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Palwal News: प्रसूताओं के स्वास्थ्य से खिलवाड़, डिलीवरी के बाद दिया जा रहा बिस्कुट
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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नगीना।
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नगीना के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का मामला, सरकार देती है 100 रुपये, लेकिन की जा रही कटौती
संवाद न्यूज एजेंसी
नगीना। केंद्र सरकार की ओर से मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए संस्थागत डिलीवरी को प्रोत्साहित करने के लिए चलाई गई जननी शिशु सुरक्षा योजना में लापरवाही बरती जा रही है। नगीना प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में इससे जुड़े नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है। योजना के तहत प्रसूताओं को अस्पताल में मिलने वाली पौष्टिक डाइट में फर्जीवाड़ा सामने आया है। मरीजों का आरोप है कि सरकार की ओर से निर्धारित 100 रुपये की डाइट में से उन्हें कुछ भी नहीं दिया जाता।
योजना के तहत प्रसव के लिए आई महिलाओं को निशुल्क पौष्टिक व ताजा आहार उपलब्ध कराया जाना अनिवार्य है, लेकिन उन्हें केवल बिस्कुट और रस का पैकेट देकर उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
अधिकारियों को पता नहीं कब शुरू हुई डाइट
मामले की पड़ताल के दौरान जब अस्पताल की एक नर्स से बात की गई तो उसने बताया कि प्रसूताओं को केवल 20 रुपये का एक बिस्कुट और 30 रुपये के रस का पैकेट दिया जाता है। जब इस संबंध में चिकित्सा अधिकारी डॉ. तरुण से बात हुई तो उन्होंने कहा कि बजट न होने के कारण पहले कुछ नहीं दिया जा रहा था, लेकिन 9 जून से रस व बिस्कुट देना शुरू किया गया है।
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दूसरी ओर, एसएमओ कृष्ण कुमार ने भी पहले बजट न होने की बात कही, लेकिन बाद में यू-टर्न लेते हुए दावा किया कि पिछले डेढ़ महीने से डाइट दी जा रही है। उन्होंने सफाई दी कि 20-20 रुपये के दो बिस्कुट और 30-30 रुपये के रस के दो पैकेट देकर 100 रुपये पूरे किए जाते हैं।
बिना खाद्य सुरक्षा विभाग की मुहर और निर्माण तिथि के बंट रहा रस
जब इन रस (पापे) के पैकेटों की जांच की गई तो इन पर न तो खाद्य सुरक्षा विभाग की मुहर थी और न ही निर्माण तिथि दर्ज थी। स्थानीय सप्लायर अहसान ने बताया कि रस की एक थैली (16 पैकेट) लगभग 250 रुपये की आती है, यानी एक पैकेट की लागत मात्र 15-16 रुपये है। इस पर 30 रुपये एमआरपी छपी है। दुकानदारों के अनुसार यह बेहद घटिया क्वालिटी का माल है। सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि पैकेट पर छपे कंपनी के पते पर ऐसी कोई कंपनी वजूद में ही नहीं है। दुकानदारों का का कहना है कि सप्लायर स्थानीय मार्किट से सामान खरीद कर और उसपर अपना रैपर लगाकर अस्पताल में सप्लाई कर रहा है।
मरीजों के कोट
नगीना अस्पताल में लड़की पैदा हुई थी। हमें खाने-पीने की पूरी व्यवस्था अपने निजी पैसों से करनी पड़ी। अस्पताल से फूटी कौड़ी का सामान नहीं मिला। -अरशद, निवासी
16 मई को मेरे बच्चे का जन्म नगीना अस्पताल में हुआ था। प्रशासन की तरफ से हमें किसी भी प्रकार की डाइट या सहायता नहीं दी गई। -आकिब, निवासी
लगभग 5-6 दिन पहले हमारे घर बच्चा हुआ। डिलीवरी नगीना सरकारी अस्पताल में हुई, लेकिन खाने-पीने की कोई सामग्री नहीं मिली। -इस्माइल, निवासी
अधिकारी का बयान
सरकार की ओर से निर्धारित डाइट में अगर कोई स्वास्थ्य केंद्र या स्टाफ अनियमितताएं बरत रहा है तो यह गंभीर मामला है। इसकी पूरी जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. कृष्ण कुमार, एसएमओ
संवाद न्यूज एजेंसी
नगीना। केंद्र सरकार की ओर से मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए संस्थागत डिलीवरी को प्रोत्साहित करने के लिए चलाई गई जननी शिशु सुरक्षा योजना में लापरवाही बरती जा रही है। नगीना प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में इससे जुड़े नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है। योजना के तहत प्रसूताओं को अस्पताल में मिलने वाली पौष्टिक डाइट में फर्जीवाड़ा सामने आया है। मरीजों का आरोप है कि सरकार की ओर से निर्धारित 100 रुपये की डाइट में से उन्हें कुछ भी नहीं दिया जाता।
योजना के तहत प्रसव के लिए आई महिलाओं को निशुल्क पौष्टिक व ताजा आहार उपलब्ध कराया जाना अनिवार्य है, लेकिन उन्हें केवल बिस्कुट और रस का पैकेट देकर उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
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अधिकारियों को पता नहीं कब शुरू हुई डाइट
मामले की पड़ताल के दौरान जब अस्पताल की एक नर्स से बात की गई तो उसने बताया कि प्रसूताओं को केवल 20 रुपये का एक बिस्कुट और 30 रुपये के रस का पैकेट दिया जाता है। जब इस संबंध में चिकित्सा अधिकारी डॉ. तरुण से बात हुई तो उन्होंने कहा कि बजट न होने के कारण पहले कुछ नहीं दिया जा रहा था, लेकिन 9 जून से रस व बिस्कुट देना शुरू किया गया है।
दूसरी ओर, एसएमओ कृष्ण कुमार ने भी पहले बजट न होने की बात कही, लेकिन बाद में यू-टर्न लेते हुए दावा किया कि पिछले डेढ़ महीने से डाइट दी जा रही है। उन्होंने सफाई दी कि 20-20 रुपये के दो बिस्कुट और 30-30 रुपये के रस के दो पैकेट देकर 100 रुपये पूरे किए जाते हैं।
बिना खाद्य सुरक्षा विभाग की मुहर और निर्माण तिथि के बंट रहा रस
जब इन रस (पापे) के पैकेटों की जांच की गई तो इन पर न तो खाद्य सुरक्षा विभाग की मुहर थी और न ही निर्माण तिथि दर्ज थी। स्थानीय सप्लायर अहसान ने बताया कि रस की एक थैली (16 पैकेट) लगभग 250 रुपये की आती है, यानी एक पैकेट की लागत मात्र 15-16 रुपये है। इस पर 30 रुपये एमआरपी छपी है। दुकानदारों के अनुसार यह बेहद घटिया क्वालिटी का माल है। सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि पैकेट पर छपे कंपनी के पते पर ऐसी कोई कंपनी वजूद में ही नहीं है। दुकानदारों का का कहना है कि सप्लायर स्थानीय मार्किट से सामान खरीद कर और उसपर अपना रैपर लगाकर अस्पताल में सप्लाई कर रहा है।
मरीजों के कोट
नगीना अस्पताल में लड़की पैदा हुई थी। हमें खाने-पीने की पूरी व्यवस्था अपने निजी पैसों से करनी पड़ी। अस्पताल से फूटी कौड़ी का सामान नहीं मिला। -अरशद, निवासी
16 मई को मेरे बच्चे का जन्म नगीना अस्पताल में हुआ था। प्रशासन की तरफ से हमें किसी भी प्रकार की डाइट या सहायता नहीं दी गई। -आकिब, निवासी
लगभग 5-6 दिन पहले हमारे घर बच्चा हुआ। डिलीवरी नगीना सरकारी अस्पताल में हुई, लेकिन खाने-पीने की कोई सामग्री नहीं मिली। -इस्माइल, निवासी
अधिकारी का बयान
सरकार की ओर से निर्धारित डाइट में अगर कोई स्वास्थ्य केंद्र या स्टाफ अनियमितताएं बरत रहा है तो यह गंभीर मामला है। इसकी पूरी जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. कृष्ण कुमार, एसएमओ