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विज्ञान सम्मेलन : नवाचार, जिज्ञासा और रचनात्मकता ने दिखाया भविष्य का मार्ग
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कुरुक्षेत्र। विज्ञान प्रदर्शनी का अवलोकन करते विद्यार्थी। संवाद
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कुरुक्षेत्र। विज्ञान और प्रौद्योगिकी के माध्यम से जीवन को सशक्त बनाने और सतत भविष्य की दिशा में नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में दो दिवसीय विज्ञान सम्मेलन-2026 का आयोजन किया गया। यह सम्मेलन विज्ञान और प्रौद्योगिकी के साथ जीवन को सशक्त बनाना : एक स्थायी भविष्य की ओर क्वांटम छलांग विषय पर आयोजित किया गया। इस सम्मेलन का उद्घाटन श्रीमद्भगवद्गीता सदन (ऑडिटोरियम हॉल) में कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा की अध्यक्षता में हुआ।
यह सम्मेलन केयू एवं हरियाणा राज्य विज्ञान, नवाचार और प्रौद्योगिकी परिषद, हरियाणा सरकार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। क्रश हॉल में विभिन्न स्कूलों से आए विद्यार्थियों ने पोस्टर और मॉडल प्रदर्शनी के माध्यम से जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, सिंचाई, घर की सुरक्षा, मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने, सोलर सिस्टम, सुरक्षित यातायात और स्ट्रीट लाइट जैसे विषयों पर नवाचारी समाधान प्रस्तुत किए। विद्यार्थियों की रचनात्मकता और वैज्ञानिक सोच ने आधुनिक विज्ञान की उपयोगिता को प्रभावी ढंग से रेखांकित किया।
मुख्यातिथि चौधरी बंसी लाल विश्वविद्यालय भिवानी की कुलपति प्रो. दीप्ति धर्माणी ने कहा कि समस्याओं के समाधान के लिए चेतना का जागृत होना आवश्यक है। प्रश्न पूछने की जिज्ञासा ही ज्ञान और समृद्धि की ओर ले जाती है जिसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में विशेष स्थान दिया गया है। उन्होंने सतत विकास के लिए पारिस्थितिकी सेवाओं को बनाए रखने की रणनीतियों पर भी प्रकाश डाला।
डीन साइंसेज प्रो. विनोद कुमार ने कहा कि यह सम्मेलन युवा पीढ़ी को मूलभूत विज्ञानों के अनुप्रयोग के माध्यम से समाज हित में कॅरिअर बनाने की दिशा देगा।
संगोष्ठी के संयोजक प्रो. जीपी दुबे ने बताया कि प्रदेशभर के विद्यालयों व महाविद्यालयों से करीब 2500 विद्यार्थी इसमें भाग ले रहे हैं। यह मंच विद्यार्थियों को प्रख्यात वैज्ञानिकों से संवाद का अवसर प्रदान करता है। दोपहर बाद के सत्र में डॉ. जसविंदर सिंह, शिक्षा रत्न, पटियाला ने विज्ञान इन एक्शन के तहत लाइव विज्ञान प्रयोग प्रस्तुत किए, जिन्होंने विद्यार्थियों को अत्यंत प्रभावित किया। इस मौके पर प्रो. राकेश कुमार, प्रो. संजीव अग्रवाल, प्रो. जसबीर सिंह, प्रो. एसपी सिंह, प्रो. एनके माटा, प्रो. सुमन ढांडा, प्रो. संजीव अरोड़ा, आयोजन सचिव डॉ. संगीता सैनी सहित अन्य शिक्षक और विद्यार्थी मौजूद रहे।
चुनौतियों का समाधान नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से खोजने की आवश्यकता
कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि जिज्ञासा, तार्किक सोच और रचनात्मकता ही सफल विज्ञान की बुनियाद हैं। इनके बिना न तो विज्ञान आगे बढ़ सकता है और न ही नई खोजें संभव हैं। विज्ञान ने मानव जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाया है और महान वैज्ञानिकों के प्रश्नों से ही बड़े आविष्कार जन्म लेते हैं। भारतीय वैज्ञानिकों के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि सीवी रमन 1930 में नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले एशिया के सबसे युवा वैज्ञानिक थे। वहीं डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने देश के पहले सैटेलाइट लॉन्च में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आज भारत वैश्विक नेतृत्व की ओर अग्रसर है और युवा वैज्ञानिकों को जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण व खाद्य सुरक्षा जैसी चुनौतियों का समाधान नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से खोजने की आवश्यकता है। यह संगोष्ठी आत्मनिर्भर भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप है जिसमें स्वदेशी तकनीकों के विकास में युवाओं की अहम भूमिका है।
विज्ञान को समाजोपयोगी तकनीकों में रूपांतरित करें युवा
मुख्य वक्ता भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान मोहाली के प्रो. अरविंद ने कहा कि विज्ञान जीवन से सीधे जुड़ा ज्ञान है जिसके बिना आधुनिक जीवन की कल्पना संभव नहीं। उन्होंने क्वांटम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का उद्भव : 100 वर्षों की यात्रा विषय पर विचार साझा किए और कहा कि क्वांटम विज्ञान ने चिकित्सा, संचार, कंप्यूटिंग और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं। युवाओं से आह्वान किया कि वे मूलभूत विज्ञान को समझकर उसे समाजोपयोगी तकनीकों में रूपांतरित करें, ताकि भारत वैश्विक वैज्ञानिक नेतृत्व में अग्रणी बन सके।
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यह सम्मेलन केयू एवं हरियाणा राज्य विज्ञान, नवाचार और प्रौद्योगिकी परिषद, हरियाणा सरकार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। क्रश हॉल में विभिन्न स्कूलों से आए विद्यार्थियों ने पोस्टर और मॉडल प्रदर्शनी के माध्यम से जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, सिंचाई, घर की सुरक्षा, मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने, सोलर सिस्टम, सुरक्षित यातायात और स्ट्रीट लाइट जैसे विषयों पर नवाचारी समाधान प्रस्तुत किए। विद्यार्थियों की रचनात्मकता और वैज्ञानिक सोच ने आधुनिक विज्ञान की उपयोगिता को प्रभावी ढंग से रेखांकित किया।
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मुख्यातिथि चौधरी बंसी लाल विश्वविद्यालय भिवानी की कुलपति प्रो. दीप्ति धर्माणी ने कहा कि समस्याओं के समाधान के लिए चेतना का जागृत होना आवश्यक है। प्रश्न पूछने की जिज्ञासा ही ज्ञान और समृद्धि की ओर ले जाती है जिसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में विशेष स्थान दिया गया है। उन्होंने सतत विकास के लिए पारिस्थितिकी सेवाओं को बनाए रखने की रणनीतियों पर भी प्रकाश डाला।
डीन साइंसेज प्रो. विनोद कुमार ने कहा कि यह सम्मेलन युवा पीढ़ी को मूलभूत विज्ञानों के अनुप्रयोग के माध्यम से समाज हित में कॅरिअर बनाने की दिशा देगा।
संगोष्ठी के संयोजक प्रो. जीपी दुबे ने बताया कि प्रदेशभर के विद्यालयों व महाविद्यालयों से करीब 2500 विद्यार्थी इसमें भाग ले रहे हैं। यह मंच विद्यार्थियों को प्रख्यात वैज्ञानिकों से संवाद का अवसर प्रदान करता है। दोपहर बाद के सत्र में डॉ. जसविंदर सिंह, शिक्षा रत्न, पटियाला ने विज्ञान इन एक्शन के तहत लाइव विज्ञान प्रयोग प्रस्तुत किए, जिन्होंने विद्यार्थियों को अत्यंत प्रभावित किया। इस मौके पर प्रो. राकेश कुमार, प्रो. संजीव अग्रवाल, प्रो. जसबीर सिंह, प्रो. एसपी सिंह, प्रो. एनके माटा, प्रो. सुमन ढांडा, प्रो. संजीव अरोड़ा, आयोजन सचिव डॉ. संगीता सैनी सहित अन्य शिक्षक और विद्यार्थी मौजूद रहे।
चुनौतियों का समाधान नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से खोजने की आवश्यकता
कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि जिज्ञासा, तार्किक सोच और रचनात्मकता ही सफल विज्ञान की बुनियाद हैं। इनके बिना न तो विज्ञान आगे बढ़ सकता है और न ही नई खोजें संभव हैं। विज्ञान ने मानव जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाया है और महान वैज्ञानिकों के प्रश्नों से ही बड़े आविष्कार जन्म लेते हैं। भारतीय वैज्ञानिकों के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि सीवी रमन 1930 में नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले एशिया के सबसे युवा वैज्ञानिक थे। वहीं डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने देश के पहले सैटेलाइट लॉन्च में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आज भारत वैश्विक नेतृत्व की ओर अग्रसर है और युवा वैज्ञानिकों को जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण व खाद्य सुरक्षा जैसी चुनौतियों का समाधान नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से खोजने की आवश्यकता है। यह संगोष्ठी आत्मनिर्भर भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप है जिसमें स्वदेशी तकनीकों के विकास में युवाओं की अहम भूमिका है।
विज्ञान को समाजोपयोगी तकनीकों में रूपांतरित करें युवा
मुख्य वक्ता भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान मोहाली के प्रो. अरविंद ने कहा कि विज्ञान जीवन से सीधे जुड़ा ज्ञान है जिसके बिना आधुनिक जीवन की कल्पना संभव नहीं। उन्होंने क्वांटम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का उद्भव : 100 वर्षों की यात्रा विषय पर विचार साझा किए और कहा कि क्वांटम विज्ञान ने चिकित्सा, संचार, कंप्यूटिंग और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं। युवाओं से आह्वान किया कि वे मूलभूत विज्ञान को समझकर उसे समाजोपयोगी तकनीकों में रूपांतरित करें, ताकि भारत वैश्विक वैज्ञानिक नेतृत्व में अग्रणी बन सके।

कुरुक्षेत्र। विज्ञान प्रदर्शनी का अवलोकन करते विद्यार्थी। संवाद