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Kurukshetra News: आईएसओ 14001, वेस्ट टू एनर्जी और ऊर्जा संरक्षण पर विशेषज्ञों ने साझा किए व्यावहारिक अनुभव
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कुरुक्षेत्र। प्रतिभागियों को संबोधित करने के दौरान मुख्य वक्ता और आयोजक। स्वयं
- फोटो : स्वयं
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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के पर्यावरण अध्ययन संस्थान में उद्योग-संबद्ध कौशल आधारित कार्यशाला के दूसरे दिन मंगलवार को पर्यावरण प्रबंधन और सतत विकास से जुड़े महत्वपूर्ण औद्योगिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। यह कार्यशाला सेंटर फॉर स्किल डेवलपमेंट के सहयोग से और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय एलुमनी एसोसिएशन के प्रायोजन में आयोजित की गई।
कार्यशाला की समन्वयक डॉ. भावना दहिया ने दूसरे दिन के सत्र की शुरुआत कर संसाधन व्यक्तियों का परिचय कराया। तकनीकी सत्रों की शुरुआत आईएसओ 14001 पर आधारित व्याख्यान से हुई, जिसे विशेषज्ञ जगदेव सिंह ने प्रस्तुत किया। उन्होंने औद्योगिक इकाइयों में पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली के महत्व पर जानकारी दी और बताया कि आईएसओ 14001 किस प्रकार पर्यावरणीय नियमों के अनुपालन, प्रदूषण नियंत्रण और सतत सुधार में सहायक है। यह भी समझाया कि यह मानक उद्योगों को पर्यावरणीय जिम्मेदारी और परिचालन दक्षता के बीच संतुलन बनाने में मदद करता है।
पर्यावरण अध्ययन संस्थान के निदेशक प्रो. परमेश कुमार ने बताया कि कार्यशाला में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों से 75 एमएससी, एमटेक और पीएचडी छात्र-छात्राएं भाग ले रहे हैं, जिन्होंने सत्रों के दौरान उत्साहपूर्वक चर्चा में हिस्सा लिया। दूसरे दिन के सत्रों ने पर्यावरणीय सिद्धांतों और औद्योगिक व्यवहार के बीच मजबूत संबंध स्थापित किया। इस मौके पर शिक्षण संकाय सदस्य डॉ. हरदीप राय शर्मा, डॉ. संदीप, डॉ. मीनाक्षी सुहाग, डॉ. दिप्ती, डॉ. पूजा अरोड़ा सहित अन्य सदस्य एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।
वेस्ट टू एनर्जी-सतत समाधान की दिशा में कदम
ईजीएस इंडिया इंजीनियर के निदेशक जुगदेव सिंह ने वेस्ट टू एनर्जी विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की वर्तमान चुनौतियों पर प्रकाश डाला और बताया कि बढ़ती आबादी और शहरीकरण के कारण कचरे का वैज्ञानिक निपटान एक बड़ी आवश्यकता बन गया है। कचरे से ऊर्जा उत्पादन की आधुनिक तकनीकों, जैसे बायोमास, बायोगैस और थर्मल प्रोसेसिंग की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वेस्ट टू एनर्जी समाधान न केवल नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देते हैं बल्कि कचरे की मात्रा कम कर पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक हैं। यह मॉडल सर्कुलर इकोनॉमी को मजबूती देते हुए आर्थिक और पर्यावरणीय संतुलन स्थापित करता है।
एनर्जी सेविंग-सतत भविष्य की कुंजी
अगले सत्र में ईएचएस एलायंस गुरुग्राम के एनवायरनमेंट हेल्थ सेफ्टी कंसल्टेंट डॉ. उदय प्रताप ने एनर्जी सेविंग : पावरिंग ए सस्टेनेबल फ्यूचर विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने ऊर्जा संरक्षण के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि सीमित संसाधनों के बेहतर और कुशल उपयोग से ही सतत विकास संभव है। उन्होंने उद्योगों और समाज दोनों स्तरों पर अपनाई जाने वाली ऊर्जा दक्ष रणनीतियों की विस्तार से जानकारी दी। साथ ही ऊर्जा बचत की भूमिका को जलवायु परिवर्तन को कम करने के प्रभावी उपाय के रूप में बताया। छोटे-छोटे प्रयास भी दीर्घकाल में बड़े सकारात्मक परिणाम दे सकते हैं और एक सुरक्षित, स्वच्छ भविष्य की नींव रखते हैं।
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पर्यावरण अध्ययन संस्थान के निदेशक प्रो. परमेश कुमार ने बताया कि कार्यशाला में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों से 75 एमएससी, एमटेक और पीएचडी छात्र-छात्राएं भाग ले रहे हैं, जिन्होंने सत्रों के दौरान उत्साहपूर्वक चर्चा में हिस्सा लिया। दूसरे दिन के सत्रों ने पर्यावरणीय सिद्धांतों और औद्योगिक व्यवहार के बीच मजबूत संबंध स्थापित किया। इस मौके पर शिक्षण संकाय सदस्य डॉ. हरदीप राय शर्मा, डॉ. संदीप, डॉ. मीनाक्षी सुहाग, डॉ. दिप्ती, डॉ. पूजा अरोड़ा सहित अन्य सदस्य एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।
वेस्ट टू एनर्जी-सतत समाधान की दिशा में कदम
ईजीएस इंडिया इंजीनियर के निदेशक जुगदेव सिंह ने वेस्ट टू एनर्जी विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की वर्तमान चुनौतियों पर प्रकाश डाला और बताया कि बढ़ती आबादी और शहरीकरण के कारण कचरे का वैज्ञानिक निपटान एक बड़ी आवश्यकता बन गया है। कचरे से ऊर्जा उत्पादन की आधुनिक तकनीकों, जैसे बायोमास, बायोगैस और थर्मल प्रोसेसिंग की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वेस्ट टू एनर्जी समाधान न केवल नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देते हैं बल्कि कचरे की मात्रा कम कर पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक हैं। यह मॉडल सर्कुलर इकोनॉमी को मजबूती देते हुए आर्थिक और पर्यावरणीय संतुलन स्थापित करता है।
एनर्जी सेविंग-सतत भविष्य की कुंजी
अगले सत्र में ईएचएस एलायंस गुरुग्राम के एनवायरनमेंट हेल्थ सेफ्टी कंसल्टेंट डॉ. उदय प्रताप ने एनर्जी सेविंग : पावरिंग ए सस्टेनेबल फ्यूचर विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने ऊर्जा संरक्षण के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि सीमित संसाधनों के बेहतर और कुशल उपयोग से ही सतत विकास संभव है। उन्होंने उद्योगों और समाज दोनों स्तरों पर अपनाई जाने वाली ऊर्जा दक्ष रणनीतियों की विस्तार से जानकारी दी। साथ ही ऊर्जा बचत की भूमिका को जलवायु परिवर्तन को कम करने के प्रभावी उपाय के रूप में बताया। छोटे-छोटे प्रयास भी दीर्घकाल में बड़े सकारात्मक परिणाम दे सकते हैं और एक सुरक्षित, स्वच्छ भविष्य की नींव रखते हैं।
