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Mahendragarh-Narnaul News: रफ्तार रोकने चले थे, जानें ले बैठे ब्रेकर
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फोटो नंबर- 15कुलताजपुर मोड पर बना ऊंचा ब्रेकर और जेब्रा क्रॉसिंग नदारद। संवाद
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नारनौल। शहर और आसपास के इलाकों में लोगों की सुरक्षा के लिए बनाए गए स्पीड ब्रेकर अब उल्टा खतरा बनते जा रहे हैं। जिन ब्रेकरों का मकसद सड़क हादसे रोकना था, वही अब कई जगह दुर्घटनाओं की वजह बन रहे हैं।
एनएच-148 बी, रेवाड़ी रोड बाइपास, निजामपुर रोड और महेंद्रगढ़ रोड जैसे मुख्य मार्गों पर जगह-जगह ऊंचे ब्रेकर बनाए गए हैं लेकिन इन जगहों पर न तो कोई चेतावनी बोर्ड लगाया गया है और न ही ब्रेकर पर सफेद-काली धारियां बनाई गई हैं।
ऐसे में रात के समय वाहन चालकों को ये ब्रेकर नजर नहीं आते और तेज रफ्तार में वाहन अचानक उछल जाते हैं जिससे हादसे हो रहे हैं। यहां कई बार गंभीर दुर्घटनाएं भी हुई हैं और लोगों को अपनी जान से भी हाथ धोना पड़ा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नियमों की पूरी तरह अनदेखी की गई है।
नियमों के मुताबिक, ब्रेकर से 120 से 150 मीटर पहले चेतावनी संकेत होना जरूरी है। साथ ही ब्रेकर की ऊंचाई 10 से 12 सेंटीमीटर होनी चाहिए लेकिन शहर में कई जगह यह 20 से 25 सेंटीमीटर तक पाए गए हैं।
लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इन ब्रेकरों को नियमों के अनुसार सही किया जाए ताकि सड़क हादसों पर रोक लग सके और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
इन ब्रेकरों पर हुए हादसे
केस 1
कुछ समय पहले मेरे दोस्त की रात में कुलताजपुर मोड़ पर ऊंचे ब्रेकर से बाइक टकराई, गंभीर घायल होकर अस्पताल पहुंचने से पहले उसकी मौत हो गई। सुविधा के नाम पर बनाए गए ऐसे ब्रेकर लोगों की जान ले रहे हैं।-जसपाल सिंह, गणेश मार्केट
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केस 2
नीरपुर चौक के पास बने ब्रेकर से टकराकर उनके दोस्त की बाइक अनियंत्रित हो गई थी। हादसे में उसे गंभीर चोटें आईं और लंबे समय तक इलाज कराना पड़ा जिससे आर्थिक परेशानी भी झेलनी पड़ी।-रामफल, ईश्वर कॉलोनी
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परेशानी, लोगों की जुबानी
बॉक्स
क्षेत्र में कई स्थानों पर मानकों के विपरीत ब्रेकर बनाए गए हैं। अधिकांश जगहों पर न तो जेब्रा क्रॉसिंग है और न ही चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं। इससे रात के समय हादसों का खतरा बढ़ जाता है।-राजकुमार, गांव बसीरपुर
बॉक्स
कुलताजपुर रोड पर मेरी दुकान के सामने बने ब्रेकर के कारण आए दिन हादसे होते हैं। कई बार शिकायत करने के बावजूद अभी तक कोई समाधान नहीं हुआ।-रतनलाल, कुलताजपुर रोड
वर्जन:
मानकों से अधिक ऊंचे बने ब्रेकरों की सूची तैयार की जा रही है। जांच में कमी मिलने पर उन्हें जल्द दुरुस्त कराया जाएगा ताकि लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।-जितेंद्र कुमार, एसडीओ, पीडब्ल्यूडी, नारनौल
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एनएच-148 बी, रेवाड़ी रोड बाइपास, निजामपुर रोड और महेंद्रगढ़ रोड जैसे मुख्य मार्गों पर जगह-जगह ऊंचे ब्रेकर बनाए गए हैं लेकिन इन जगहों पर न तो कोई चेतावनी बोर्ड लगाया गया है और न ही ब्रेकर पर सफेद-काली धारियां बनाई गई हैं।
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ऐसे में रात के समय वाहन चालकों को ये ब्रेकर नजर नहीं आते और तेज रफ्तार में वाहन अचानक उछल जाते हैं जिससे हादसे हो रहे हैं। यहां कई बार गंभीर दुर्घटनाएं भी हुई हैं और लोगों को अपनी जान से भी हाथ धोना पड़ा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नियमों की पूरी तरह अनदेखी की गई है।
नियमों के मुताबिक, ब्रेकर से 120 से 150 मीटर पहले चेतावनी संकेत होना जरूरी है। साथ ही ब्रेकर की ऊंचाई 10 से 12 सेंटीमीटर होनी चाहिए लेकिन शहर में कई जगह यह 20 से 25 सेंटीमीटर तक पाए गए हैं।
लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इन ब्रेकरों को नियमों के अनुसार सही किया जाए ताकि सड़क हादसों पर रोक लग सके और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
इन ब्रेकरों पर हुए हादसे
केस 1
कुछ समय पहले मेरे दोस्त की रात में कुलताजपुर मोड़ पर ऊंचे ब्रेकर से बाइक टकराई, गंभीर घायल होकर अस्पताल पहुंचने से पहले उसकी मौत हो गई। सुविधा के नाम पर बनाए गए ऐसे ब्रेकर लोगों की जान ले रहे हैं।-जसपाल सिंह, गणेश मार्केट
केस 2
नीरपुर चौक के पास बने ब्रेकर से टकराकर उनके दोस्त की बाइक अनियंत्रित हो गई थी। हादसे में उसे गंभीर चोटें आईं और लंबे समय तक इलाज कराना पड़ा जिससे आर्थिक परेशानी भी झेलनी पड़ी।-रामफल, ईश्वर कॉलोनी
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परेशानी, लोगों की जुबानी
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क्षेत्र में कई स्थानों पर मानकों के विपरीत ब्रेकर बनाए गए हैं। अधिकांश जगहों पर न तो जेब्रा क्रॉसिंग है और न ही चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं। इससे रात के समय हादसों का खतरा बढ़ जाता है।-राजकुमार, गांव बसीरपुर
बॉक्स
कुलताजपुर रोड पर मेरी दुकान के सामने बने ब्रेकर के कारण आए दिन हादसे होते हैं। कई बार शिकायत करने के बावजूद अभी तक कोई समाधान नहीं हुआ।-रतनलाल, कुलताजपुर रोड
वर्जन:
मानकों से अधिक ऊंचे बने ब्रेकरों की सूची तैयार की जा रही है। जांच में कमी मिलने पर उन्हें जल्द दुरुस्त कराया जाएगा ताकि लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।-जितेंद्र कुमार, एसडीओ, पीडब्ल्यूडी, नारनौल