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Mahendragarh-Narnaul News: 12 साल से घर में औषधीय व फूलों के पौधे सजा रहीं शिक्षिका आशीमा
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12जेएनडी23: आशीमा सांगवान घर में लगाए गए पौधों की देखभाल करते हुए। संवाद
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जींद।
प्रकृति के प्रति प्रेम और समर्पण का अनोखा उदाहरण पेश कर रहीं अर्बन इस्टेट निवासी शिक्षिका आशीमा सांगवान पिछले 12 वर्षों से अपने घर को हरियाली और सुगंध से महका रही हैं। उन्होंने अपने घर में करीब 50 प्रकार के औषधीय व फूलों के पौधे लगाए हुए हैं जिनकी देखभाल वह स्वयं करती हैं।
निजी स्कूल में ड्यूटी पूरी करने के बाद आशीमा सांगवान का अधिकांश समय पौधों के बीच ही बीतता है। वह न केवल इन पौधों को संवारती हैं बल्कि इनके औषधीय गुणों का उपयोग प्राकृतिक चिकित्सा में भी करती हैं। तुलसी, एलोवेरा, गिलोय जैसे पौधों का प्रयोग कर वह छोटे-मोटे रोगों का घरेलू इलाज करती हैं। इससे परिवार को भी स्वास्थ्य लाभ मिल रहा है।
आशीमा सांगवान का मानना है कि प्रकृति के करीब रहकर न केवल मानसिक शांति मिलती है बल्कि स्वास्थ्य भी बेहतर रहता है। यही सोच वह अपने विद्यार्थियों में भी विकसित कर रही हैं। स्कूल में बच्चों को पर्यावरण संरक्षण और पौधारोपण के प्रति जागरूक करते हुए वह उन्हें पेड़-पौधों के महत्व के बारे में समझाती हैं।
उनके घर का हर कोना रंग-बिरंगे फूलों और हरे-भरे पौधों से सजा हुआ है जो न केवल सुंदरता बढ़ाते हैं बल्कि सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करते हैं। आसपास के लोग भी उनके इस प्रयास की सराहना करते हैं और उनसे प्रेरणा लेकर अपने घरों में पौधे लगाने लगे हैं।
आशीमा सांगवान का यह प्रयास पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक मजबूत कदम है। यह संदेश भी देता है कि यदि हर व्यक्ति प्रकृति से जुड़ाव बढ़ाए तो आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और हरित वातावरण सुनिश्चित किया जा सकता है।
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प्रकृति के प्रति प्रेम और समर्पण का अनोखा उदाहरण पेश कर रहीं अर्बन इस्टेट निवासी शिक्षिका आशीमा सांगवान पिछले 12 वर्षों से अपने घर को हरियाली और सुगंध से महका रही हैं। उन्होंने अपने घर में करीब 50 प्रकार के औषधीय व फूलों के पौधे लगाए हुए हैं जिनकी देखभाल वह स्वयं करती हैं।
निजी स्कूल में ड्यूटी पूरी करने के बाद आशीमा सांगवान का अधिकांश समय पौधों के बीच ही बीतता है। वह न केवल इन पौधों को संवारती हैं बल्कि इनके औषधीय गुणों का उपयोग प्राकृतिक चिकित्सा में भी करती हैं। तुलसी, एलोवेरा, गिलोय जैसे पौधों का प्रयोग कर वह छोटे-मोटे रोगों का घरेलू इलाज करती हैं। इससे परिवार को भी स्वास्थ्य लाभ मिल रहा है।
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आशीमा सांगवान का मानना है कि प्रकृति के करीब रहकर न केवल मानसिक शांति मिलती है बल्कि स्वास्थ्य भी बेहतर रहता है। यही सोच वह अपने विद्यार्थियों में भी विकसित कर रही हैं। स्कूल में बच्चों को पर्यावरण संरक्षण और पौधारोपण के प्रति जागरूक करते हुए वह उन्हें पेड़-पौधों के महत्व के बारे में समझाती हैं।
उनके घर का हर कोना रंग-बिरंगे फूलों और हरे-भरे पौधों से सजा हुआ है जो न केवल सुंदरता बढ़ाते हैं बल्कि सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करते हैं। आसपास के लोग भी उनके इस प्रयास की सराहना करते हैं और उनसे प्रेरणा लेकर अपने घरों में पौधे लगाने लगे हैं।
आशीमा सांगवान का यह प्रयास पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक मजबूत कदम है। यह संदेश भी देता है कि यदि हर व्यक्ति प्रकृति से जुड़ाव बढ़ाए तो आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और हरित वातावरण सुनिश्चित किया जा सकता है।