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Kurukshetra News: मीरी-पीरी मेडिकल संस्थान प्रबंधन के लिए एसजीपीसी और एचएसजीएमसी आमने-सामने, दोनों ने ठोका अपना-अपना दावा
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शाहाबाद। मीरी पीरीमेडिकल संस्थान में पहुंचे एसजीपीसी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी। संवा
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कुरुक्षेत्र/शाहाबाद। मीरी-पीरी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च सेंटर के संचालन के लिए चल रहा विवाद शनिवार को और गहरा गया। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) और हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी एक ही दिन आमने-सामने आ गईं। दोनों संस्थाओं के शीर्ष पदाधिकारी मेडिकल संस्थान पहुंचे। उन्होंने संस्थान के प्रबंधन पर अपना-अपना दावा ठोका। इस घटना से लंबे समय से चला आ रहा यह विवाद सुलझने की बजाय और गहरा गया है। अब सभी की निगाहें पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी हैं। यह मामला वर्तमान में हाईकोर्ट में विचाराधीन है। संस्थान के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
सुबह करीब 8:30 बजे ही एसजीपीसी प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी अपने समर्थकों के साथ संस्थान में पहुंच गए और करीब डेढ़ घंटा रहे। उनके जाने के बाद एचएसजीएमसी प्रधान जगदीश सिंह झींडा, वरिष्ठ मीत प्रधान गुरमीत सिंह रामसर और कार्यकारी कमेटी के सदस्य संस्थान पहुंच गए। दोनों ने संस्थान के प्रबंधन के अधिकार को लेकर एक-दूसरे के दावे को चुनौती दी। धामी के साथ ट्रस्ट के वाइस चेयरमैन रघुजीत सिंह विर्क, बलदेव सिंह केमपुर, अमरजीत सिंह मांगी, अकाली दल बादल के प्रदेश प्रधान हरकेश मोहड़ी, पूर्व एचएसजीएमसी के सदस्य गुरमीत सिंह तलाकौर सहित एसजीपीसी, अकाली दल बादल के सदस्य और समर्थक भी रहे वहीं झींडा के साथ वरिष्ठ मीत प्रधान गुरमीत सिंह रामसर, सदस्य बीबी करतार कौर, राजिंदर सिंह बराड़ा, भूपिंदर सिंह लाडी, बेअंत सिंह नलवी, बलविंदर सिंह चीमा सहित अन्य सदस्य भी पहुंचे।
हाईकोर्ट के अंतिम फैसले तक एसजीपीसी ही संभालेगी संस्थान की जिम्मेदारी: धामी
एसजीपीसी प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि हाईकोर्ट का अंतिम फैसला आने तक संस्थान की जिम्मेदारी एसजीपीसी ही संभालेगी। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में यह बात कही। धामी ने बताया कि एसजीपीसी ने न्यायालय के आदेशों का सम्मान किया है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद एसजीपीसी ने डबल बेंच पर अपील दायर की थी, जिससे स्टे मिल गया। अब मामला न्यायालय में विचाराधीन है। उन्होंने कहा कि सभी पक्षों को अंतिम निर्णय का इंतजार करना चाहिए। कर्मचारियों के वेतन पर धामी ने बताया कि 1.40 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी हो चुकी है, शेष बकाया भी जल्द मिलेगा। उन्होंने जोर दिया कि मीरी-पीरी संस्थान का ट्रस्ट अभी भी है और एसजीपीसी प्रधान ही इसके अध्यक्ष हैं। जब मामला अदालत में है, तो किसी को एकतरफा अधिकार नहीं जताना चाहिए।
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27 जुलाई को मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में टेकओवर किया जा चुका संस्थान : झींडा
एचएसजीएमसी के प्रधान जगदीश सिंह झींडा ने संस्थान पहुंचने के बाद कहा कि एचएसजीएमसी 27 जुलाई को ही ड्यूटी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में संस्थान को टेकओवर कर चुकी है। हाईकोर्ट की ओर से दिया गया स्टे एचएसजीएमसी के टेकओवर या संस्थान के नियंत्रण पर नहीं, बल्कि डॉक्टरों की ओर से गठित बोर्ड पर था। यह बोर्ड एचएसजीएमसी ने बनाया था और स्टे के बाद उसे हटाया जा चुका है, इसलिए उनके अनुसार हाईकोर्ट के स्टे का संस्थान के टेकओवर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। उन्होंने कहा कि यदि आगे कोई कानूनी अड़चन आती है तो एचएसजीएमसी अपने वकीलों से सलाह लेकर कार्रवाई करेगी। अब संस्थान में एसजीपीसी का कोई दखल नहीं है।
बड़े भाई का फर्ज निभाए एसजीपीसी, खुद सौंपें संस्थान
झींडा ने कहा कि मीरी-पीरी इंस्टीट्यूट गुरुद्वारा साहिब की जमीन पर बना है और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हरियाणा के अधिकार को लेकर स्थिति स्पष्ट हो चुकी है। अब कानूनी तौर पर संस्थान के प्रबंधन का अधिकार एचएसजीएमसी के पास है। एसजीपीसी बड़ा भाई होने का फर्ज निभाए और संस्थान से संबंधित पूरा रिकॉर्ड एचएसजीएमसी को सौंपे। झींडा ने कहा कि एचएसजीएमसी संस्थान चलाने में सक्षम है और कमेटी के पास करीब 100 करोड़ की राशि उपलब्ध है।
पे-बिल तैयार न करने पर ही अटका वेतन
एचएसजीएमसी के वरिष्ठ मीत प्रधान गुरमीत सिंह रामसर ने कहा कि 27 जुलाई को संस्थान का कार्यभार संभालने के बाद संस्थान सीईओ को ई-मेल के माध्यम से कर्मचारियों और चिकित्सकों की सैलरी का पे-बिल तैयार करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद पे-बिल तैयार नहीं किया गया। सीईओ की ओर से कोर्ट में स्टे होने का हवाला दिया गया। इसी के चलते सीईओ को नोटिस जारी किया गया है और मामले की आगे जांच भी कराई जाएगी।
भारी पुलिस बल रहा तैनात
स्थिति तनावपूर्ण होने की आशंका के चलते डीएसपी हेडक्वार्टर गुरविंदर सिंह, डीएसपी शाहाबाद सिद्धार्थ, थाना प्रभारी जगदीश टामक और ड्यूटी मजिस्ट्रेट तहसीलदार नवनीत के नेतृत्व में भारी पुलिस बल तैनात रहा।
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सुबह करीब 8:30 बजे ही एसजीपीसी प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी अपने समर्थकों के साथ संस्थान में पहुंच गए और करीब डेढ़ घंटा रहे। उनके जाने के बाद एचएसजीएमसी प्रधान जगदीश सिंह झींडा, वरिष्ठ मीत प्रधान गुरमीत सिंह रामसर और कार्यकारी कमेटी के सदस्य संस्थान पहुंच गए। दोनों ने संस्थान के प्रबंधन के अधिकार को लेकर एक-दूसरे के दावे को चुनौती दी। धामी के साथ ट्रस्ट के वाइस चेयरमैन रघुजीत सिंह विर्क, बलदेव सिंह केमपुर, अमरजीत सिंह मांगी, अकाली दल बादल के प्रदेश प्रधान हरकेश मोहड़ी, पूर्व एचएसजीएमसी के सदस्य गुरमीत सिंह तलाकौर सहित एसजीपीसी, अकाली दल बादल के सदस्य और समर्थक भी रहे वहीं झींडा के साथ वरिष्ठ मीत प्रधान गुरमीत सिंह रामसर, सदस्य बीबी करतार कौर, राजिंदर सिंह बराड़ा, भूपिंदर सिंह लाडी, बेअंत सिंह नलवी, बलविंदर सिंह चीमा सहित अन्य सदस्य भी पहुंचे।
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हाईकोर्ट के अंतिम फैसले तक एसजीपीसी ही संभालेगी संस्थान की जिम्मेदारी: धामी
एसजीपीसी प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि हाईकोर्ट का अंतिम फैसला आने तक संस्थान की जिम्मेदारी एसजीपीसी ही संभालेगी। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में यह बात कही। धामी ने बताया कि एसजीपीसी ने न्यायालय के आदेशों का सम्मान किया है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद एसजीपीसी ने डबल बेंच पर अपील दायर की थी, जिससे स्टे मिल गया। अब मामला न्यायालय में विचाराधीन है। उन्होंने कहा कि सभी पक्षों को अंतिम निर्णय का इंतजार करना चाहिए। कर्मचारियों के वेतन पर धामी ने बताया कि 1.40 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी हो चुकी है, शेष बकाया भी जल्द मिलेगा। उन्होंने जोर दिया कि मीरी-पीरी संस्थान का ट्रस्ट अभी भी है और एसजीपीसी प्रधान ही इसके अध्यक्ष हैं। जब मामला अदालत में है, तो किसी को एकतरफा अधिकार नहीं जताना चाहिए।
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27 जुलाई को मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में टेकओवर किया जा चुका संस्थान : झींडा
एचएसजीएमसी के प्रधान जगदीश सिंह झींडा ने संस्थान पहुंचने के बाद कहा कि एचएसजीएमसी 27 जुलाई को ही ड्यूटी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में संस्थान को टेकओवर कर चुकी है। हाईकोर्ट की ओर से दिया गया स्टे एचएसजीएमसी के टेकओवर या संस्थान के नियंत्रण पर नहीं, बल्कि डॉक्टरों की ओर से गठित बोर्ड पर था। यह बोर्ड एचएसजीएमसी ने बनाया था और स्टे के बाद उसे हटाया जा चुका है, इसलिए उनके अनुसार हाईकोर्ट के स्टे का संस्थान के टेकओवर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। उन्होंने कहा कि यदि आगे कोई कानूनी अड़चन आती है तो एचएसजीएमसी अपने वकीलों से सलाह लेकर कार्रवाई करेगी। अब संस्थान में एसजीपीसी का कोई दखल नहीं है।
बड़े भाई का फर्ज निभाए एसजीपीसी, खुद सौंपें संस्थान
झींडा ने कहा कि मीरी-पीरी इंस्टीट्यूट गुरुद्वारा साहिब की जमीन पर बना है और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हरियाणा के अधिकार को लेकर स्थिति स्पष्ट हो चुकी है। अब कानूनी तौर पर संस्थान के प्रबंधन का अधिकार एचएसजीएमसी के पास है। एसजीपीसी बड़ा भाई होने का फर्ज निभाए और संस्थान से संबंधित पूरा रिकॉर्ड एचएसजीएमसी को सौंपे। झींडा ने कहा कि एचएसजीएमसी संस्थान चलाने में सक्षम है और कमेटी के पास करीब 100 करोड़ की राशि उपलब्ध है।
पे-बिल तैयार न करने पर ही अटका वेतन
एचएसजीएमसी के वरिष्ठ मीत प्रधान गुरमीत सिंह रामसर ने कहा कि 27 जुलाई को संस्थान का कार्यभार संभालने के बाद संस्थान सीईओ को ई-मेल के माध्यम से कर्मचारियों और चिकित्सकों की सैलरी का पे-बिल तैयार करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद पे-बिल तैयार नहीं किया गया। सीईओ की ओर से कोर्ट में स्टे होने का हवाला दिया गया। इसी के चलते सीईओ को नोटिस जारी किया गया है और मामले की आगे जांच भी कराई जाएगी।
भारी पुलिस बल रहा तैनात
स्थिति तनावपूर्ण होने की आशंका के चलते डीएसपी हेडक्वार्टर गुरविंदर सिंह, डीएसपी शाहाबाद सिद्धार्थ, थाना प्रभारी जगदीश टामक और ड्यूटी मजिस्ट्रेट तहसीलदार नवनीत के नेतृत्व में भारी पुलिस बल तैनात रहा।

शाहाबाद। मीरी पीरीमेडिकल संस्थान में पहुंचे एसजीपीसी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी। संवा

शाहाबाद। मीरी पीरीमेडिकल संस्थान में पहुंचे एसजीपीसी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी। संवा