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बंजर हो रही जमीन, बढ़ रहे शुगर और हार्ट अटैक के मरीज : देवव्रत
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कुरुक्षेत्र। 60 के दशक में देश के सभी प्रदेशों की भूमि का सर्वे किया गया, जहां सभी जगहों की भूमि उपजाऊ मिली। इसके बाद पैदावार की दौड़ में भूमि लगातार बंजर होती गई और देश, समाज व किसानों के सामने कई प्रकार की समस्याएं आ खड़ी हुईं, ऐसे में अब प्राकृतिक खेती के अलावा कोई विकल्प नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रत्येक कार्यक्रम में किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ रहे हैं।
ये विचार गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने व्यक्त किए। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में वे एक शिक्षक के रूप में दिखाई दिए और किसानों को क्लास के बच्चों की तरह ही प्राकृतिक खेती के गुरों से अवगत कराया। कभी वीडियो दिखाकर तो कभी अन्य माध्यम से किसानों को हकीकत दर्शाई तो इस मुहिम के चलाने के पीछे रही पीड़ा भी व्यक्त की। उन्होंने किसानों को समझाते हुए कहा कि आज से 30-40 वर्ष पहले हमारे देश व समाज में शुगर, हार्ट अटैक, कैंसर, घुटने बदलवाना, ब्रेन ट्यूमर जैसी बीमारियों का नाम भी नहीं पता था। नागरिकों को शुद्ध व पौष्टिक भोजन मिलता था। अब खेतों में डाले जाने वाले रसायन फसलों में समा चुका है, जो आए दिन फल, सब्जी व भोजन के माध्यम सभी रसायन हमारे शरीर में जा रहे हैं। पशुओं का दूध भी जहर बनता जा रहा है। इसका इलाज प्राकृतिक खेती अपनाकर शुद्ध व पौष्टिक भोजन को अपनाना है।
राज्यपाल ने कहा कि गुरुकुल में 180 एकड़ में प्राकृतिक खेती की जा रही है। यहां पर किसानों को जीवामृत, जीवाघन, बीजामृत सहित सभी प्रकार की विधियों को विस्तार से प्रशिक्षण दिया जाता है। देशी गाय के एक ग्राम गोबर में 300 करोड़ से ज्यादा सूक्ष्म जीव होते हैं। गाय रोजाना 10 किलोग्राम गोबर से 30 लाख बैक्टीरिया पैदा करती है। एक देशी गाय से 10 एकड़ भूमि में प्राकृतिक खेती करना संभव है। यदि खेत में केंचुए और सूक्ष्म जीव बढ़ेंगे तो वो खुद ही खेती की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएंगे। इस मौके पर चीफ व्हिप रामकुमार कश्यप, पूर्व राज्यमंत्री सुभाष सुधा, केयूके वीसी सोमनाथ सचदेवा, अतिरिक्त निदेशक रामप्रताप सिहाग, चेयरमैन सुभाष कलसाना, चेयरमैन गुरनाम सैनी, जिलाध्यक्ष तिजेंद्र सिंह गोल्डी, जयभगवान शर्मा डीडी, पद्मश्री वैज्ञानिक हरिओम, प्राकृतिक खेती वैज्ञानिक बलजीत सिंह सहित प्रगतिशील किसान भी मौजूद रहे।
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ये विचार गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने व्यक्त किए। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में वे एक शिक्षक के रूप में दिखाई दिए और किसानों को क्लास के बच्चों की तरह ही प्राकृतिक खेती के गुरों से अवगत कराया। कभी वीडियो दिखाकर तो कभी अन्य माध्यम से किसानों को हकीकत दर्शाई तो इस मुहिम के चलाने के पीछे रही पीड़ा भी व्यक्त की। उन्होंने किसानों को समझाते हुए कहा कि आज से 30-40 वर्ष पहले हमारे देश व समाज में शुगर, हार्ट अटैक, कैंसर, घुटने बदलवाना, ब्रेन ट्यूमर जैसी बीमारियों का नाम भी नहीं पता था। नागरिकों को शुद्ध व पौष्टिक भोजन मिलता था। अब खेतों में डाले जाने वाले रसायन फसलों में समा चुका है, जो आए दिन फल, सब्जी व भोजन के माध्यम सभी रसायन हमारे शरीर में जा रहे हैं। पशुओं का दूध भी जहर बनता जा रहा है। इसका इलाज प्राकृतिक खेती अपनाकर शुद्ध व पौष्टिक भोजन को अपनाना है।
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राज्यपाल ने कहा कि गुरुकुल में 180 एकड़ में प्राकृतिक खेती की जा रही है। यहां पर किसानों को जीवामृत, जीवाघन, बीजामृत सहित सभी प्रकार की विधियों को विस्तार से प्रशिक्षण दिया जाता है। देशी गाय के एक ग्राम गोबर में 300 करोड़ से ज्यादा सूक्ष्म जीव होते हैं। गाय रोजाना 10 किलोग्राम गोबर से 30 लाख बैक्टीरिया पैदा करती है। एक देशी गाय से 10 एकड़ भूमि में प्राकृतिक खेती करना संभव है। यदि खेत में केंचुए और सूक्ष्म जीव बढ़ेंगे तो वो खुद ही खेती की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएंगे। इस मौके पर चीफ व्हिप रामकुमार कश्यप, पूर्व राज्यमंत्री सुभाष सुधा, केयूके वीसी सोमनाथ सचदेवा, अतिरिक्त निदेशक रामप्रताप सिहाग, चेयरमैन सुभाष कलसाना, चेयरमैन गुरनाम सैनी, जिलाध्यक्ष तिजेंद्र सिंह गोल्डी, जयभगवान शर्मा डीडी, पद्मश्री वैज्ञानिक हरिओम, प्राकृतिक खेती वैज्ञानिक बलजीत सिंह सहित प्रगतिशील किसान भी मौजूद रहे।