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सामाजिक सुरक्षा आर्थिक अनिश्चितताओं से बचाने का माध्यम : डॉ. राशिद
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फोटो संख्या: 54
विचार-गोष्ठी में डॉ. मोहम्मद राशिद ने 1991 से 2019 तक के आंकड़ों पर आधारित अध्ययन प्रस्तुत किया
संवाद न्यूज एजेंसी
महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग की ओर से विचार-गोष्ठी हुई। इसमें गुरुग्राम स्थित आईआईएलएम के स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के अर्थशास्त्र विभाग के सहायक आचार्य डॉ. मोहम्मद राशिद ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा को केवल सरकारी कल्याणकारी योजनाओं पर होने वाले खर्च तक सीमित नहीं समझना चाहिए।
यह लोगों और परिवारों को आर्थिक व सामाजिक अनिश्चितताओं से बचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। बेरोजगारी, बीमारी, दिव्यांगता, मातृत्व और वृद्धावस्था जैसी परिस्थितियों में सामाजिक सुरक्षा की अहम भूमिका होती है।
उन्होंने सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020, मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा और आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक अधिकारों पर अंतरराष्ट्रीय अनुबंध का उल्लेख करते हुए इसे मानव गरिमा, सामाजिक न्याय और सम्मानजनक जीवन से जुड़ा बताया।
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डॉ. राशिद ने 1991 से 2019 तक के आंकड़ों पर आधारित अपने अध्ययन में सामाजिक सुरक्षा पर खर्च, आर्थिक विकास और मानव विकास के बीच संबंधों को समझाया। उन्होंने असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों, प्लेटफॉर्म आधारित कामगारों, युवाओं में बेरोजगारी और कल्याणकारी योजनाओं की वित्तीय स्थिरता से जुड़ी चुनौतियों पर भी चर्चा की।
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विचार-गोष्ठी में डॉ. मोहम्मद राशिद ने 1991 से 2019 तक के आंकड़ों पर आधारित अध्ययन प्रस्तुत किया
संवाद न्यूज एजेंसी
महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग की ओर से विचार-गोष्ठी हुई। इसमें गुरुग्राम स्थित आईआईएलएम के स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के अर्थशास्त्र विभाग के सहायक आचार्य डॉ. मोहम्मद राशिद ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा को केवल सरकारी कल्याणकारी योजनाओं पर होने वाले खर्च तक सीमित नहीं समझना चाहिए।
यह लोगों और परिवारों को आर्थिक व सामाजिक अनिश्चितताओं से बचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। बेरोजगारी, बीमारी, दिव्यांगता, मातृत्व और वृद्धावस्था जैसी परिस्थितियों में सामाजिक सुरक्षा की अहम भूमिका होती है।
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उन्होंने सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020, मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा और आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक अधिकारों पर अंतरराष्ट्रीय अनुबंध का उल्लेख करते हुए इसे मानव गरिमा, सामाजिक न्याय और सम्मानजनक जीवन से जुड़ा बताया।
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डॉ. राशिद ने 1991 से 2019 तक के आंकड़ों पर आधारित अपने अध्ययन में सामाजिक सुरक्षा पर खर्च, आर्थिक विकास और मानव विकास के बीच संबंधों को समझाया। उन्होंने असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों, प्लेटफॉर्म आधारित कामगारों, युवाओं में बेरोजगारी और कल्याणकारी योजनाओं की वित्तीय स्थिरता से जुड़ी चुनौतियों पर भी चर्चा की।