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Mahendragarh-Narnaul News: ऑनलाइन ठगी के आरोपी दीपक की जमानत खारिज
Wed, 05 Aug 2026 12:18 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Wed, 05 Aug 2026 12:18 AM IST
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नारनौल। दस लाख की ऑनलाइन ठगी के मामले में अपर जिला न्यायाधीश हर्षाली चौधरी की अदालत ने आरोपी दीपक की जमानत याचिका खारिज कर दी है।
मामले में 13 सितंबर 2025 को साइबर थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। शहर निवासी निखिल को 4 सितंबर 2025 को कॉइन मैप समूह नामक टेलीग्राम समूह में जोड़ा गया। उनको एक टेलीग्राम पहचान से संदेश मिला कि कंपनी प्रचार कार्य के लिए 3 से 5 हजार रुपये का भुगतान करती है।
शिकायतकर्ता ने एक डेमो टास्क पर क्लिक किया और स्क्रीन की तस्वीर भेजी। इसके बाद उसे 200 रुपये का भुगतान मिला। 5 सितंबर को निखिल को वीक्स नामक वेबसाइट पर पंजीकरण करने को कहा गया। पंजीकरण के बाद उसे कार्य पूरे करने का निर्देश दिया गया। आरोपियों ने उसके खाते से 1,010 और 1,513 रुपये स्थानांतरित कर दिए।
निखिल ने रिसेप्शनिस्ट के निर्देशों पर आगे के कार्य किए। उसे 3,020 और 7,100 रुपये जमा करने को कहा गया, जो उसने ट्रांसफर कर दिए। जब उसने कुल राशि निकालने का प्रयास किया, तो उसे बताया गया कि उसका ऑनलाइन खाता अवरुद्ध हो गया है।
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उन्हें खाता खोलने के लिए 31,520 और 79,632 रुपये जमा करने को कहा गया। निखिल ने इन राशियों को भी ट्रांसफर कर दिया।
राशि न निकलने पर निखिल से 1,83,508 रुपये का शुल्क मांगा गया, जिसमें से उसने 36,701 रुपये जमा किए। 6 सितंबर को उसने विभिन्न यूपीआई पहचान पर कई हजार रुपये और भेजे, साथ ही प्रतिष्ठा अंक कम होने का बहाना बनाकर 2,97,460 रुपये भी मांगे गए।
10 सितंबर तक निखिल ने कुल 10,34,263 रुपये ट्रांसफर कर दिए थे। जब अतिरिक्त 6,36,336 रुपये मांगे गए, तब उसे ठगी का एहसास हुआ। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपी दीपक की जमानत याचिका खारिज कर दी, क्योंकि शिकायतकर्ता को 10 लाख रुपये से अधिक की ठगी का शिकार बनाया गया था और एक सह-आरोपी अभी फरार है।
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मामले में 13 सितंबर 2025 को साइबर थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। शहर निवासी निखिल को 4 सितंबर 2025 को कॉइन मैप समूह नामक टेलीग्राम समूह में जोड़ा गया। उनको एक टेलीग्राम पहचान से संदेश मिला कि कंपनी प्रचार कार्य के लिए 3 से 5 हजार रुपये का भुगतान करती है।
शिकायतकर्ता ने एक डेमो टास्क पर क्लिक किया और स्क्रीन की तस्वीर भेजी। इसके बाद उसे 200 रुपये का भुगतान मिला। 5 सितंबर को निखिल को वीक्स नामक वेबसाइट पर पंजीकरण करने को कहा गया। पंजीकरण के बाद उसे कार्य पूरे करने का निर्देश दिया गया। आरोपियों ने उसके खाते से 1,010 और 1,513 रुपये स्थानांतरित कर दिए।
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निखिल ने रिसेप्शनिस्ट के निर्देशों पर आगे के कार्य किए। उसे 3,020 और 7,100 रुपये जमा करने को कहा गया, जो उसने ट्रांसफर कर दिए। जब उसने कुल राशि निकालने का प्रयास किया, तो उसे बताया गया कि उसका ऑनलाइन खाता अवरुद्ध हो गया है।
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उन्हें खाता खोलने के लिए 31,520 और 79,632 रुपये जमा करने को कहा गया। निखिल ने इन राशियों को भी ट्रांसफर कर दिया।
राशि न निकलने पर निखिल से 1,83,508 रुपये का शुल्क मांगा गया, जिसमें से उसने 36,701 रुपये जमा किए। 6 सितंबर को उसने विभिन्न यूपीआई पहचान पर कई हजार रुपये और भेजे, साथ ही प्रतिष्ठा अंक कम होने का बहाना बनाकर 2,97,460 रुपये भी मांगे गए।
10 सितंबर तक निखिल ने कुल 10,34,263 रुपये ट्रांसफर कर दिए थे। जब अतिरिक्त 6,36,336 रुपये मांगे गए, तब उसे ठगी का एहसास हुआ। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपी दीपक की जमानत याचिका खारिज कर दी, क्योंकि शिकायतकर्ता को 10 लाख रुपये से अधिक की ठगी का शिकार बनाया गया था और एक सह-आरोपी अभी फरार है।