में कलयुग के जीवों के कल्याण के लिए ऋषिगण सूत जी से प्रश्न करते हैं कि कलयुग में मनुष्यों की आयु कम और बुद्धि मंद है, इसलिए ऐसा सरल साधन बताएं, जिससे सभी जीवों का परम कल्याण हो सके।
सूत जी ने ऋषिगणों को बताया कि संपूर्ण वेदों और शास्त्रों का सार भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और श्रीमद्भागवत कथा है, जिससे मनुष्य को अनायास ही मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है। पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) की व्याख्या करते हुए कथाव्यास ने कहा कि यह आत्मशुद्धि, दान और आध्यात्मिक उन्नति का अत्यंत पवित्र महीना है। इसे भगवान विष्णु का प्रिय मास माना जाता है। उनकी पूजा करने से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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मुख्य यजमान व ट्रस्ट के अध्यक्ष पंडित राजेश मौद्गिल परिवार, युवा भाजपा नेता साहिल सुधा, पार्षद मनिंद्र सिंह छिंदा और अंकुश गुप्ता ने कथाव्यास को तिलक लगाकर भागवत पूजन किया। कथा में शुक्रवार 22 मई तक प्रतिदिन सायं 4 से 7 बजे भागवत प्रवचन होंगे। रोजाना सुबह 8 से 9 बजे देव पूजन, दोपहर 3 से सायं 4 बजे पुरुषोत्तम मास महिमा और भजन कीर्तन होगा। आरती के बाद प्रतिदिन सायं 7:30 बजे भंडारा होगा। आरती में आचार्य राजेश वत्स, आचार्य शम्भू प्रसाद, रमेश कौशिक, ललित अत्री, गोपाल शर्मा, राहुल तंवर आदि शामिल रहे।
कुरुक्षेत्र। जय मां दुर्गा-जय श्री महाकाल ट्रस्ट की ओर से वार्ड-20 के गुरुदेव नगर में पुरुषोत्तम मास के उपलक्ष्य में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का शुभारंभ हुआ। भागवत प्रवचनों में कथाव्यास पंडित विकास कौशिक ने कथा की महिमा, पूजन विधि और आरंभिक प्रसंग भजनों सहित विस्तार से सुनाए।
प्रथम अध्याय में कथाव्यास ने बताया कि नैमिषारण्य तीर्थ में सूत जी और शौनक आदि ऋषियों के संवाद में कलयुग के जीवों के कल्याण के लिए ऋषिगण सूत जी से प्रश्न करते हैं कि कलयुग में मनुष्यों की आयु कम और बुद्धि मंद है, इसलिए ऐसा सरल साधन बताएं, जिससे सभी जीवों का परम कल्याण हो सके।
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सूत जी ने ऋषिगणों को बताया कि संपूर्ण वेदों और शास्त्रों का सार भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और श्रीमद्भागवत कथा है, जिससे मनुष्य को अनायास ही मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है। पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) की व्याख्या करते हुए कथाव्यास ने कहा कि यह आत्मशुद्धि, दान और आध्यात्मिक उन्नति का अत्यंत पवित्र महीना है। इसे भगवान विष्णु का प्रिय मास माना जाता है। उनकी पूजा करने से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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कुरुक्षेत्र। वार्ड-20 के गुरुदेव नगर में कथा के दौरान पूजन करते यजमान एवं आयोजक। स्वयं