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Kurukshetra News: मीरी पीरी इंस्टीट्यूट विवाद गहराया, एसजीपीसी ने हरियाणा कमेटी को भेजा नोटिस

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 01 Aug 2026 02:19 AM IST
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Miri Piri Institute controversy deepens, SGPC issues notice to Haryana committee
कुरुक्षेत्र/शाहाबाद। मीरी पीरी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च सेंटर शाहाबाद के संचालन को लेकर विवाद फिर बढ़ गया है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) और मीरी पीरी ट्रस्ट ने हरियाणा कमेटी को कानूनी नोटिस भेजा है। यह नोटिस एचएसजीपीसी द्वारा प्रबंधन संभालने के दावे के चार दिन बाद आया है।
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नोटिस में कहा गया है कि न्यायालय का फैसला मीरी पीरी ट्रस्ट के पक्ष में है। बोर्ड संबंधी मामले पर न्यायालय की रोक अभी भी प्रभावी है। इसलिए हरियाणा कमेटी अस्पताल का प्रबंधन अपने हाथ में नहीं ले सकती। नोटिस में यह भी चेतावनी दी गई है कि कमेटी का कोई पदाधिकारी या सदस्य संस्थान में प्रवेश न करे। एचएसजीएमसी के प्रधान जत्थेदार जगदीश सिंह झींडा ने 27 जुलाई को प्रबंधन संभालने का एलान किया था। उन्होंने प्रदेश सरकार द्वारा नियुक्त ड्यूटी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में यह दावा किया था। एचएसजीएमसी ने जून माह का लंबित वेतन अगले दिन जारी करने की बात कही थी। हालांकि, एचएसजीएमसी अभी तक यह वेतन जारी नहीं कर पाई है, जिसके पीछे कानूनी अड़चनें मानी जा रही हैं।
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एसजीपीसी द्वारा कानूनी नोटिस भेजे जाने के बाद विवाद और गहरा गया है। इस घटनाक्रम से चिकित्सकों और अन्य कर्मचारियों की चिंता बढ़ गई है। वेतन जारी न होने से भी कर्मचारी परेशान हैं। कमेटी इस मामले पर अभी भी मंथन कर रही है।
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नोटिस से एसजीपीसी का दोहरा चेहरा आया सामने : दादूवाल
हरियाणा कमेटी के धर्म प्रचार समिति अध्यक्ष दादूवाल ने एसजीपीसी पर दोहरा चेहरा दिखाने का आरोप लगाया है। यह आरोप मीरी पीरी संस्थान को भेजे गए कानूनी नोटिस के बाद सामने आया। एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने पहले कहा था कि हरियाणा कमेटी को संस्थान की सेवा संभालने पर कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन अब उसी संस्थान को कानूनी नोटिस भेजना एसजीपीसी की मंशा पर सवाल उठाता है। दादूवाल ने कहा कि इससे साबित होता है कि एसजीपीसी अस्पताल का नियंत्रण छोड़ना नहीं चाहती। उन्होंने पूछा कि यदि एसजीपीसी का पहले वाला बयान सही था, तो नोटिस क्यों भेजा गया। इस कार्रवाई से अस्पताल कर्मचारियों के वेतन भुगतान की प्रक्रिया फिर बाधित हो गई है। पहले भी वेतन को लेकर असमंजस था, अब कानूनी नोटिस से अनिश्चितता बढ़ गई है।

एचएसजीएमसी के कुछ पदाधिकारी भी बादल परिवार से मिले होने का दावा
दादूवाल का आरोप है कि एचएसजीएमसी के कुछ पदाधिकारी और सदस्य भी बादल परिवार के साथ मिले हुए हैं, जिसके कारण मीरी पीरी संस्थान को लेकर लगातार नए-नए षड्यंत्र रचे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में अस्पताल हर महीने करोड़ों रुपये के घाटे में चल रहा है, जैसा कि एसजीपीसी की ओर से पहले कहा जाता रहा है, तो फिर उसी संस्थान पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए कानूनी लड़ाई क्यों लड़ी जा रही है। उन्होंने कहा कि एचएसजीएमसी अब संस्थान की सेवा संभाल चुकी है और आने वाले समय में अस्पताल के सभी वित्तीय एवं प्रशासनिक मामलों की जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों, दवाइयों की खरीद, वित्तीय लेन-देन और अन्य प्रशासनिक मामलों की निष्पक्ष जांच के बाद यह सामने आएगा कि संस्थान में किस प्रकार काम हुआ और यदि कहीं कोई अनियमितता या भ्रष्टाचार हुआ है तो उसकी जिम्मेदारी तय की जाएगी।

न्यायालय के आदेश अनुसार होगा अंतिम निर्णय : सचिव
मीरी पीरी ट्रस्ट के सचिव सुखमिंदर सिंह ने कहा कि संस्थान से जुड़ा मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है। अंतिम निर्णय न्यायालय के आदेश के अनुसार ही होगा। 12 मई को आए फैसले के बाद हरियाणा कमेटी स्थान का कार्यभार संभालने के लिए आगे नहीं आई। इस दौरान मीरी पीरी ट्रस्ट ने ही संस्थान का संचालन जारी रखा। उन्होंने दावा किया कि सहयोगी संस्था एसजीपीसी की ओर से संस्थान के विकास और संचालन के लिए अब तक डेढ़ सौ करोड़ रुपये से अधिक की राशि उपलब्ध कराई जा चुकी है। उन्होंने आगे कहा कि यदि न्यायालय का अंतिम फैसला मीरी पीरी ट्रस्ट के पक्ष में आता है, तो ट्रस्ट पहले की तरह संस्थान का सुचारु संचालन करेगा तथा डॉक्टरों और कर्मचारियों को समय पर वेतन सहित सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

न्यायिक आयोग में सुनवाई तीन को
लंबित वेतन मामले की हरियाणा सिख गुरुद्वारा न्यायिक आयोग में सुनवाई तीन अगस्त को है, जिस पर हर किसी की निगाहें टिकी है। वहीं एचएसजीएमसी के सदस्य अधिवक्ता गुरतेज सिंह का कहना है कि अब कमेटी नया ट्रस्ट बना रही है, जिसके बाद जल्द कर्मचारियों को वेतन दिया जाएगा। एचएसजीएमसी का हर सदस्य संस्थान को चलाने के पक्ष में है ।


इस तरह लगाए गए नोटिस में आरोप
एचएसजीएमसी को अधिवक्ता लवकेश मेहता के माध्यम से छह पेज के भेजे नोटिस में कहा गया है कि मीरी-पीरी इंस्टीट्यूट एक स्वतंत्र एवं स्वायत्त सार्वजनिक चैरिटेबल ट्रस्ट है। मेडिकल बोर्ड गठन संबंधी चार सितंबर 2024 के पत्र पर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 27 जुलाई को अंतरिम रोक लगा दी है और यह आदेश सभी पक्षों पर बाध्यकारी है। इसके बावजूद एचएसजीएमसी पदाधिकारियों द्वारा कर्मचारियों और आमजन में भ्रम फैलाने, ट्रस्ट अधिकारियों पर प्रशासनिक नियंत्रण व रिकॉर्ड सौंपने का दबाव बनाने तथा 28 जुलाई को संस्थान में पहुंचकर हस्तक्षेप करने का प्रयास करने का आरोप लगाया गया है। ट्रस्ट ने नोटिस में तत्काल हस्तक्षेप बंद करने और हाईकोर्ट के आदेश का पालन करने की चेतावनी देते हुए उल्लंघन की स्थिति में अवमानना, आपराधिक कार्रवाई और हर्जाने की कानूनी कार्रवाई की बात कही है।
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