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Mahendragarh-Narnaul News: अब शहद पर भी मिलेगी भावांतर भरपाई योजना की सुरक्षा
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नारनौल। जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय नसीबपुर में शनिवार को मधुमक्खी पालकों के लिए एक सेमिनार का आयोजन किया गया। जिला उद्यान अधिकारी प्रेम कुमार यादव ने बताया कि सरकार ने शहद को भावांतर भरपाई योजना के दायरे में शामिल किया है जिससे हरियाणा ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य बाजार में कीमतों के गिरने पर मधुमक्खी पालकों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है। जिले में अब तक 54 मधुमक्खी पालकों ने इस योजना के तहत अपना पंजीकरण कराया है। सरकार ने शहद का आधार मूल्य 120 रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित किया है। यदि बाजार में थोक मूल्य इस सुरक्षित मूल्य से नीचे गिरता है, तो पंजीकृत किसान इस योजना के तहत प्रोत्साहन राशि प्राप्त करने के पात्र होंगे।
सेमिनार के दौरान पालकों को बताया गया कि योजना का लाभ लेने के लिए मधुक्रांति या राज्य पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य है। मधुमक्खी पालकों को अपने खर्च पर प्रत्येक बॉक्स पर परिवार पहचान पत्र के अंतिम 4 अंक और क्रम संख्या खुदवाना अनिवार्य किया गया है ताकि बक्सों की सही पहचान और ट्रेसबिलिटी सुनिश्चित की जा सके।
इन बक्सों का भौतिक सत्यापन जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय द्वारा किया जाएगा। योजना के तहत एक पालक अधिकतम 1000 बक्सों तक का लाभ ले सकता है और प्रति वर्ष अधिकतम 30,000 किलोग्राम शहद पर लाभ प्राप्त कर सकता है। व्यापार केंद्र पर बिक्री के लिए शहद को फूड ग्रेड बाल्टियों में लाना होगा, जिन पर किसान का विशेष मार्का और पंजीकरण आईडी होना आवश्यक है।
खरीददारों और विक्रेताओं के बीच सुरक्षित लेनदेन सुनिश्चित करने के लिए एस्को खाते का प्रावधान किया गया है। भुगतान सीधे विक्रेता के बैंक खाते में ट्रांसफर किया जाएगा।
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इस योजना का मुख्य उद्देश्य बाजार में कीमतों के गिरने पर मधुमक्खी पालकों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है। जिले में अब तक 54 मधुमक्खी पालकों ने इस योजना के तहत अपना पंजीकरण कराया है। सरकार ने शहद का आधार मूल्य 120 रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित किया है। यदि बाजार में थोक मूल्य इस सुरक्षित मूल्य से नीचे गिरता है, तो पंजीकृत किसान इस योजना के तहत प्रोत्साहन राशि प्राप्त करने के पात्र होंगे।
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सेमिनार के दौरान पालकों को बताया गया कि योजना का लाभ लेने के लिए मधुक्रांति या राज्य पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य है। मधुमक्खी पालकों को अपने खर्च पर प्रत्येक बॉक्स पर परिवार पहचान पत्र के अंतिम 4 अंक और क्रम संख्या खुदवाना अनिवार्य किया गया है ताकि बक्सों की सही पहचान और ट्रेसबिलिटी सुनिश्चित की जा सके।
इन बक्सों का भौतिक सत्यापन जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय द्वारा किया जाएगा। योजना के तहत एक पालक अधिकतम 1000 बक्सों तक का लाभ ले सकता है और प्रति वर्ष अधिकतम 30,000 किलोग्राम शहद पर लाभ प्राप्त कर सकता है। व्यापार केंद्र पर बिक्री के लिए शहद को फूड ग्रेड बाल्टियों में लाना होगा, जिन पर किसान का विशेष मार्का और पंजीकरण आईडी होना आवश्यक है।
खरीददारों और विक्रेताओं के बीच सुरक्षित लेनदेन सुनिश्चित करने के लिए एस्को खाते का प्रावधान किया गया है। भुगतान सीधे विक्रेता के बैंक खाते में ट्रांसफर किया जाएगा।
